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कोटा सिंड्रोम: झुंझलाहट, नींद न आने, सामान फेंकने की समस्या, इस वजह से बीमारियों के मकड़ जाल में फंस रहे युवा

Tue, 03 Sep 2024 04:01 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 03 Sep 2024 04:01 PM IST
सार

राजस्थान के कोटा में पढ़ाई करने के लिए जा रहे युवा मिशन में कामयाबी न मिलने पर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग में हर महीने 10 से अधिक युवा पहुंच रहे हैं, जो धड़कन बढ़ने, झुंझलाहट की समस्या भी से परेशान हैं। उनकी काउंसिलिंग के साथ उन्हें दवा दी जा रही है। 

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Youth in grip of Kota syndrome missing sleep at night and risk of depression
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : istock

विस्तार

मेडिकल, इंजीनियरिंग में दाखिले की तैयारी के लिए कोटा गए युवा बीच में पढ़ाई छोड़कर लौट रहे हैं। इसके पीछे की वजह बेहतर प्रदर्शन न होने के साथ और भी कई हैं। रात में नींद न आने, डिप्रेशन, झुंझलाहट की समस्या बढ़ रही है। उनकी धड़कन भी सामान्य से तेज गति से चल रही है। बीएचयू अस्पताल के न्यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी में हर महीने 25 साल तक के 10 से अधिक युवा उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार यही कोटा सिंड्रोम है। ऐसे में विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों की भी काउंसिलिंग करवाई जा रही है। उन्हें कई तरह की दवाइयां भी दी जा रही हैं।

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राजस्थान में कोटा को कोचिंग का हब कहा जाता है। जो युवा वहां अपने मिशन में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं, वह बीमारियों के मकड़ जाल में फंसते जा रहे हैं। न्यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. विजयनाथ मिश्र का कहना है कि ओपीडी में युवाओं से बातचीत पर पता चलता है कि कोई परीक्षा में फेल हो गया है तो किसी को मनचाहा नंबर नहीं मिल सका है। ऐसे युवाओं में झुंझलाहट, नींद न आने, धड़कन बढ़ने, घरों में सामानों को इधर उधर फेंकने की समस्या देखने को मिल रही है। यह देखने को मिल रहा है कि बहुत से माता-पिता बच्चों के इच्छा के विपरीत उन पर दबाव देकर कोटा भेज देते हैं। इस पर रोक लगाने की जरूरत है।

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मिर्गी के भी दिख रहे हैं लक्षण

प्रो. विजयनाथ मिश्र का कहना है कि जो युवा कोटा सिंड्रोम की चपेट में आ रहे हैं, उनकी काउंसिलिंग के साथ ही नींद की दवा, धड़कन सामान्य रहने की दवा भी दी जा रही है। पिछले एक साल में 150 युवाओं को परिजन उपचार के लिए लेकर बीएचयू अस्पताल आ चुके हैं। 20 युवाओं में मिर्गी के लक्षण भी देखने को मिले हैं। बचाव के उपाय, दवा के साथ ही अभिभावकों से सेहत पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है।
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