विश्व साक्षरता दिवस : सर्व विद्या की राजधानी में साढ़े 12 लाख निरक्षर, पुरुषों के मुकाबले महिलाएं पीछे
वाराणसी में पुरुषों की साक्षरता दर 83 फीसदी पार है, लेकिन आधी आबादी की साक्षरता दर 66 से आगे नहीं बढ़ पा रही है। बेटियों की शिक्षा के लिए काम करने वाली संस्थाओं की माने तो अभी भी शिक्षा को लेकर परिवार की जिम्मेदारी, समाज व परिस्थिति आड़े आती हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
आज विश्व साक्षरता दिवस है, लेकिन सर्व विद्या की राजधानी काशी में तमाम प्रयासों के बाद भी साढ़े 12 लाख लोग निरक्षर हैं। ये स्थिति तब है जब केंद्र व राज्य सरकार की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो आधी आबादी पढ़ाई में पुरुषों से पीछे है। ये स्थिति तब है जब सरकार ने आधी आबादी को पढ़ाने में पूरा जोर लगा रखा है।
पुरुषों की साक्षरता दर 83 फीसदी पार है, लेकिन आधी आबादी की साक्षरता दर 66 से आगे नहीं बढ़ पा रही है। बेटियों की शिक्षा के लिए काम करने वाली संस्थाओं की माने तो अभी भी शिक्षा को लेकर परिवार की जिम्मेदारी, समाज व परिस्थिति आड़े आती हैं। महिलाओं को साक्षर बनाने के लिए प्रयासों के साथ ही जमीनी स्तर पर कार्य करने की जरूरत है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक अभी तक जिले में 12,72,938 लोग निरक्षर है।
निरक्षरता का कलंक मिटाने के लिए सरकार ने लाख प्रयास किए, लेकिन और प्रयास की जरूरत है। जबकि सरकार द्वारा कई योजनाएं संचालित की गईं। गांव-गांव में लोगों को साक्षर बनाने के लिए प्रेरित किया जाना था। सर्व शिक्षा अभियान भी इसी का एक हिस्सा है। इन अभियानों पर लाखों रुपये खर्च भी किए गए, लेकिन साक्षरता दर बहुत धीमी है। जिले में 24,03,903 साक्षर हैं।
कोशिशों से बनाई राह, जलाया शिक्षा का दीपक
नेक काम के लिए इच्छा शक्ति हो तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है। रोली रघुवंशी समाज में एक मिसाल पेश कर रही हैं। घर की जिम्मेदारियों को पूरा करने के साथ ही वह साक्षरता की अलख जगा रही हैं। हर शाम रविदास घाट का नजारा कुछ और ही होता है। घाट की सीढ़ियों पर गरीब, शोषित, वंचित लोगों के बच्चों को शिक्षित किया जाता है।
रोली पिछले दो साल से अपनी संस्था की मदद से बच्चों को निशुल्क शिक्षा देती हैं। वर्तमान में 60 से ज्यादा बच्चे घाटों पर भविष्य संवारने में जुटे हुए हैं। रोली बताती हैं कि शुरुआत में तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। हालांकि समय बदलता गया और लोग जुड़ते गए।
घाट पर सजने वाली इस कक्षा में प्रतिदिन एलकेजी से लेकर 10वीं तक के बच्चों को शिक्षित किया जाता है। बच्चों को पढ़ाई के साथ कराते व अन्य खेलों की भी ट्रेनिंग दी जाती है। रोली के प्रयासों से प्रभावित होकर तत्कालीन अपर पुलिस आयुक्त सुभाष दुबे ने भी काफी मदद की थी।
एक नजर में आंकड़े
- पुरुष : 19,21,857
- महिला : 17,54,984
- पुरुष : 5,35,741
- महिला : 7,40,197
कुल साक्षर - 24,03, 903
- साक्षर पुरुष - 13,89,116
- साक्षर महिला - 10,14,787
कुल साक्षरता ( फीसदी) : 75.60
- पुरुषों - 83.78 फीसदी
- महिला - 66.69 फीसदी