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Hindi News ›   Chandigarh ›   1100 students passout from Punjab University Department of Gandhian and Peace Studies in 48 years

यहां गांधी दर्शन की पढ़ाई कीजिए, रोजगार के लिए चिंता मुक्त हो जाइए

Wed, 02 Oct 2019 05:09 AM IST
संदीप भट्ट सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़
सुशील कुमार, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: संदीप भट्ट Updated Wed, 02 Oct 2019 05:09 AM IST
सार

  • 48 साल में 1100 स्टूडेंट्स पासआउट, 950 से अधिक को मिला रोजगार
  •  ईरान, कोरिया, थाईलैंड, नाइजीरिया समेत आधा दर्जन देशों के युवा भी पीएचडी करने पहुंच रहे
  •  कई विदेशी विश्वविद्यालयों में वाइस चांसलर भी बने

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1100 students passout from Punjab University Department of Gandhian and Peace Studies in 48 years

विस्तार

बढ़ती आबादी के साथ साथ देश में रोजगार का संकट भी गहरा रहा है। तमाम युवाओं ने अपना स्वरोजगार शुरू किया है तो कुछ ने अपनी फील्ड बदली है। फील्ड बदलकर पढ़ाई करने के बाद भी नौकरी की गारंटी नहीं रही, लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी के डिपार्टमेंट ऑफ गांधीयन एंड पीस स्टडीज में आपका दाखिला हो गया तो समझो रोजगार की चिंता खत्म हो गई।

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यहां से 48 साल में निकले लगभग 1100 विद्यार्थियों में से 950 से अधिक को नौकरियां मिली हैं। कोई प्रशासनिक अफसर बना तो कोई जज। ईरान, कोरिया, थाईलैंड, नाइजीरिया के विद्यार्थियों ने भी यहां से पीएचडी की है। वह भी अपने अपने देशों में वाइस चांसलर तक बने हैं।
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पंजाब यूनिवर्सिटी में वर्ष 1970 तक राजनीतिक विज्ञान के साथ विद्यार्थियों को गांधी दर्शन का पाठ पढ़ाया गया, उसके बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर स्टडी के लिए अलग से डिपार्टमेंट ऑफ गांधीयन एंड पीस स्टडीज की शुरुआत हुई। इसके लिए अनोखा गांधी भवन पीयू में तैयार हुआ। इस भवन में गांधी दर्शन से जुड़ी हर चीज विद्यमान है।
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यहां शुरुआत में 20 सीटों के लिए एमए की पढ़ाई शुरू हुई। धीरे धीरे देश में युवाओं को रोजगार मिलता गया और डिमांड के आधार पर एमफिल, पीएचडी शुरू कर दी गई। वर्तमान में एमए में 40 सीटें हैं। एमफिल में 10 व पीएचडी में 12 सीट हैं।

यहां विभिन्न सेक्टर से जुड़े विद्यार्थी एडमिशन के लिए आते हैं। पासआउट होते होते वह गांधी के प्रिंसिपल को अपनाते हुए आगे बढ़ते हैं। रोजगार के आंकड़ों को देखते हुए आज इस विभाग में दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड समेत 11 राज्यों के विद्यार्थी एडमिशन के लिए आवेदन करते हैं। हर साल एमए की 40 सीटों के लिए 700 से अधिक आवेदन आते हैं। रिसर्च के लिए विदेशी स्टूडेंट्स की भी भरमार रहती है।

इन्होंने देश दुनिया में बजाया डंका

इसी विभाग से पढ़े छात्र हरकृपाल खटाना गुजरात में कमिश्नर हैं। इसी तरह नीरू ठाकुर जज, अजीत अत्री चंडीगढ़ में सेशन जज हैं। यूथ सत्ता नामक एनजीओ खोलकर प्रमोद दर्जनों लोगों को गांधी का पाठ पढ़ा रहे हैं। पूर्व छात्र वसीम, प्रियवर्ती आदि ने भी एनजीओ खोल लिया जो दूसरे विद्यार्थियों को रोजगार दे रहे हैं। यहां से पास आउट महमूद ईरान में ही आजाद विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर हैं। इसके अलावा भी सैकड़ों विद्यार्थी विभिन्न सेक्टरों में धूम मचा रहे हैं।


 

आज युवा गांधी के सिद्धांतों पर चलना पसंद कर रहे हैं। यही कारण है कि एमए में एडमिशन के लिए हर साल सैकड़ों आवेदन मिल रहे हैं। 11 राज्यों के अलावा विदेशों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी यहां पढ़ने आ रहे हैं। रोजगार का भी उनके सामने संकट नहीं है, उन्हें नौकरियां मिल रही हैं। हर क्षेत्र में वह नाम कमा रहे हैं। - प्रो. आशु पसरीचा, चेयरमैन, डिपार्टमेंट ऑफ गांधीयन एंड पीस स्टडीज पीयू

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