{"_id":"afb3b39c2d1c59b079eea6f08913c8af","slug":"talab-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मर्डर केस में बरी आठ साल बाद तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मर्डर केस में बरी आठ साल बाद तलब
ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा
Updated Tue, 02 Feb 2016 12:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट ने गजरौला के गांव शकूराबाद में 12 साल पहले हुए शरीफ मर्डर केस की फाइल फिर से खोल दी है। सरकारी अपील को स्वीकार करते हुए आठ वर्ष पूर्व बरी किए गए सभी अभियुक्तों को 16 फरवरी को तलब किया है। आरोपियों के वारंट भी जारी कर दिए हैं।
गजरौला थाना क्षेत्र के गांव शकूराबाद निवासी शरीफ की भाई साबिर पुत्र नसीबा से खेत के लिए रास्ता न देने पर रंजिश चली आ रही थी। 16 नवंबर 2004 को शरीफ अपने बेटों के साथ खेत में गन्ने छील रहा था। आरोप था कि, तभी साबिर अपने बेटों के साथ वहां आ धमका और गन्ने की पूलियां उठाकर अपने खेत में डालने लगा।
विरोध करने पर साबिर और उसके पुत्रों ने शरीफ और उसके बेटों को लाठी डंडों और तबल मारकर घायल कर दिया था। बाद में साबिर के पुत्र शमशाद ने लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर शरीफ की हत्या कर दी थी। मृतक के पुत्र शमीम अहमद ने चाचा साबिर और उसके पुत्र शमशाद, खुशी, अहसान व इरफान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
विज्ञापन
31 अगस्त 2007 में अदालत ने शमशाद को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई और बाकी आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया था। इस केस की अपील हाईकोर्ट में की गई थी। आठ साल बाद हाईकोर्ट ने सरकारी अपील को स्वीकार कर लिया और पांचों अभियुक्तों के वारंट जारी कर उन्हें 19 फरवरी को तलब किया है।
विज्ञापन
गजरौला थाना क्षेत्र के गांव शकूराबाद निवासी शरीफ की भाई साबिर पुत्र नसीबा से खेत के लिए रास्ता न देने पर रंजिश चली आ रही थी। 16 नवंबर 2004 को शरीफ अपने बेटों के साथ खेत में गन्ने छील रहा था। आरोप था कि, तभी साबिर अपने बेटों के साथ वहां आ धमका और गन्ने की पूलियां उठाकर अपने खेत में डालने लगा।
विज्ञापन
विरोध करने पर साबिर और उसके पुत्रों ने शरीफ और उसके बेटों को लाठी डंडों और तबल मारकर घायल कर दिया था। बाद में साबिर के पुत्र शमशाद ने लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर शरीफ की हत्या कर दी थी। मृतक के पुत्र शमीम अहमद ने चाचा साबिर और उसके पुत्र शमशाद, खुशी, अहसान व इरफान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
विज्ञापन
31 अगस्त 2007 में अदालत ने शमशाद को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई और बाकी आरोपियों को दोष मुक्त कर दिया था। इस केस की अपील हाईकोर्ट में की गई थी। आठ साल बाद हाईकोर्ट ने सरकारी अपील को स्वीकार कर लिया और पांचों अभियुक्तों के वारंट जारी कर उन्हें 19 फरवरी को तलब किया है।