फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   World Thalassemia Day Out of 500 Affected Children 20 Negative Blood Group in varanasi

थैलेसीमिया: पीड़ित 500 बच्चों में 20 का ब्लड ग्रुप निगेटिव, इलाज में खून का संकट; इस ग्रुप की सबसे ज्यादा खपत

Fri, 08 May 2026 02:48 PM IST
Pragati Chand अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: Pragati Chand Updated Fri, 08 May 2026 02:48 PM IST
सार

Varanasi News: वाराणसी जिले में बीएचयू अस्पताल, मंडलीय अस्पताल सहित अन्य ब्लड बैंकों को मिलाकर हर महीने करीब 500 बच्चों को खून की जरूरत होती है। सबसे ज्यादा खपत पॉजिटिव ग्रुप की है। 

विज्ञापन
World Thalassemia Day Out of 500 Affected Children 20 Negative Blood Group in varanasi
थैलेसीमिया - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का जीवन चलता रहे, इसके लिए उन्हें नियमित ब्लड चढ़ाना पड़ता है। जिले में बीएचयू अस्पताल, मंडलीय अस्पताल, आईएमए ब्लड बैंक सहित अन्य ब्लड बैंकों को मिलाकर हर महीने करीब 500 बच्चों को खून की जरूरत होती है। इसमें पॉजिटिव ग्रुप तो किसी तरह मिल जाता है लेकिन निगेटिव ब्लडग्रुप का संकट खड़ा हो गया है। इस समय करीब 20 ऐसे बच्चे हैं, जिनका ब्लड ग्रुप ए, बी निगेटिव हैं। एक तो निगेटिव ग्रुप बहुत रेयर होता है, दूसरा गर्मी में रक्तदान भी बहुत कम होता है। ऐसे में निगेटिव ग्रुप को मेंटेन रखना एक बड़ी चुनौती बनी है।

विज्ञापन


थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के इलाज के प्रति जागरूकता को लेकर हर साल 8 मई को थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है। बीएचयू बाल रोग विभाग की प्रो. विनीता गुप्ता ने बताया कि बीएचयू अस्पताल के ब्लड बैंक में वाराणसी के साथ ही आसपास के जिले, बिहार आदि जगहों से करीब 350 बच्चे पंजीकृत हैं। 
विज्ञापन


बाल रोग विभाग में चलने वाली थैलेसीमिया यूनिट में समय-समय पर बच्चों को उनके अभिभावक इलाज के लिए लेकर आते हैं। इसके अलावा मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा, दीनदयाल उपाध्याय जिला अस्पताल, आईएमए ब्लड बैंक को मिलाकर भी 200 बच्चे पंजीकृत हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

थैलेसीमिया ग्रसित कुल 500 बच्चों में करीब 150 से अधिक ऐसे बच्चे हैं, जिनको बेहतर जीवन जीने के लिए हर सप्ताह खून बदलना पड़ता है। 200 बच्चों को 15 दिन में जबकि अन्य बच्चों को जरूरत के हिसाब से महीने में एक बार खून बदला जाता है। आईएमए के सचिव डॉ. एके त्रिपाठी का कहना है कि ब्लड बैंक से नियमानुसार इससे पीड़ित बच्चों को बिना डोनेशन और बिना फीस के(बिना रक्तदान करवाए और बिना किसी फीस के) खून दिया जाता है।
 
बच्चों के लिए रिजर्व रखना पड़ता है स्टॉक
मंडलीय अस्पताल कबीरचौरा ब्लड बैंक में तैनात जितेंद्र पटेल का कहना है कि औसतन करीब 40 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को खून दिया जाता है। इसमें पॉजिटिव तो किसी तरह मिल जाता है लेकिन प्राय: निगेटिव ग्रुप को लेकर समस्या आती रहती है। इन बच्चों का इलाज न रूके, इसलिए इनके लिए स्टॉक रिजर्व रखना पड़ता है।
 

थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के इलाज के लिए ब्लड बैंक में अलग-अलग ग्रुपों का ब्लड होना जरूरी होता है। यह तभी होगा जब लोग स्वैच्छिक रक्तदान के लिए कदम आगे बढ़ाएंगे। विशेषकर निगेटिव ग्रुप वालों को इसके लिए आगे आना चाहिए, जिससे कि बच्चों का बेहतर इलाज होता रहे। -प्रो.एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस बीएचयू

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed