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World Orthodontic Day: टेढ़ेमेढ़े दांतों से परेशान हैं बनारस समेत पांच जिलों के 49 फीसदी बच्चे, बीएचयू में इलाज की सुविधा

Sun, 15 May 2022 02:49 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sun, 15 May 2022 02:49 PM IST
सार

टेढ़ेमेढ़े दांतों से परेशान हैं पांच जिलों के 49 फीसदी बच्चे। इस बीमारी का इलाज बच्चो में वैसे तो किसी भी उम्र में किया जा सकता है लेकिन सात साल से 18 साल तक का समय सबसे अच्छा होता है। 

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World Orthodontic Day 49 percent children of five districts including varanasi are troubled by damaged teeth
दांत - फोटो : getty images

विस्तार

 टेढे़मेढ़े दांत, जबड़े और चेहरे के परेशानियों के शिकार बच्चे अक्सर किसी दूसरे लोगों से मिलने से हिचकिचाते हैं। ऐसे बच्चों को अब परेशान होने की जरूरत नहीं है। बीएचयू दंत चिकित्सा संकाय की ऑर्थोडॉन्टिक्स शाखा में टेढे़मेढ़े अनियमित दांत, जबड़े और चेहरा को ठीक करने की भी सुविधा है।

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वाराणसी समेत पांच जिलों में 49 प्रतिशत बच्चे टेढ़ेमेढ़े दांतों से परेशान हैं। पूर्व संकाय प्रमुख प्रो. टीपी चतुर्वेदी के अनुसार ऐसे बच्चों का इलाज करने के साथ ही समय-समय पर इससे बचाव के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। टेढ़े मेढ़े दांत, अनियमित दांत आदि से होने वाली समस्याओं के समाधान और जागरूकता के उद्देश्य से हर साल 15 मई को वर्ल्ड ऑर्थोडॉन्टिक डे मनाया जाता है।
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स्थानीय स्तर पर बनारस ऑर्थोडॉन्टिक स्टडी ग्रुप इस साल भी इसके लिए जागरूकता संबंधी कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। प्रो. टीपी चतुर्वेदी ने बताया कि 2016 से 2018 तक एक वाराणसी, जौनपुर, मिर्जापुर, चंदौली और गाजीपुर जिले में 12 से 16 साल के कुल 1876 बच्चों (इसमें 920 बच्चियां भी शामिल) पर अध्ययन किया गया।

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49 प्रतिशत बच्चों में इस तरह की समस्या

इसमें यह पाया गया कि करीब 49 प्रतिशत बच्चों में इस तरह की समस्या है। प्रो. चतुर्वेदी ने बताया कि टेढे़ मेढ़े, अनियमित दांत व जबड़े का मुख्य कारण अनुवांशिकी होता है। इसके साथ ही मुंह के श्वास लेने, अगूंठा चूसने, कुपोषण, जीभ के बनावट, गलत ढंग से भोजन करना भी इसकी वजह है।

इस बीमारी का इलाज बच्चो में वैसे तो किसी भी उम्र में किया जा सकता है लेकिन सात साल से 18 साल तक का समय सबसे अच्छा होता है। इसके लिए दांत पर विशेष तौर पर अप्लायंस या ब्रेसेस लगाकर इलाज किया जाता है। इसके लिए समय 6 महीने से 3 साल तक लग सकता है। गांवों में रहने वाले बच्चों की तुलना में शहर में रहने वाले बच्चों में यह समस्या अधिक होती है।

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