बिना पूछे काटी सेना की सैलरी, मोदी फंड में दी
बिना पूछे सेना के अफसरों व जवानों की एक दिन की सैलरी प्रधानमंत्री राहत कोष में देने से एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सेना के अफसर व सैनिक नाराज है कि उनसे इस बारे में पूछा तक नहीं गया। बिना पूछे ही उनकी एक दिन की सैलरी काट दी गई है।
अनुशासन को ध्यान में रखते हुए सेना के अफसर खुलकर बोलने से कतरा रहे हैं, लेकिन अधिकारियों के नाराजगी के मैसेज वाट्सअप में खूब वायरल हो रहे हैं। पिछले हफ्ते भारतीय सेना की ओर से प्रधानमंत्री राहत कोष के लिए 100 करोड़ रुपये की राशि जमा कराई गई है।
सेना प्रमुख दलबीर सिंह ने राशि का चेक आर्मी हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया था। यह सैलरी जनवरी माह की काटी गई है। यानी फरवरी में अफसरों व सैनिकों को मिलने वाली सैलरी कम मिलेगी।
बताया जा रहा है कि भारतीय सेना की ओर से यह राशि जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ के विस्थापितों को दी गई है। इस बारे में सेना की ओर से कुछ भी बोलने से मना कर दिया गया है।
नहीं जारी हुआ कोई सरकुलर
नाम न छापने की शर्त पर सेना के एक अफसर ने बताया है कि उन्हें नहीं मालूम कि उनकी एक दिन की सैलरी कट गई है। इस बारे में सूचना उनके साथियों ने दी है।
उन्होंने जब और लोगों से पूछा तो पता चला कि सेना की ओर से कोई सरकुलर भी नहीं जारी हुआ है। आम तौर पर सरकारी कार्यालयों में राहत कोष में राशि देने के लिए एक सरकुलर जारी होता है और उसमें स्वैच्छिक से दान करने की बात कही जाती है।
आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल में जाने की तैयारी में
सेना प्रमुख के इस कदम से नाराज अफसरों का कहना है कि इस कदम से सेना में एक नई परंपरा शुरू हो जाएगी। जब भी कोई दूसरे सेना प्रमुख आएंगे तो वे फिर से नई घोषणा कर सकते हैं।
इससे अफसर व सैनिक नाराज होते रहेंगे, लेकिन कुछ नहीं बोल पाएंगे। यह पहली बार है कि सेना की ओर से इस तरह की कदम उठाया गया है। सेना तो पहले से काफी लोगों की मदद कर रही है। हर आपदा में लाखों लोगों को बचाया है।
वन रैंक वन पेंशन के लिए पहले से ही सेना लड़ रही है। ऊपर से इस तरह के कदम से सेना का मनोबल गिरता है। कभी भी दान राशि जबरदस्ती नहीं ली जाती है। इससे पहले किसी भी सेना के अधिकारी इस तरह राशि दान में नहीं दी।
रिटायर्ड कर्नल सीजेएस खैरा, जनरल सेक्रेटरी, साझा मोर्चा