नगवां ब्लॉक स्थित कोदई खास में आदिवासी युवाओं ने बुधवार को जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए सड़क पर उतरकर पेड़ हैं तो प्राण हैं आंदोलन के तहत आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों ने अपील की कि आदिवासी क्षेत्रों के पेड़, पानी, पहाड़ और जल-जंगल-जमीन को उजाड़ा न जाए। इस दौरान विनय कुमार गोंड ने कहा कि जल, जंगल और जमीन उनके पुरखों की विरासत है। इसे तहस-नहस नहीं किया जाना चाहिए। गणेश गोंड ने कहा कि जल और जंगल उनकी विरासत हैं और इन्हें न उजाड़ा जाए। वहीं प्रिया गोंड और संतोष गोंड ने जल, जंगल और जमीन को आदिवासी समाज की पहचान बताया। चंद्रावती गोंड और सूर्य प्रकाश खरवार ने कहा कि जल, जंगल और जमीन से उनकी अस्मिता जुड़ी हुई है। इसके संरक्षण के लिए वे हर संभव संघर्ष करेंगे और जंगलों को कटने नहीं देंगे। उनके पूर्वज और धरती आबा बिरसा मुंडा ने जंगलों की रक्षा के लिए संघर्ष किया था। कार्यक्रम में बसमतिया चेरो, गुरुजी चेरो, मुन्नी खरवार, बैजनाथ, बाबूलाल, रामचंदर आदि शामिल रहे।