विश्व एड्स दिवस: बीएचयू और दीनदयाल अस्पताल में 45 साल से कम उम्र के एड्स रोगी दवा लेने पहुंच रहे
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एड्स की रोकथाम के लिए सरकार के प्रचार-प्रसार सहित जागरूकता कार्यक्रमों का असर अब दिखने लगा है। ऐसे लोग जो पहले अपनी पहचान छिपाते थे, अब एआरटी सेंटर तक इलाज के लिए जाने लगे हैं। इस समय बीएचयू एआरटी सेंटर से 5500 और दीनदयाल अस्पताल स्थित सेंटर पर 4400 मरीज दवा ले जा रहे हैं। इन मरीजों में सबसे अधिक संख्या 20 से 45 साल वालों की है। सेंटर पर पंजीकृत मरीजों की सूची में महिलाओं की तुलना में पुरुष अधिक हैं।
पहले जहां कुछ ही जगहों पर एआरटी सेंटर होते थे वहीं अब प्रदेश के अधिकांश जिलों में एआरटी सेंटर खुल जाने से अधिक से अधिक मरीज जांच और फिर आवश्यकतानुसार इलाज भी करा रहे हैं। नेशनल एडस कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको) के निर्देशन में चल रहे एआरटी सेंटर पर काउंसलिंग, इलाज, नि:शुल्क जांच, दवा आदि की सुविधाएं हैं।
बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल स्थित सेंटर पर हर दिन पूर्वांचल के विभिन्न जिलों के अलावा, बिहार, मध्यप्रदेश, झारखंड आदि जगहों से मरीज आते हैं। जानकारी के मुताबिक 2005 से चल रहे बीएचयू के सेंटर में 24 हजार मरीजों का पंजीकरण हो चुका है। इस समय 5,500 मरीजों का इलाज चल रहा है।
दस महीने में 600 एचआईवी पॉजीटिव
सर सुंदरलाल अस्पताल और दीनदयाल अस्पताल के एआरटी सेंटर में इलाज कराने वालों में जनवरी से अक्तूबर तक दस महीने तक जांच कराने वाले 600 एचआईवी पॉजीटिव मिले हैं। जिला एचआईवी एडस और क्षय रोग अधिकारी डॉ. राकेश कुमार सिंह के मुताबिक 2017 में 1095 और 2018 में 1093 एड्स रोगी मिले। इस साल अक्तूबर तक दोनों सेंटर की जांच में 600 में एचआईवी पॉजीटिव की रिपोर्ट आई है।
इलाज के साथ मिलती हैं योजनाओं की जानकारी
एड्स रोगियों की जांच, इलाज, दवा के लिए खुले एआरटी सेंटरों पर इलाज के साथ ही मरीजों को सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जाती है। बीएचयू सर सुंदरलाल अस्पताल स्थित सेंटर पर आने वाले मरीजों को आयुष्मान भारत योजना, रेलवे की ओर से यात्रा के लिए रियायती दर का पास दिए जाने नि:शुल्क ब्लड लेने, जांच आदि की जानकारी दी जाती है।
एक नजर में आंकड़ा
2019 (अक्तूबर तक) 600
2018 1093
2017 1095
एआरटी सेंटर पर एड्स रोगियों की जांच, इलाज की पूरी सुविधाएं हैं। दीनदयाल अस्पताल और बीएचयू अस्पताल में चलने वाले सेंटर के साथ ही सरकारी अस्पतालों में भी एचआईवी जांच की सुविधा है। -डॉ. वीबी सिंह, सीएमओ
एड्स के कारण
एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ असुरक्षित यौन संबंध बनाने और संक्रमित ब्लड चढ़ाने, संक्रमित सुई लगाने से एड्स होने की संभावना अधिक रहती है। इसके अलावा यदि कोई महिला एचआईवी संक्रमित है तो होने वाला बच्चा भी संक्रमित हो जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है, जिसके शुरुआती दिनों में किसी प्रकार के लक्षण सामने नहीं आते। बल्कि कुछ सालों के बाद इस बीमारी के लक्षण उभर के आते हैं, जिसे व्यक्ति समझ नहीं पाता।
एड्स के लक्षण
बुखार आना, शाम के समय पसीना आना, ठंड लगना, थकान महसूस होना, उल्टी आना, गले में खराश रहना, दस्त होना, खांसी होना, सांस लेने में समस्या होना, मांसपेशियों में दर्द होना, शरीर पर चकते पड़ना आदि।
एड्स से बचाव
एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ सुरक्षित शारीरिक संबंध बनाएं। खून को चढ़ाने से पहले जांच लें। उपयोग की हुई सुइयों और टीके का दोबारा न उपयोग करें। अगर मां एचआईवी संक्रमित हो तो संस्थागत प्रसव कराएं।