ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि जिस ग्रह की स्थिति कुण्डली में अनुकूल नहीं होती है उसकी दशा के दौरान कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। प्रतिकूल ग्रहों को अनुकूल बनाने के लिए ज्योतिषशास्त्र में कई तरीके बताए गये हैं। इनमें एक है रत्न धारण करना। लेकिन रत्नों की कीमत अधिक होने के कारण बहुत से लोग रत्न धारण नहीं कर पाते। कुछ लोग इसलिए रत्न धारण नहीं करते हैं कि लोग उन्हें अंधविश्वासी समझेंगे। इस तरह की समस्या का एक आसान सा समाधान है, जिस ग्रह को अनुकूल बनाना है उस ग्रह से संबंधित रंग का दैनिक जीवन में अधिक से अधिक उपयोग करें।
ज्योतिषशास्त्री चन्द्रप्रभा बताती हैं कि, हर रत्न का रंग अलग-अलग होता है। रत्न से परावर्तित किरणें रत्न धारण करने वाले व्यक्ति के अंदर संबंधित ग्रह की उर्जा को विकसित करती है। इससे ग्रह की प्रतिकूलता में कमी आती है। इसी प्रकार जब व्यक्ति किसी ग्रह को मजबूत बनाने के लिए उस ग्रह से संबंधित रंगों का दैनिक जीवन में अधिक से अधिक उपयोग करने लगता है तब उस ग्रह की उर्जा आस-पास विकसित होने लगती है। यह उसी प्रकार लाभप्रद होती है जिस प्रकार रत्न धारण करने से लाभ मिलता है।
जिस ग्रह को व्यक्ति मजबूत बनाना चाहता हो, उस ग्रह से संबंधित रंग को घर की दीवारों पर लगायें। इस रंग की बेडशीट, तकिये का कवर, वस्त्र धारण करें तो बिना रत्न धारण किये भी ग्रहों के अशुभ प्रभाव को दूर किया जा सकता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सूर्य तथा मंगल को मजबूत बनाने के लिए लाल रंग, चंद्रमा तथा शुक्र को शुभ फलादयी बनाने के लिए सफेद एवं सिल्वर रंग का प्रयोग किया जा सकता है। बृहस्पति के लिए पीला रंग, क्रीम और केसर कलर उत्तम होता है। बुध के लिए हरा रंग, शनि के लिए काला रंग तथा राहू-केतु के लिए स्मोकी, सलेटी और ग्रे रंग का उपयोग दैनिक जीवन में करना लाभप्रद होता है।