Varanasi: दुनिया देखेगी लखपति दीदी योजना वाली कुसुम की कहानी, महिलाओं के लिए रोल मॉडल पर बन रही डाॅक्यूमेंट्री
अपने हुनर और मेहनत की बदौलत लखपति महिला योजना में चयनित बनारस की बेटी कुसुम की कहानी अब दुनिया देखेगी। गरीबी से जंग लड़कर ग्रामीण महिलाओं के लिए रोल मॉडल बनीं कुसुम के जीवन पर आधारित डाक्यूमेंट्री बनाई जा रही है।
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अपने हुनर और मेहनत की बदौलत लखपति महिला योजना में चयनित बनारस की बेटी कुसुम की कहानी अब दुनिया देखेगी। गरीबी से जंग लड़कर ग्रामीण महिलाओं के लिए रोल मॉडल बनीं कुसुम के जीवन पर आधारित डाक्यूमेंट्री बनाई जा रही है। कुसुम के घर पर नई दिल्ली से आई पांच सदस्यीय टीम ने निर्देशक स्मिता के नेतृत्व में शॉर्ट फिल्म को शूट किया। बृहस्पतिवार को शूटिंग पूरी की गई।
इस दौरान कुसुम के घर का माहौल मुंबई की फिल्मसिटी जैसा रहा। कुसुम ने बताया कि पहले दिन कैमरे के सामने बोलने में झिझक रही थी, लेकिन बाद में सब सही हो गया। सात हजार लोन लेकर व्यवसाय शुरू किया था। अब हर महीने 15 हजार से ज्यादा कमा रही हूं।
2018 के पहले घर की आर्थिक स्थिति थी बहुत खराब
कुसुम ने बताया कि 2018 के पहले उसके घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी। पति मिथिलेश मजदूरी करता था और किसी तरह घर का खर्च चलता था। वर्ष 2018 में पहली बार उसके गांव पहाड़िया में स्वयं सहायता समूह का गठन हुआ। समूह में वह भी सदस्य बनी। पहली बार बकरी पालन के लिए समूह से सात हजार रुपये का लोन लिया।
लोन चुकाने के कुछ समय बाद उसने 50 हजार रुपये लोन लेकर परचून की दुकान खोली। कुछ दिन तक दुकान चलाने और लोन भरने के बाद फिर से एक लाख रुपये का लोन लेकर दुकान को बड़ स्तर पर शुरू किया। फिर तीन लाख रुपये का लोन लेकर पति को ऑटो खरीद कर दिया।
कुसुम जय मां दुर्गा स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं। अब कुसुम और उसके पति मिलकर महीने में 15 हजार से ज्यादा कमाते हैं। कुसुम के तीनों बच्चे हिमांशु (10), दिव्यांशु (8) और सुधांशु (5) एक कान्वेंट स्कूल में पढ़ते हैं। मौजूदा समय में कुसुम गांव की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए जागरूक कर रही हैं साथ ही उन्हें आर्थिक सहयोग भी करती हैं।
अन्य प्रदेश की महिलाओं को दिखाई जाएगी फिल्म
चिरईगांव विकास खंड के पहाड़िया निवासी कुसुम के जीवन पर बनाई जा रही डाक्यूमेंट्री बनारस के साथ-साथ अन्य प्रदेश की महिलाओं को दिखाई जाएगी। जिले के प्रभारी उपायुक्त एनआरएलएम व डीडीओ अशोक कुमार ने बताया कि डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए नई दिल्ली से टीम आई थी। पूरे देश से ऐसी महिलाओं का चयन कर डाक्यूमेंट्री बनाई जा रही है जो खुद तो सशक्त हैं और दूसरों को भी बनाने में मदद कर रही हैं।