UP: मंदिर में दर्शन, फिर मां को नींद की दवा देकर सुलाया, उसी कमरे में कर ली खुदकुशी; सुसाइड नोट में लिखी वजह
वाराणसी जिले के एक होटल में दिल्ली के युवक ने फंदे से लटककर खुद को मौत के हवाले कर दिया था। पुलिस की छानबीन में होटल के कमरे से सुसाइड नोट मिला। जिसमें युवक ने मौत की वजह लिखी थी।
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वाराणसी जिले के भेलूपुर थाना के पास स्थित एक होटल में दिल्ली के सराफा व्यवसायी की आत्महत्या चर्चा का विषय बन गया। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस की छानबीन में मिले सुसाइड नोट में युवक ने आत्महत्या की वजह लिखी थी। उसने आर्थिक तंगी और कर्ज से परेशान होने की बात सुसाइड नोट में लिखी थी।
मां को दी थी नींद की गोली
साहिल ने अपनी मां को हाई डोज नींद की गोली दी थी, जिसके कारण होटल पहुंचते ही मां गहरी नींद में सो गई। बेटे की मौत के बाद दोपहर तक मां दवा की डोज के चलते बेसुध थी। प्रेरणा मलिक बस यही कह रही थी कि पति की पांच साल पहले मौत हुई थी। उसके बाद बेटा पिता की दुकान चलाने लगा। इस दौरान वह बहुत ज्यादा कर्ज में पता नहीं कैसे फंस गया। प्रेरणा मलिक को छोटे बेटे के भविष्य की भी चिंता सता रही थी। बस वह एक ही बात कह रही थी कि बेटे ने धोखे में रखकर खौफनाक कदम उठा लिया।
खुदकुशी से पहले मंदिरों में किया था दर्शन
ये है पूरा मामला
दिल्ली के पहाड़गंज स्थित मुल्तानी दंगा निवासी साहिल मलिक (25) की करोलबाग में आभूषण की दुकान है। वह अपनी मां प्रेरणा मलिक के साथ सोमवार को काशी के लिए निकला। मंगलवार की रात एक बजे भेलूपुर स्थित एक होटल में पहुंचा। उसने होटल में गौरव वर्मा निवासी करोल बाग के नाम से कमरा नंबर 204 बुक कराया था।
रात में अपनी मां को खाने में या किसी तरह नींद की दवा दे दी। मां के सो जाने के बाद किसी समय रात में उनके दुपट्टे के सहारे पंखे की कुंडी में फंदे से लटक गया। उसी बेड पर मां सो रही थी। सुबह 6 बजे प्रेरणा मलिक की नींद खुली तो बेटे को फंदे से लटका देख चीख पड़ीं। किसी तरह नीचे रिसेप्शन पर पहुंची और वहीं बेसुध हो गई। कर्मियों ने देखा कि युवक फंदे पर लटका हुआ था।
होटल प्रबंधक की सूचना पर भेलूपुर प्रभारी निरीक्षक विजय शुक्ला पहुंचे और छानबीन की। इस बीच पुलिस ने करोलबाग पुलिस से संपर्क किया। इस बीच मालूम चला कि साहिल की करोल बाग में आभूषण की दुकान है। कई लोगों से करोड़ों रुपये कर्ज लिया है। कर्जदारों ने साहिल के खिलाफ थाने पर शिकायत भी दर्ज कराई है। कर्जदारों से परेशान होकर वह अपनी मां को चोरी छिपे लेकर दिल्ली से काशी पहुंचा। पिता हंस दत्त की पांच साल पहले मौत हो चुकी है। एक 14 साल का भाई है, जो दिल्ली में ही अपने एक रिश्तेदार के यहां रहता है।