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विश्व धरोहर दिवस: ये हैं काशी की तीन धरोहरें... साड़ी, मंदिर, सारनाथ; यूनेस्को की लिस्ट में है इसका नाम

Thu, 18 Apr 2024 05:41 PM IST
अमन विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Thu, 18 Apr 2024 05:41 PM IST
सार

World Heritage Day: काशी में कई स्थानों के साथ यहां की कुछ चुनिंदा चीजें धरोहरों में शुमार हैं। इनकों देखने के लिए देसी-विदेशी पर्यटक भी आते रहते हैं। 

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World Heritage Day temple of Kashi, Saree and Sarnath
विश्व धरोहर दिवस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्व की प्राचीनतम नगरी काशी धरोहरों को समेटे हुए हैं। चाहे बात बनारसी साड़ियों की हो, मंदिरों की हो या पर्यटन स्थल की। विदेशी पर्यटक भी बनारसी साड़ियां पसंद करते हैं।

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2014 से यूनेस्को ने भारत के प्रतिष्ठित साड़ी बुनाई समूहों को विश्व धरोहर की अस्थायी सूची में शामिल किया है। इसमें बनारस को प्रतिष्ठित ब्रोकेड साड़ी का घर बताया गया। आम लोगों के साथ ही सेलिब्रिटी भी बनारसी साड़ी पहनना पसंद कर रहे हैं। 
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मदनपुरा क्षेत्र में स्थित बनारसी साड़ियों के 48 साल पुराने निर्माता व थोक विक्रेता मोहम्मद इब्राहम ने बताया की बनारसी साड़ियों में रेशम एवं जरी के धागों का प्रयोग किया जाता है। ताने में कतान और बाने में पाट बाना साड़ियों की बिनकारी की जाती है। तेलंगाना,आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल में सबसे ज्यादा बनारसी साड़ियों का निर्यात होता है।
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3000 साल से भी पुराना कर्दमेश्वर महादेव मंदिर
पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग पर स्थित कर्दमेश्वर महादेव मंदिर तीन हजार साल से ज्यादा पुराना है। कर्दम ऋषि ने यहां शिवलिंग स्थापित किया था। उनके नाम पर ही शिवलिंग का नाम कर्दमेश्वर महादेव पड़ा। बाद में मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में गहड़वाल वंश के राजाओं ने कराया।

पत्थर की सतह पर है नाजुक पुष्प नक्काशी 
सारनाथ में गौतम बुद्ध ने पहले पांच शिष्यों को पहला उपदेश दिया था। यहां निर्मित धमेख स्तूप की नींव सम्राट अशोक के समय में रखी गई। गुप्तकाल में यह पूरी तरह तैयार हुआ। स्तूप सारनाथ की सबसे विशाल संरचना है। यहां पत्थर की सतह पर गुप्त युग की नाजुक पुष्प नक्काशी प्रदर्शित होती है।

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