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आयुष्मान भारत: हरियाणा के निजी अस्पतालों के 300 करोड़ अटके, IMA का 16 से इलाज बंद करने का एलान
Tue, 05 Mar 2024 02:16 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 05 Mar 2024 02:16 PM IST
सार
गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज देने के लिए आयुष्मान भारत योजना केंद्र सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है। हरियाणा में यह योजना चिरायु के नाम से चलाई जा रही है। इस योजना में प्रदेश के 38 लाख परिवारों के करीब 1.50 करोड़ से अधिक सदस्य शामिल हैं।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
हरियाणा में आयुष्मान भारत व चिरायु योजना के तहत इलाज के निजी अस्पतालों के करीब 300 करोड़ रुपये का भुगतान अटक गया है। कई जिलों के अस्पतालों का भुगतान तो छह माह से लेकर एक साल तक का बाकी है। बार-बार स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से मुलाकात के बाद भी राशि नहीं मिलने से नाराज इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने 16 मार्च से आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज नहीं करने का एलान किया है।
योजना के तहत सरकार के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में मरीज इलाज तो ले रहे हैं, लेकिन इसके बदले लंबे समय से सरकार की तरफ से निजी अस्पतालों को भुगतान नहीं किया जा रहा। इससे निजी अस्पताल संचालकों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। आईएमए ने इस मुद्दे पर राज्यस्तरीय बैठक कर भुगतान के लिए सरकार को 15 मार्च तक का समय दिया है। यदि 15 मार्च तक भुगतान नहीं मिला तो 16 मार्च से निजी अस्पताल योजना के तहत इलाज करना बंद कर देंगे।
नए दाम लागू नहीं होने से नाराजगी
भुगतान रुकने के अलावा निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के नए मूल्य लागू नहीं होने से भी नाराजगी है। आईएमए का कहना है कि केंद्र सरकार ने योजना के तहत नए मूल्य लागू कर दिए हैं, लेकिन हरियाणा सरकार ने अभी तक नए मूल्य लागू नहीं किए हैं। इससे निजी अस्पतालों को नुकसान हो रहा है। कांग्रेस के नूंह से विधायक आफताब अहमद ने बजट सत्र के दौरान यह मामला विधानसभा में भी उठाया था।
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525 निजी अस्पताल हैं पैनल में
आयुष्मान भारत योजना के तहत हरियाणा के कुल 1290 अस्पतालों को पैनल में रखा गया है। इसमें करीब 715 सरकारी और 575 निजी अस्पताल शामिल हैं। योजना के तहत कैंसर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों के साथ 1,500 के करीब दूसरी बीमारियों का सालाना पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज किया जाता है। निजी अस्पताल इलाज के बाद मरीज के बिलों को सरकार के पास भेजते हैं और सरकार इनका भुगतान करती है।
पिछले काफी समय से प्रदेशभर के निजी अस्पतालों के करोड़ों रुपये के बिल अटके हुए हैं। कई बार अधिकारियों से इस संबंध में बात हो चुकी है, लेकिन राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा। इसके अलावा जो बिल भेजे जाते हैं, उसमें भी राशि काट ली जाती है। कई जिलों में एक साल से अधिक समय से बिल अटके हैं। यदि भुगतान नहीं हुआ तो 16 मार्च से सभी निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज नहीं करेंगे। - डॉ. अजय महाजन, प्रधान, आईएमए हरियाणा।
अस्पतालों के बकाया का जिलावार आंकड़ा
जिला पैनल के अस्पताल बकाया भुगतान
हिसार 127 120 करोड़
पानीपत 54 25 करोड़
यमुनानगर 33 25 करोड़
सिरसा 77 25 करोड़
भिवानी 38 25 करोड़
जींद 16 15 करोड़
फतेहाबाद 19 10 करोड़
महेंद्रगढ़ 26 9 करोड़
करनाल 80 5 करोड़
कैथल 13 5 करोड़
कुरुक्षेत्र 20 2.5 करोड़
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योजना के तहत सरकार के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में मरीज इलाज तो ले रहे हैं, लेकिन इसके बदले लंबे समय से सरकार की तरफ से निजी अस्पतालों को भुगतान नहीं किया जा रहा। इससे निजी अस्पताल संचालकों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। आईएमए ने इस मुद्दे पर राज्यस्तरीय बैठक कर भुगतान के लिए सरकार को 15 मार्च तक का समय दिया है। यदि 15 मार्च तक भुगतान नहीं मिला तो 16 मार्च से निजी अस्पताल योजना के तहत इलाज करना बंद कर देंगे।
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नए दाम लागू नहीं होने से नाराजगी
भुगतान रुकने के अलावा निजी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज के नए मूल्य लागू नहीं होने से भी नाराजगी है। आईएमए का कहना है कि केंद्र सरकार ने योजना के तहत नए मूल्य लागू कर दिए हैं, लेकिन हरियाणा सरकार ने अभी तक नए मूल्य लागू नहीं किए हैं। इससे निजी अस्पतालों को नुकसान हो रहा है। कांग्रेस के नूंह से विधायक आफताब अहमद ने बजट सत्र के दौरान यह मामला विधानसभा में भी उठाया था।
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525 निजी अस्पताल हैं पैनल में
आयुष्मान भारत योजना के तहत हरियाणा के कुल 1290 अस्पतालों को पैनल में रखा गया है। इसमें करीब 715 सरकारी और 575 निजी अस्पताल शामिल हैं। योजना के तहत कैंसर, हार्ट अटैक जैसी गंभीर बीमारियों के साथ 1,500 के करीब दूसरी बीमारियों का सालाना पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज किया जाता है। निजी अस्पताल इलाज के बाद मरीज के बिलों को सरकार के पास भेजते हैं और सरकार इनका भुगतान करती है।
पिछले काफी समय से प्रदेशभर के निजी अस्पतालों के करोड़ों रुपये के बिल अटके हुए हैं। कई बार अधिकारियों से इस संबंध में बात हो चुकी है, लेकिन राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा। इसके अलावा जो बिल भेजे जाते हैं, उसमें भी राशि काट ली जाती है। कई जिलों में एक साल से अधिक समय से बिल अटके हैं। यदि भुगतान नहीं हुआ तो 16 मार्च से सभी निजी अस्पताल आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज नहीं करेंगे। - डॉ. अजय महाजन, प्रधान, आईएमए हरियाणा।
अस्पतालों के बकाया का जिलावार आंकड़ा
जिला पैनल के अस्पताल बकाया भुगतान
हिसार 127 120 करोड़
पानीपत 54 25 करोड़
यमुनानगर 33 25 करोड़
सिरसा 77 25 करोड़
भिवानी 38 25 करोड़
जींद 16 15 करोड़
फतेहाबाद 19 10 करोड़
महेंद्रगढ़ 26 9 करोड़
करनाल 80 5 करोड़
कैथल 13 5 करोड़
कुरुक्षेत्र 20 2.5 करोड़