गजब: बच्चा चाहिए स्वस्थ..., इसीलिए अंडाणु सुरक्षित करा रहीं महिलाएं; जानें- क्या और कैसे होता है एग फ्रीज
Varanasi News: अंडाणु सुरक्षित रखवाकर महिलाएं अपना कॅरिअर बना रही हैं। चिकित्सकों की मानें तो एग फ्रीज की प्रक्रिया का इस्तेमाल करके कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी बचा जा सकता है। वाराणसी में कई लड़कियों ने एग फ्रीज का इस्तेमाल किया है। कॅरिअर बनाने के बीच बढ़ रही उम्र के कारण भी इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
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शहर की कई युवतियों की नौकरी ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, लंदन में लगी है। अभी कॅरिअर में खुद को साबित भी करना है और स्थापित भी करना है। ऐसे में वह शादी को कुछ साल तक टालना चाहतीं हैं।
इसी के चलते वह डॉक्टरों की सलाह पर बंगलूरू, मुंबई, चंडीगढ़ में अंडाणु सुरक्षित करा रही हैं, ताकि अभी नौकरी को तवज्जो दें और जब वह चाहे या जब मनचाहा वर मिले तो शादी करें तो मां बनने में दिक्कत न हो। पिछले दो साल में इसका चलन तेजी से बढ़ा है।
करीब पांच साल पहले तक शहर के डॉक्टरों के पास ऐसे मामले नहीं आते थे। मगर, पिछले दो साल में इसका चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। कई बड़ी महिला चिकित्सकों के पास युवतियां और महिलाएं अंडाणु सुरक्षित करने के संबंध में जानकारी लेने पहुंच रहीं हैं। इसकी पूरी प्रक्रिया जान रहीं हैं और डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें सुरक्षित करा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण फिलहाल नौकरी को प्राथमिकता देना ही सामने आया है।
कॅरिअर से नहीं होना चाहिए खिलवाड़
साकेत नगर की एक युवती की अमेरिका की एक इंटरनेशनल कंपनी में नौकरी लग गई। बकौल युवती बड़ा मौका आया तो वह उसे छोड़ना नहीं चाह रही थीं क्योंकि यह उसके कॅरिअर का टर्निंग प्वाइंट था।
इधर, मनचाहा लड़का भी शादी का नहीं मिल रहा था तो उसने बनारस की एक डॉक्टर की सलाह पर चंडीगढ़ में जाकर अंडाणु सुरक्षित कराए और अमेरिका में नौकरी करने चली गई। इसी तरह रविंद्रपुरी की एक युवती की शादी हो गई। उम्र भी 36 पार कर चुकी है और अभी दो-तीन साल बच्चा नहीं चाहती हैं तो अंडाणु सुरक्षित कराकर नौकरी कर रहीं हैं।
गुरुधाम क्षेत्र की एक महिला की शादी को दो साल हो गए हैं मगर उन्हें एक गंभीर बीमारी है। उनकी दवा का असर भी अंडाणु की गुणवत्ता पर हो रहा है और अभी दवाएं करीब तीन साल और चलेगी ऐसे में उन्होंने अंडाणु सुरक्षित करा दिए हैं। ताकि बीमारी ठीक होने के बाद जब वह बच्चा करना चाहे तो कोई दिक्कत न हो।
40 की उम्र के बाद गुणवत्ता पर पड़ता असर
अंडाणु सुरक्षित रखवाना कैंसर के मरीजों के लिए भी उपयोगी है। कीमोथेरेपी के बाद अंडाणु की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। विशेषज्ञों की माने तो 38-40 वर्ष की उम्र के बाद अंडाणु बनना कम हो जाता या फिर उनकी गुणवत्ता पर असर होने लगता है। शादी में देरी हो रही है या फिर किसी गंभीर बीमारी से परेशान हैं तो अंडाणु सुरक्षित कराना ठीक रहता है।
एग फ्रीज के लिए ओओसाइट क्रायोप्रिजर्वेशन टर्म का भी इस्तेमाल किया जाता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है। जिसकी मदद से महिलाओं के ओवरी से मैच्योर अंडों बाहर निकालकर लैब में जीरो तापमान पर फ्रीज कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया से महिलाओं को बाद में इस्तेमाल के लिए अंडे को संरक्षित करने में सक्षम बनाती है।
इनकी भी सुनें
पहले यह संख्या न के बराबर थी। अब इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं। नौकरी को प्राथमिकता देने में युवतियां अंडाणु सुरक्षित करा रही हैं। कुछ मामलों में ऐसा भी है कि कॅरिअर अच्छा चल रहा है मगर किन्हीं कारणवश अच्छा लड़का नहीं मिल रहा है। मैंने ऐसी युवतियों को मुंबई, बंगलूरू जैसे शहर में एग फ्रीज कराने की सलाह दी। - डॉ. शालिनी टंडन, स्त्री रोग विशेषज्ञ