{"_id":"67517f4d754e97351a06991f","slug":"kundali-me-rajyoga-rajadhiraj-yoga-in-kundali-know-how-to-make-and-benefits-2024-12-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kundali: कुंडली में बनने वाला यह अद्भुत राजयोग व्यक्ति को बना देता है रंक से राजा","category":{"title":"Predictions","title_hn":"बोले तारे","slug":"predictions"}}
Kundali: कुंडली में बनने वाला यह अद्भुत राजयोग व्यक्ति को बना देता है रंक से राजा
Thu, 05 Dec 2024 03:55 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 05 Dec 2024 03:55 PM IST
सार
Rajadhiraja Yoga In Kundali: कुंडली में कई तरह के राजयोग का निर्माण होता है, जिसमें एक राजाधिराज नाम का राजयोग होता है। इस योग के निर्माण से व्यक्ति हर क्षेत्र में अच्छी सफलता और खूब सारा धन प्राप्त करता है। जानते हैं राजाधिराज योग कैसे और कब बनता है।
विज्ञापन
कुंडली में राजयोग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Rajadhiraja Yoga In Kundali: वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी किसी जातक का जन्म होता है तो जन्म के समय पूर्व क्षितिज में उदित होने वाली राशि से उसके लग्न का निर्धारण हो जाता है, जिसे लग्न कुंडली के नाम से जाना जाता है। जातक के जन्म के समय में निर्माण होने वाली कुंडली में विराजमान ग्रहों, राशियों और भावों के आपसी तालमेल से जीवन किस दिशा में जाएगा इसके बारे में काफी जानकारी मिल जाती है। कुंडली के विभिन्न भावों में बैठे ग्रहों और राशियों के स्वामी से किसी न किसी तरह से बने संबंधों से राजयोग का निर्माण होता है।
विज्ञापन
कुंडली में कई तरह के राजयोग बनने से व्यक्ति के जीवन में उसे मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा, अपार धन-दौलत और ऐशोआराम समेत कई तरह के सुखों की प्राप्ति होती है। ऐसा ही एक राजयोग कुंडली में राजाधिराज नाम का बनता है। जिन जातकों की कुंडली में यह राजयोग बनता है वह व्यक्ति रंक से राजा बन जाता है। यानी जातक का जन्म एक गरीब परिवार में होने के बावजूद वह अपने जीवन में तमाम तरह की सुख-सुविधाओं का आनंद उठता है। ऐसा जातक बहुत ही ज्यादा भाग्यशाली होता है। आइए जानते हैं राजाधिराज राजयोग कुंडली में कब और कैसे बनता है और इसका प्रभाव जातकों के जीवन पर किस प्रकार पड़ता है।
विज्ञापन
कुंडली में राजाधिराज योग कब बनता है ?
कुंडली में कई तरह के राजयोग बनने में मुख्य रूप से कुंडली के केंद्र और त्रिकोण भावों की खास भूमिका होती है। कुंडली के केंद्र भाव को विष्णु स्थान और त्रिकोण भाव को लक्ष्मी स्थान माना गया है। किसी भी लग्न कुंडली में पहला, चौथा, सातवां और दसवां भाव भगवान विष्णु का स्थान माना जाता है। यह स्थान कुंडली का केंद्र स्थान है। वहीं जन्म कुंडली का पहला, पंचम और नवम भाव को लक्ष्मी स्थान कहते हैं। इसे त्रिकोण भाव के नाम से जाना जाता है। इस तरह से जब किसी जन्म कुंडली में केंद्र स्थान के स्वामी का संबंध त्रिकोण स्थान के स्वामी के साथ बने तो इस तरह का राजयोग का निर्माण होता है।
विज्ञापन
कुंडली के पहले भाव का स्वामी पंचम या फिर नवम भाव में स्थित हो या फिर सप्तम भाव का स्वामी पंचम भाव में स्थित हो तो राजयोग का निर्माण होता है।
जब किसी जातक की कुंडली में चौथे, पंचम या नवम भाव के स्वामी यानी चतुर्थेश, पंचमेश या फिर नवमेश का आपस में परस्पर द्दष्टि संबंध बने तो राजाधिराज राजयोग बनता है।
इसके अलावा सप्तम भाव का स्वामी पंचम में या फिर नवम भाव में मौजूद हो तो राजाधिराज योग का निर्माण होता है।
वहीं जब सप्तमेश का पंचमेश या फिर नवमेश के साथ राशि परिवर्तन योग बने तो इस तरह का राजयोग का निर्माण होता है।
जन्मकुंडली में राजाधिराज योग के फायदे
-कुंडली में राजाधिराज योग बनने से जातक धनवान, बुद्धिमान, प्रतिभाशाली, चरित्रवान और अनेक गुणों वाला होता है।
-अगर कुंडली में केंद्र-त्रिकोण भाव के स्वामियों का आपस में संबंध बने तो जातक राजाओं की तरह सुख की प्राप्ति करता है।
-कुंडली में राजाधिराज योग के निर्माण से व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली और हर क्षेत्र में सफलता हासिल करने वाला होता है।
यह भी पढ़ें- आज का राशिफल और वार्षिक राशिफल 2025