लगघाटी में करीब 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित प्रसिद्ध डायना सौर झील में इस बार 20 भादो के दिन स्नान पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। देवी-देवताओं की ओर से मिले आदेश के बाद लोगों से झील तक पहुंचकर स्नान नहीं करने की अपील की गई है। देव समाज के अनुसार झील और आसपास के धार्मिक स्थलों में बढ़ रही गंदगी से पवित्रता प्रभावित हो रही है। घाटी की आराध्य देवी माता फुंगणी के कारदार रामलाल ठाकुर ने बताया कि देव आदेश के अनुसार 20 भादो को डायना सौर झील में स्नान प्रतिबंधित रहेगा। उन्होंने झील और देवी-देवताओं के प्रति आस्था रखने वाले लोगों से इस दिन यहां स्नान के लिए नहीं पहुंचने का आग्रह किया है। रामलाल ठाकुर के अनुसार डायना सौर झील तक पहुंचने के लिए छोटा भंगाल ट्रैक और फुंगणी धार का रास्ता प्रमुख हैं। इन रास्तों में कई देवी-देवताओं के स्थान आते हैं। यहां पहुंचने वाले कुछ लोग रात में टेंट लगाकर ठहरते हैं। आरोप है कि इस दौरान कुछ लोग नशे का सेवन करने के साथ शोर-शराबा करते हैं और आसपास गंदगी भी छोड़ जाते हैं। इससे धार्मिक स्थलों की पवित्रता प्रभावित हो रही है। देव समाज ने इसी स्थिति पर चिंता जताई है। देव समाज ने लगघाटी के अलावा मंडी, कांगड़ा, बड़ा भंगाल, छोटा भंगाल और चौहार घाटी क्षेत्र के लोगों से भी 20 भादो के दिन डायना सौर झील में स्नान के लिए नहीं पहुंचने की अपील की है। कारदार ने कहा कि लोगों को देव आज्ञा का पालन करते हुए झील और आसपास के धार्मिक स्थलों की स्वच्छता एवं पवित्रता बनाए रखने में सहयोग करना चाहिए। उनका कहना है कि बढ़ती गंदगी से देवी-देवताओं के स्थान दूषित हो रहे हैं, जिससे देव समाज में नाराजगी है। हिमाचल में 20 भादो के दिन झीलों, झरनों और नदी-नालों के संगम स्थलों पर स्नान करने की परंपरा रही है। मान्यता है कि इस समय पहाड़ों में मौजूद औषधीय जड़ी-बूटियों का रस पानी में घुलता है और इससे स्नान करने पर त्वचा संबंधी रोगों से राहत मिलती है। इसी मान्यता के चलते 20 भादो को कुल्लू के लिया संगम, मणिकर्ण, सरेउलसर, रुद्रनाग, खीरगंगा समेत कई नदी-नालों, संगम स्थलों और झरनों पर लोग स्नान के लिए पहुंचते हैं। इसी परंपरा के बीच इस बार डायना सौर झील में स्नान नहीं करने की अपील की गई है।