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Hyperbaric Oxygen Therapy: जल्द भर रहे घाव, खून में बढ़ रही है ऑक्सीजन की मात्रा; 30 मरीजों को दी गई थेरेपी

Mon, 29 Jul 2024 05:50 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Mon, 29 Jul 2024 05:50 PM IST
सार

Varanasi News: हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी से उन मरीजों को काफी फायदा होगा, जिनके घाव जल्दी नहीं भरते हैं। बीएचयू आईएमएस के ट्रॉमा सेंटर में बीते छह मई को इस थेरेपी की शुरुआत हुई थी। तीन महीने में 30 से ज्यादा मरीजों को 300 बार थेरेपी दी गई।

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Wounds healing quickly oxygen in blood is increasing with Hyperbaric Oxygen Therapy 300 patients treatment
आईएमएस बीएचयू का ट्रॉमा सेंटर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चोट लगने पर जो घाव है, उसका इलाज करने के बाद घावों को भरने में हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी ज्यादा कारगर साबित हो रही है। इससे जहां घाव जल्द भर जा रहा है, वहीं इस थेरेपी से खून में ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ जाती है।

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आईएमएस बीएचयू के ट्रॉमा सेंटर में छह मई से शुरू इस थेरेपी में अब तक तीन महीने में 30 से ज्यादा मरीजों को 300 बार थेरेपी दी गई। यह देश का पहला ऐसा ट्रॉमा सेंटर हैं, जहां इस तरह की सुविधा मरीजों को मिल रही है।
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बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में वाराणसी, गाजीपुर, मऊ, मिर्जापुर, गोरखपुर सहित आसपास के जिलों और बिहार से हर दिन ओपीडी और इमरजेंसी को मिलाकर 300 से अधिक मरीज आते हैं। 
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इसमें सड़क दुघर्टना सहित अन्य घटनाओं में चोट लगने के बाद प्राथमिक उपचार के बाद संक्रमण न हो, घाव जल्दी भर जाए, इसके लिए हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी ज्यादा लाभकारी हो रही है। 

ट्रॉमा सेंटर के प्रोफेसर इंचार्ज प्रो. सौरभ सिंह का कहना है कि हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी से इलाज की जाने वाली विभिन्न स्थितियों में गंभीर संक्रमण, वायु एम्बोलिज्म, घाव, जो मधुमेह या विकिरण चोट के कारण ठीक नहीं हो सकते हैं, उनमें राहत मिलती है। 

मानव शरीर में ऊतकों को कार्य करने के लिए ऑक्सीजन की पर्याप्त आपूर्ति की आवश्यकता होती है। जब ऊतक घायल हो जाता है, तो उसे जीवित रहने के लिए और भी अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी से रक्त में इसी ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है।

दो से तीन गुना बढ़ जाता है हवा का दबाव
प्रोफेसर सौरभ सिंह का कहना है कि हाइपरबेरिक ऑक्सीजन थेरेपी कक्ष में हवा का दबाव सामान्य वायु दबाव से 2 से 3 गुना अधिक बढ़ जाता है। इन परिस्थितियों में फेफड़े सामान्य वायु दबाव में शुद्ध ऑक्सीजन लेने की तुलना में कहीं अधिक ऑक्सीजन लेते हैं। थेरेपी का उपयोग कई तरह के इलाज में होता है। 

इसमें ठीक न होने वाले घाव भी शामिल हैं। इसमें मधुमेह संबंधी पैर का अल्सर, गंभीर एनीमिया, मस्तिष्क में फोड़ा, जलन, कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता, कुचलने वाली चोट, अचानक बहरापन, डिकंप्रेशन बीमारी, गैंग्रीन, त्वचा या हड्डी का संक्रमण जो ऊतक मृत्यु का कारण बन सकते हैं। यह थेरेपी जीवन और अंग बचाने के उपाय के रूप में और जरूरतमंद रोगियों के लिए गेमचेंजर मशीन के रूप में काम करती है।

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