हर व्यक्ति अपने प्रारब्ध के साथ जन्म लेता है। बारह घरों और उनमें फैले नौ ग्रहों की स्थिति का चित्र व्यक्ति के भाग्य, प्रारब्ध की ओर इशारा करता हैं। शिक्षा–प्राप्ति के लिए गुरु और बुध का अहम् स्थान होता है। वैसे हर ग्रह अपनी प्रकृति एवं बल के अनुसार अपना फल देते है।
पढ़ें,823 साल बाद बन रहा यह योग, किसके लिए शुभ हैजातक की कुंडली का चौथा पांचवा भाव, उनका स्वामी बली हो, गुरु–बुध की स्थिति भी मजबूत हों तो समझ लें कि बच्चा होनहार है। वैसे तो कई योग हैं, लेकिन कुछ खास और पहली नजर में स्पष्ट होने वाली स्थितियां जरूर ध्यान रखना चाहिए।
पढ़ें,आखिर भोलेनाथ को कांवर चढ़ाने की परंपरा क्यों है?जैसे पाप–ग्रह का असर हो तो वह तकनीकी-शिक्षा की ओर रूझान दिलाएगा, चंद्रमा एवं शुक्र से प्रभावित हो तो कला-क्षेत्र में जबकि गुरु बैंक ,वकालत, शिक्षा की ओर सफलता दिलाता है।