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गुस्से-जज्बात में आकर हो रहे तलाक रोके जाएं

ब्यूरो/अमर उजाला अमरोहा Updated Fri, 11 Dec 2015 12:11 AM IST
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आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड परिवारों के बिखराव से बेहद चिंतित है। समाज में तलाक रूपी बुराई लगातार बढ़ती जा रही है। अदालतों तक ज्यादा मामले पहुंच रहे हैं। इस पर गहन गुफ्तगू बोर्ड कार्यकारिणी ने दूसरे सत्र की बैठक में की। तय किया गया कि तहरीक के जरिए मुस्लिम परिवारों को टूटने से बचाया जाए। गुस्से, जज्बात में हो रहे तलाक रोके जाएं।
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बोर्ड कार्यकारिणी की बुधवार देर रात तक चली दूसरे सत्र की बैठक में कार्यकारी महासचिव मौलाना वली रहमानी की अध्यक्षता में मुस्लिम समाज में तलाक के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की गई। तलाक के बहुत ज्यादा मामले अदालतों तक पहुंचने को गंभीरता से लिया गया।


देशभर में गुस्से, जज्बात में आकर छोटी-छोटी बातों पर तलाक होने को समाज के लिए अच्छा संदेश नहीं है। तलाक के मामले कैसे कम हों इस पर गहन चिंतन किया गया। परिवारों टूटने के बजाए मजबूत किए जाने पर विचार किया गया।

इसके लिए सामाजिक बुराइयां दूर करने और छोटे-छोटे विवादों में तलाक की नौबत न आने देने पर कैसे संदेश दिया जाए इस पर भी विचार हुआ। बोर्ड के सदस्यों ने तय किया कि तहरीक के जरिए इस बुराई को खत्म करने का संदेश घर-घर पहुंचाने का फैसला हुआ। महिलाएं परिवार को संभालती हैं इसमें महिलाओं की अहम जिम्मेदारी है।

रिटायर्ड जज, वकीलों की लेंगे मदद
पर्सनल लॉ बोर्ड ने तलाक के मामले अदालतों में बढ़ने पर रिटायर जज और वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मदद लेने का भी फैसला किया है। क्योंकि अदालतों में फैसले शरीयत के मुताबिक नहीं हो रहे हैं।

अदालतों तक शरीयत के मुताबिक फैसले कराने के लिए रिटायर जज और अधिवक्ताओं से मदद ली जाएगी। इससे काफी हद तक बदलाव आएगा।

तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से नाइत्तफाकी
बोर्ड की सदस्य डॉक्टर असमा ने कहा कि  भले ही मुस्लिम महिलाएं तलाक के मुद्दे पर अदालती आदेशों से खुश हों,  लेकिन पर्सनल लॉ बोर्ड से जुड़ी महिलाएं शरीयत कानून को ही सही मानती हैं।

तलाक के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि 1937 के शरीयत एप्लीकेशन एक्ट में  साफ है कि वो अदालतों के जरिए लागू होगा। अगर सुप्रीम कोर्ट कुछ कह रहा है तो उससे हमें नाइत्तेफाकी है।  

कोलकाता या भोपाल में होगा जलसा-ए-आम
आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड का जलसा ए आम अगले साल 2016 में भोपाल या कोलकाता में होगा। बोर्ड की बैठक में इस पर भी चर्चा हुई।

लेकिन अभी फैसला नहीं हुआ कि जलसा कहां होगा। इन दोनों महानगरों में से ही किसी एक में जलसा ए आम होगा।

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