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कोरोना को दूर रखने के लिए करो ना आसन
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वाराणसी। कोरोना वायरस से बचाने के लिए सरकार और चिकित्सकों द्वारा इम्युनिटी पावर बढ़ाने की सलाह दी जा रही है। इस संदर्भ में देखें तो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हमारे देश की प्राचीन चिकित्सा पद्धति काफी कारगर है। दरअसल, इसके लिए जरूरी योग, आसन और प्राणायाम जैसी व्यवस्थाएं हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं। जिसका जिक्र हमारे यहां आयुर्वेद में वर्णित है। वैसे तो हर उम्र के लोगों के लिए ही योग, आसन की क्रियाएं बताईं गईं हैं। लेकिन हम बात कर रहे हैं महिलाओं की।
महिला पतंजलि योगपीठ समिति की अध्यक्ष कुशला जायसवाल कहती हैं कि महिलाएं अपने परिवार का ध्यान रखने के चक्कर मे अपनी सेहत को अनदेखा कर देती है। ऐसे में महिलाओं को अपने दिनचर्या में कुछ ऐसे योगासन को स्थान देना चाहिए जो उन्हें स्टेमिना और ऊर्जा से भरपूर रखें।
उष्ट्रासन- सबसे पहले घुटनों के बल बैठें। पीछे झुकते हुए दाएं हाथ से दाएं पैर की एड़ी को पकड़े और बाएं हाथ से बाएं पैर की एड़ी को पकड़े। अब अपने सिर को पीछे झुकाएं और पेट आगे की तरफ कमर और सिर के पीछे की ओर रखें। इसी अवस्था मे 15 सेकंड तक रहे।
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सावधानी- हृदय रोग, हर्निया से ग्रसित लोग इसे न करें। इस आसान को उच्च रक्तचाप व कमर दर्द में इसका अभ्यास न करें।
सूर्य नमस्कार - सूर्य नमस्कार 12 योगासनों को मिलाकर बनाया गया है। इसे करने वालों का कार्डियोवेस्कुलर स्वास्थ्य अच्छा रहता है। आसनों के दौरान सांस खींचना और छोड़ने से फेफड़े तक हवा पंहुचता है। इससे खून तक ऑक्सीजन पहुंचता है।
सावधानी- तीसरे माह के गर्भ के बाद से इसे न करें। हर्निया और उच्च रक्तचाप के मरीजों को सूर्य नमस्कार नहीं करें। मासिक धर्म के दौरान इसे न करें।
ताड़ आसान- सीधे खड़े हों और कमर व गर्दन को सीधा रखें। हाथ को सिर के ऊपर करें और सांस लेते हुए धीरे-धीरे पूरे शरीर को खींचे। इस अवस्था को कुछ समय के लिए बनाएं रखें और सांस ले और छोड़े। फिर सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे अपने हाथ एवं शरीर को पहली अवस्था में ले आएं।
सावधानी- घुटने में दर्द, गर्भवती महिलाएं, सर दर्द, रक्तचाप ज्यादा या कम हो तब भी आसान को करने से बचाना चाहिए।
त्रिकोण आसान- सीधे होकर दोनों पैरों के बीच तीन फीट की दूरी पर रखें। शरीर का भार दोनों पैरों पर बराबर रखें, गहरी सांस लें। अब दाएं हाथ को दाएं पैर के अंगूठे पर रखें और बाएं हाथ को आसमान की ओर सीधा उठाएं। सिर को भी आसमान की ओर उठाएं और आंखों को खोलकर ऊपर की ओर देखें।
सावधानी- माइग्रेन, डायरिया, उच्च रक्तचाप, गर्दन और पीठ के दर्द से पीड़ित हैं तो इस आसान को अभ्यास करने से बचें।
हलासन- पीठ के बल लेट जाएं और एड़ी व पंजे मिला लें। हथेलियों को जमीन पर रखकर कोहनी कमर से सटाएं। अब सांस छोड़ें और दोनों पैरों को एक दूसरे के साथ सटाए हुए ऊपर उठाएं। पहले 60 फिट 90 डिग्री के कोण तक धीरे धीरे आसमान की ओर उठाएं। फिर हथेलियों से सहारे पैरों को सिर की ओर झुकाएं और पैरों के पंजों को जमीन पर टिकाने की कोशिश करें। अब दोनों हाथ जमीन पर रख दीजिए। ये आसान दमा, कफ में फायदेमंद होने के साथ इम्युनिटी भी बढ़ाता है।
सावधानी- उच्च रक्तचाप, कमर दर्द, गर्दन दर्द, गर्भवती महिलाएं और मासिक धर्म में यह आसन न करें।
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महिला पतंजलि योगपीठ समिति की अध्यक्ष कुशला जायसवाल कहती हैं कि महिलाएं अपने परिवार का ध्यान रखने के चक्कर मे अपनी सेहत को अनदेखा कर देती है। ऐसे में महिलाओं को अपने दिनचर्या में कुछ ऐसे योगासन को स्थान देना चाहिए जो उन्हें स्टेमिना और ऊर्जा से भरपूर रखें।
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उष्ट्रासन- सबसे पहले घुटनों के बल बैठें। पीछे झुकते हुए दाएं हाथ से दाएं पैर की एड़ी को पकड़े और बाएं हाथ से बाएं पैर की एड़ी को पकड़े। अब अपने सिर को पीछे झुकाएं और पेट आगे की तरफ कमर और सिर के पीछे की ओर रखें। इसी अवस्था मे 15 सेकंड तक रहे।
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सावधानी- हृदय रोग, हर्निया से ग्रसित लोग इसे न करें। इस आसान को उच्च रक्तचाप व कमर दर्द में इसका अभ्यास न करें।
सूर्य नमस्कार - सूर्य नमस्कार 12 योगासनों को मिलाकर बनाया गया है। इसे करने वालों का कार्डियोवेस्कुलर स्वास्थ्य अच्छा रहता है। आसनों के दौरान सांस खींचना और छोड़ने से फेफड़े तक हवा पंहुचता है। इससे खून तक ऑक्सीजन पहुंचता है।
सावधानी- तीसरे माह के गर्भ के बाद से इसे न करें। हर्निया और उच्च रक्तचाप के मरीजों को सूर्य नमस्कार नहीं करें। मासिक धर्म के दौरान इसे न करें।
ताड़ आसान- सीधे खड़े हों और कमर व गर्दन को सीधा रखें। हाथ को सिर के ऊपर करें और सांस लेते हुए धीरे-धीरे पूरे शरीर को खींचे। इस अवस्था को कुछ समय के लिए बनाएं रखें और सांस ले और छोड़े। फिर सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे अपने हाथ एवं शरीर को पहली अवस्था में ले आएं।
सावधानी- घुटने में दर्द, गर्भवती महिलाएं, सर दर्द, रक्तचाप ज्यादा या कम हो तब भी आसान को करने से बचाना चाहिए।
त्रिकोण आसान- सीधे होकर दोनों पैरों के बीच तीन फीट की दूरी पर रखें। शरीर का भार दोनों पैरों पर बराबर रखें, गहरी सांस लें। अब दाएं हाथ को दाएं पैर के अंगूठे पर रखें और बाएं हाथ को आसमान की ओर सीधा उठाएं। सिर को भी आसमान की ओर उठाएं और आंखों को खोलकर ऊपर की ओर देखें।
सावधानी- माइग्रेन, डायरिया, उच्च रक्तचाप, गर्दन और पीठ के दर्द से पीड़ित हैं तो इस आसान को अभ्यास करने से बचें।
हलासन- पीठ के बल लेट जाएं और एड़ी व पंजे मिला लें। हथेलियों को जमीन पर रखकर कोहनी कमर से सटाएं। अब सांस छोड़ें और दोनों पैरों को एक दूसरे के साथ सटाए हुए ऊपर उठाएं। पहले 60 फिट 90 डिग्री के कोण तक धीरे धीरे आसमान की ओर उठाएं। फिर हथेलियों से सहारे पैरों को सिर की ओर झुकाएं और पैरों के पंजों को जमीन पर टिकाने की कोशिश करें। अब दोनों हाथ जमीन पर रख दीजिए। ये आसान दमा, कफ में फायदेमंद होने के साथ इम्युनिटी भी बढ़ाता है।
सावधानी- उच्च रक्तचाप, कमर दर्द, गर्दन दर्द, गर्भवती महिलाएं और मासिक धर्म में यह आसन न करें।