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ये है दुनिया की सबसे छोटी भगवद् गीता, पढ़ने के लिए होगी सूक्ष्मदर्शी लैंस की जरूरत

Sat, 19 Oct 2019 02:31 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बलिया Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Sat, 19 Oct 2019 02:31 PM IST
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worlds small bhagvad gita book in ballia
भगवद् गीता। - फोटो : अमर उजाला

दुनिया की सबसे छोटी भगवद् गीता में से एक प्रति उत्तर प्रदेश के बलिया में है। जिले के सिंकदरपुर तहसील क्षेत्र के भरथाव गांव में रखी गीता की कुल लंबाई 2.5 सेमी और चौड़ाई 02 सेमी है। इसे रखने वाले का दावा है कि ये दुनिया की सबसे छोटी गीता है। यह गीता देश में मौजूद उन सभी गीता में शामिल है, जिसे वर्ष 1956 में भारतीय प्रेस मुंबई ने प्रकाशित किया था।

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उनका ये भी दावा है कि इसकी कुल 100 प्रतियां ही प्रकाशित की गई थीं, जिसमें से अब गिनीचुनी ही बची हैं। ये केवल उन्हीं लोगों के पास सुरक्षित हैं, जो इसका ख्याल अपनी जान से भी ज्यादा रखते हैं।
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भरथाव गांव के कृपाशंकर शुक्ला का परिवार कभी मिर्जापुर जिले के डाला में रहता था। वहां कृपाशंकर शुक्ला एक सीमेंट फैक्ट्री में इंजीनियर थे। उनके दूसरे पुत्र अनिल कुमार शुक्ला ने बताया कि यह किताब उनके पिता ने खरीदी थी। तभी से ये हमारे पास है। साथ ही बताया कि इस गीता की प्रतिदिन पूजा की जाती है। इसको एक सुरक्षित बक्से में रखा गया है। ताकि कीड़ों और सड़न से बचाया जा सके।

इसकी खासियत ये है कि इस प्रिंटेड गीता को बिना सूक्ष्मदर्शी लेंस के नहीं पढ़ा जा सकता। इसको देखने के बाद नहीं प्रतीत होता कि इसमें गीता के 18 अध्याय हो सकते हैं। इसकी लंबाई 2.5 सेमी व चौड़ाई 2 सेमी है। यह 164 पेज में लिखी गई है।

दो अतिरिक्त भगवद् गीता मुरादाबाद राजकीय पुस्तकालय और बीएचयू में भी रखी हैं :
भारतीय प्रेस मुंबई ने 1956 में यह छोटी भगवत गीता प्रकाशित की थी। इसकी केवल 100 ही प्रतियां प्रकाशित की गई थीं। इन्हें भारत के अलग-अलग पुस्तकालयों में रखा गया। इसके बाद कोई संस्करण प्रकाशित नहीं किया गया। अब इनकी गिनी चुनी प्रतियां ही बची हैं। इनमें से एक मुरादाबाद के राजकीय पुस्तकालय में है तो दूसरी काशी हिंदू विश्वविद्यालय में।

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