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योगेंद्र यादव ने मनोज तिवारी को बताया सरकार और बीएचयू का दामाद, ये बताया कारण

Fri, 06 Oct 2017 02:12 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी Updated Fri, 06 Oct 2017 02:12 PM IST
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yogendra yadav says that manoj tiwari is DAMAD of BHU and government
बीएचयू गेट के बाहर योगेंद्र यादव - फोटो : अमर उजाला
बीएचयू कैंपस में छात्रा के साथ छेड़खानी, लाठीचार्ज, विद्यार्थियों पर मुकदमा दर्ज होने आदि घटनाओं के विरोध में गुरुवार को कुलसचिव से मिलने स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेंद्र यादव विश्वविद्यालय पहुंचे। शाम करीब तीन बजे वह जैसे ही लंका गेट पर पहुंचे पुलिस ने रोक लिया।
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लंका एसओ ने तत्काल गेट बंद करा दिया और सुरक्षा के लिहाज से वहां भारी संख्या में पुलिस, पीएसी जवानों को लगा दिया। इस पर योगेंद्र की पुलिस से नोंकझोंक भी हुई। करीब घंटे भर की जद्दोजहद के बाद योगेंद्र को बिना कुलसचिव से मिले ही वापस जाना पड़ा। 
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बीएचयू पहुंचे योगेंद्र यादव ने रोके जाने पर अधिकारियों से न जाने का प्रशासनिक कारण पूछा, जिस पर उन्हें बताया गया कि ऐसा डीएम का आदेश है। अपने को यूजीसी का पूर्व मेंबर बताते हुए अंदर जाने की बात कही लेकिन सफल नहीं हो पाए।  
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उन्होंने बताया कि यूजीसी के नियमानुसार विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं के अधिकार सहित अन्य नियमों का क्या-क्या पालन होना चाहिए, उसकी प्रति देने कुलसचिव को देने आया हूं। मुझे रोका जाना गलत है।

उन्होंने मीडिया से कहा कि इस बारे में कुलसचिव से बात हो गई थी, उन्होंने आने की बात कही थी। यह पूछे जाने पर कि विजयादशमी के दिन यहां दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष और सांसद मनोज तिवारी एलडी गेस्ट हाउस आए थे।

योगेंद्र ने कहा कि वह सरकारी दामाद हैं, मै नहीं हूं। दुर्भाग्यवश जो सरकार का दामाद होता है वह विश्वविद्यालय का भी दामाद होता है। सरकार और विश्वविद्यालय अलग नहीं है न। इसीलिए उन्हें नहीं रोका गया। 

'अच्छा लगा यह देखकर की बनारस में महिला पुलिस भी है'

yogendra yadav says that manoj tiwari is DAMAD of BHU and government
बीएचयू गेट के बाहर योगेंद्र यादव - फोटो : अमर उजाला
स्वराज संस्था के संस्थापक योगेंद्र यादव ने पुलिस- प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा- अच्छा लगा यह देख कर कि वाराणसी में महिला पुलिसकर्मी भी हैं। ये उस दिन कहां थीं जब मेल कांस्टेबल  गर्ल्स हास्टल में घुसकर छात्राओं पर लाठी चार्ज कर रहे थे।

मुझ निहत्थे को रोकने के लिए बीएचयू के बाहर इतनी बड़ी फौज। अगर यही फौज बीएचयू के अंदर मुस्तैद होती तो हमारी बेटियां और बहनें सुरक्षित होतीं। वो यौन हिंसा और छेड़खानी की शिकार नहीं होतीं। विश्वविद्यालय प्रशासन पर यूजीसी की नियमों का पालन न करने का आरोप भी लगाया।

छात्रों के अधिकार, शिकायतों के निस्तारण आदि को लेकर नियमों की अनदेखी की गई। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज तक घटना के बारे में विश्वविद्यालय ने कोई एक्शन रिपोर्ट नहीं प्रस्तुत किया।

पिछले पांच वर्षों में जितने भी छेड़खानी की शिकायतें हुईं उनमें किसी में भी एक्शन नहीं लिया गया। अगर कोई कार्रवाई होती तो बीएचयू में ऐसी घटना नहीं होती। 
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