राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) एंड डेयरी सर्विसेज के चेयरमैन डॉ. मीनेश शाह ने कहा कि देश में दूध उत्पादन की क्षमता और गुणवत्ता बढ़ाने के लिए लगातार नई तकनीक और आधुनिक तरीकों को अपनाया जा रहा है। किसानों के साथ महिलाओं और युवाओं को भी डेयरी व्यवसाय से जोड़कर उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। डॉ. शाह रविवार को होटल ताज में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘रंगीलो काशी’ कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को नई जानकारी, तकनीक और अवसरों से जोड़ना तथा डेयरी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देना है। पिछले वर्ष इस कार्यक्रम का आयोजन जयपुर में किया गया था, जबकि इस वर्ष वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने बताया कि अच्छी नस्ल की गायों के विकास के लिए आधुनिक तकनीक से तैयार सीमेन का उपयोग किया जा रहा है। इससे अधिक दूध देने वाली अच्छी नस्ल की गायें तैयार करने में मदद मिलेगी और पशुपालकों की आमदनी बढ़ेगी। दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए तीन स्तरों पर गुणवत्ता परीक्षण की व्यवस्था की गई है। डॉ. शाह ने बताया कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा दूध बाजार है। राज्य सरकार के निर्देशन में बंद पड़ी दुग्ध डेयरियों को टेकओवर कर उन्हें संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में वर्ष 2022 में वाराणसी की पराग डेयरी को भी टेकओवर किया गया था, जिसकी वर्तमान क्षमता दो लाख लीटर प्रतिदिन है। इसके अलावा कानपुर, गोरखपुर और कन्नौज के डेयरी प्लांट भी संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पशुपालकों से गोबर खरीदकर उससे प्रतिदिन करीब 4000 क्यूबिक मीटर बायोगैस तैयार की जा रही है। किसानों से गोबर एक रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जा रहा है। इससे किसानों को अतिरिक्त आय के साथ स्वच्छ ऊर्जा को भी बढ़ावा मिल रहा है। डॉ. शाह ने कहा कि युवाओं को डेयरी क्षेत्र से जोड़ने के लिए पांच गायों का मॉडल तैयार कर उन्हें प्रशिक्षण और मार्गदर्शन दिया जा रहा है। किसानों और युवाओं को गायों की बेहतर देखभाल, पशुपालन प्रबंधन और दूध उत्पादन बढ़ाने की तकनीकों की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि डेयरी क्षेत्र में तकनीक, गुणवत्ता और बेहतर प्रबंधन के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।