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भाजपा-अकाली दल गठबंधन में पेंच: शिअद ने रखी एनएसए खत्म करने और बंदी सिंहों को रिहा करने की शर्त
Sat, 23 Mar 2024 08:34 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 23 Mar 2024 08:34 AM IST
सार
पार्टी अध्यक्ष सुखबीर बादल की अध्यक्षता में कोर कमेटी की बैठक में पारित विशेष प्रस्ताव में कहा गया कि हमने कभी इन हितों पर समझौता नही किया है और न ही भविष्य में करेंगे। प्रस्ताव में भारत सरकार से बंदी सिंहों की रिहाई के लिए अपना स्पष्ट स्टैंड रखा गया।
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सुखबीर बादल और नरेंद्र मोदी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भाजपा के साथ गठबंधन की अटकलों के बीच शिरोमणि अकाली दल की कोर कमेटी की बैठक में कई प्रस्ताव पारित किए गए, जिनसे गठबंधन का रास्ता कठिन होता दिख रहा है।
शिअद ने एक सुर में फैसला लिया कि पार्टी अपनी नीतियों और सिद्धांतों से किसी सूरत में समझौता नहीं करेगी। शिअद ने गठबंधन की चर्चा के बीच कई शर्तें कर दी हैं। इनमें एनएसए कानून को खत्म करना, बंदी सिंहों की रिहाई, अटारी बॉर्डर को व्यापार के लिए खोलना, किसानों को एमएसपी की गारंटी देना समेत कई अहम मुद्दे शामिल हैं।
तीन बड़े अकाली नेताओं ने कहा कि हमें पहले गठबंधन करना चाहिए और सरकार बनने के बाद तमाम मुद्दों को हल करवाना चाहिए, लेकिन बाकी अकाली नेताओं ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पंथक व पंजाब के मुद्दे हल होने पर ही समझौता होगा। जिन तीन नेताओं ने अलग राग अलापा वह तीनों लोकसभा चुनाव में अकाली दल की टिकट के प्रबल दावेदार हैं।
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कोर कमेटी की बैठक में फैसला लिया गया कि पार्टी खालसा पंथ, सभी अल्पसंखकों के साथ सभी पंजाबियों के हितों के रक्षक के रूप में अपनी ऐतिहासिक भूमिका से कभी पीछे नहीं हटेगी। हम सरबत का भला के दृष्टिकोण के आधार पर राज्य में शांति व सद्भाव के माहौल को बनाए रखने के लिए अपनी पूरी ऊर्जा के साथ काम करना जारी रखेंगे।
शिरोमणि अकाली दल सिखों और सभी पंजाबियों की एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में राज्यों को अधिक शक्तियों और असली स्वायत्तता के लिए अपनी लडाई जारी रखेगी। प्रस्ताव में कहा गया कि बंदी सिंहों की रिहाई के लिए पार्टी प्रतिबद्ध है। पांच साल पहले श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर यह बात स्पष्ट तौर पर रखी गई थी। इसलिए इससे पीछे हटने का सवाल ही नहीं हैं। शिअद किसानों और खेतिहर मजदूरों के हितों की वकालत करता रहेगा और उनसे किए गए सभी वादे पूरे किए जाने चाहिए।
हरियाणा के लिए एक अलग गुरुद्वारा कमेटी बनाने की निंदा
प्रस्ताव में खालसा पंथ के धार्मिक मामलों और संस्थानों में सरेआम हस्तक्षेप को रोकने का भी आह्वान किया गया। इसमें कहा गया कि हम हरियाणा के लिए एक अलग गुरुद्वारा कमेटी की स्थापना करके एसजीपीसी को तोड़ने की साजिश की कड़ी निंदा करते हैं। बैठक में डीएसजीएमसी, तख्त श्री हजूर साहिब, नांदेड़ साहिब और तख्त श्री पटना साहिब का नियंत्रण छीनने के प्रयासों की भी कड़ी आलोचना की गई। वहीं, नई दिल्ली में श्री गुरु रविदास मंदिर तोड़ने और उसके निर्माण के लिए भूमि आंवटित करने की मांग की गई। कोर कमेटी ने अन्य देशों के साथ व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए अटारी और फिरोजपुर बॉर्डर खोलने का भी आह्वान किया।
एनएसए का विरोध
तमाम नेताओं ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल मानवाधिकारों के लिए खड़ा है और एनएसए जैसे कठोर काले कानूनों के दुरुपयोग के खिलाफ है। इमरजेंसी के दौरान भी हमने ऐसे कानूनों का विरोध किया था। प्रकाश सिंह बादल जैसे अधिकतर नेताओं पर भी लगातार कांग्रेस शासकों ने एनएसए जैसे कानून लागू किए थे। इसने बाबा साहिब भीम राव आंबेडकर की ओर से बनाए गए भारत के संविधान की आत्मा को कमजोर करने के प्रयास का भी कड़ा विरोध किया।
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शिअद ने एक सुर में फैसला लिया कि पार्टी अपनी नीतियों और सिद्धांतों से किसी सूरत में समझौता नहीं करेगी। शिअद ने गठबंधन की चर्चा के बीच कई शर्तें कर दी हैं। इनमें एनएसए कानून को खत्म करना, बंदी सिंहों की रिहाई, अटारी बॉर्डर को व्यापार के लिए खोलना, किसानों को एमएसपी की गारंटी देना समेत कई अहम मुद्दे शामिल हैं।
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तीन बड़े अकाली नेताओं ने कहा कि हमें पहले गठबंधन करना चाहिए और सरकार बनने के बाद तमाम मुद्दों को हल करवाना चाहिए, लेकिन बाकी अकाली नेताओं ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पंथक व पंजाब के मुद्दे हल होने पर ही समझौता होगा। जिन तीन नेताओं ने अलग राग अलापा वह तीनों लोकसभा चुनाव में अकाली दल की टिकट के प्रबल दावेदार हैं।
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कोर कमेटी की बैठक में फैसला लिया गया कि पार्टी खालसा पंथ, सभी अल्पसंखकों के साथ सभी पंजाबियों के हितों के रक्षक के रूप में अपनी ऐतिहासिक भूमिका से कभी पीछे नहीं हटेगी। हम सरबत का भला के दृष्टिकोण के आधार पर राज्य में शांति व सद्भाव के माहौल को बनाए रखने के लिए अपनी पूरी ऊर्जा के साथ काम करना जारी रखेंगे।
शिरोमणि अकाली दल सिखों और सभी पंजाबियों की एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में राज्यों को अधिक शक्तियों और असली स्वायत्तता के लिए अपनी लडाई जारी रखेगी। प्रस्ताव में कहा गया कि बंदी सिंहों की रिहाई के लिए पार्टी प्रतिबद्ध है। पांच साल पहले श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर यह बात स्पष्ट तौर पर रखी गई थी। इसलिए इससे पीछे हटने का सवाल ही नहीं हैं। शिअद किसानों और खेतिहर मजदूरों के हितों की वकालत करता रहेगा और उनसे किए गए सभी वादे पूरे किए जाने चाहिए।
हरियाणा के लिए एक अलग गुरुद्वारा कमेटी बनाने की निंदा
प्रस्ताव में खालसा पंथ के धार्मिक मामलों और संस्थानों में सरेआम हस्तक्षेप को रोकने का भी आह्वान किया गया। इसमें कहा गया कि हम हरियाणा के लिए एक अलग गुरुद्वारा कमेटी की स्थापना करके एसजीपीसी को तोड़ने की साजिश की कड़ी निंदा करते हैं। बैठक में डीएसजीएमसी, तख्त श्री हजूर साहिब, नांदेड़ साहिब और तख्त श्री पटना साहिब का नियंत्रण छीनने के प्रयासों की भी कड़ी आलोचना की गई। वहीं, नई दिल्ली में श्री गुरु रविदास मंदिर तोड़ने और उसके निर्माण के लिए भूमि आंवटित करने की मांग की गई। कोर कमेटी ने अन्य देशों के साथ व्यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए अटारी और फिरोजपुर बॉर्डर खोलने का भी आह्वान किया।
एनएसए का विरोध
तमाम नेताओं ने कहा कि शिरोमणि अकाली दल मानवाधिकारों के लिए खड़ा है और एनएसए जैसे कठोर काले कानूनों के दुरुपयोग के खिलाफ है। इमरजेंसी के दौरान भी हमने ऐसे कानूनों का विरोध किया था। प्रकाश सिंह बादल जैसे अधिकतर नेताओं पर भी लगातार कांग्रेस शासकों ने एनएसए जैसे कानून लागू किए थे। इसने बाबा साहिब भीम राव आंबेडकर की ओर से बनाए गए भारत के संविधान की आत्मा को कमजोर करने के प्रयास का भी कड़ा विरोध किया।