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बैग लेकर भाग रहे उचक्के को पकड़ने के लिए चलती ट्रेन से कूदी महिला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गाजीपुर
Updated Thu, 31 May 2018 02:07 PM IST
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घायल महिला
- फोटो : अमर उजाला
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यूपी के गाजीपुर में एक महिला उचक्के से अपना बैग बचाने के लिए चलती ट्रेन से कूद गई। जिससे गंभीर रूप से घायल हो गई। जबकि उचक्का महिला का बैग लेकर फरार हो गया। महिला को उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया।
बिहार आरा के करनामीपुर निवासी संतोष मिश्रा का परिवार हावड़ा में रहता है। संतोष अपनी पत्नी सारिका मिश्रा (34) और बेटा हर्ष मिश्रा (10) के साथ उपासना एक्सप्रेस ट्रेन से हावड़ा जा रहा था।
रात में करीब 3 बजे जमानिया कोतवाली क्षेत्र के दरौली रेलवे स्टेशन पर पहुंचने पर ट्रेन की रफ्तार कुछ धीमी हो गई। इसी बीच पहले से सारिका के बैग पर नजर गड़ाए उचक्का सीट पर जेवरात, पैसा रखे बैग लेकर भागने लगा।
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यह देख सारिका शोर मचाते हुए उचक्के के पीछे दौड़ पड़ी। जब उचक्के को ऐसा लगा कि सारिका के शोर से अन्य यात्री जाग जाएंगे और वह पकड़ा जाएगा तो चलती ट्रेन से कूद गया। सारिका भी उचक्के को पकड़ने के लिए ट्रेन से कूद पड़ी।
गिरने की वजह से उसके सिर में गंभीर चोट आ गई। बावजूद इसके वह उठकर लड़खड़ाते हुए रेलवे स्टेशन पर काम कर रहे कर्मचारियों के पास पहुंची और उचक्के को पकड़ने के लिए कहा, लेकिन तब तक उचक्का मौके से फरार हो चुका था।
कर्मचारियों ने स्टेशन मास्टर को सूचना देकर महिला के गंभीर रूप से घायल होने की बात बताई। इस पर स्टेशन मास्टर ने घायल महिला को सीएचसी पर भिजवाया। गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद महिला को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
उधर ट्रेन में सवार सारिका के पति संतोष ने जब बोगी में पत्नी को नहीं देखा तो लोगों से उसके संबंध में पूछा। लोगों ने बताया कि वह उचक्का को पकड़ने के लिए दरौली स्टेशन पर ट्रेन से नीचे कूद गई तो उसके होश उड़ गए। ट्रेन के मुगलसराय स्टेशन पर पहुंचने के बाद दूसरी ट्रेन से संतोष बच्चे के साथ पत्नी के पास पहुंचा।
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बिहार आरा के करनामीपुर निवासी संतोष मिश्रा का परिवार हावड़ा में रहता है। संतोष अपनी पत्नी सारिका मिश्रा (34) और बेटा हर्ष मिश्रा (10) के साथ उपासना एक्सप्रेस ट्रेन से हावड़ा जा रहा था।
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रात में करीब 3 बजे जमानिया कोतवाली क्षेत्र के दरौली रेलवे स्टेशन पर पहुंचने पर ट्रेन की रफ्तार कुछ धीमी हो गई। इसी बीच पहले से सारिका के बैग पर नजर गड़ाए उचक्का सीट पर जेवरात, पैसा रखे बैग लेकर भागने लगा।
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यह देख सारिका शोर मचाते हुए उचक्के के पीछे दौड़ पड़ी। जब उचक्के को ऐसा लगा कि सारिका के शोर से अन्य यात्री जाग जाएंगे और वह पकड़ा जाएगा तो चलती ट्रेन से कूद गया। सारिका भी उचक्के को पकड़ने के लिए ट्रेन से कूद पड़ी।
गिरने की वजह से उसके सिर में गंभीर चोट आ गई। बावजूद इसके वह उठकर लड़खड़ाते हुए रेलवे स्टेशन पर काम कर रहे कर्मचारियों के पास पहुंची और उचक्के को पकड़ने के लिए कहा, लेकिन तब तक उचक्का मौके से फरार हो चुका था।
कर्मचारियों ने स्टेशन मास्टर को सूचना देकर महिला के गंभीर रूप से घायल होने की बात बताई। इस पर स्टेशन मास्टर ने घायल महिला को सीएचसी पर भिजवाया। गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद महिला को जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
उधर ट्रेन में सवार सारिका के पति संतोष ने जब बोगी में पत्नी को नहीं देखा तो लोगों से उसके संबंध में पूछा। लोगों ने बताया कि वह उचक्का को पकड़ने के लिए दरौली स्टेशन पर ट्रेन से नीचे कूद गई तो उसके होश उड़ गए। ट्रेन के मुगलसराय स्टेशन पर पहुंचने के बाद दूसरी ट्रेन से संतोष बच्चे के साथ पत्नी के पास पहुंचा।
दिमाग से नहीं निकल रहा था बैग का ख्याल
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घायल सारिका ने बताया कि बैग में हजारों रुपये नकदी के साथ ही हजारों के जेवरात थे। इस संबंध में आरपीएफ के उपनिरीक्षक केपी सिंह ने बताया कि महिला को उपचार के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया है। इस मामले में अभी तहरीर नहीं मिली है। तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
वहीं बैग लेकर भाग रहे उचक्के को पकड़ने के लिए सारिका ने अपनी जान की भी परवाह नहीं की। शायद यही कारण था कि वह उसे पकड़ने के लिए चलती ट्रेन से कूद गई।
उचक्का तो माहिर था, जो कूदने के बाद भी संभलते हुए भाग निकला, लेकिन सारिका गंभीर रूप से घायल हो गई। बावजूद इसके उसके दिमाग में उचक्के का ख्याल था और वह स्टेशन पर काम कर रहे कर्मियों के पास लड़खड़ाते हुए पहुंच गई और उन्हें उचक्के के संबंध में बताया।
घायल होने के बाद भी उसके दिमाग से बैग का ख्याल नहीं निकल रहा था। जबकि पति संतोष इस बात का अफसोस कर रहा था कि सारिका ने एक बैग के चक्कर में अपनी जान को खतरे में डाल दिया।
वहीं बैग लेकर भाग रहे उचक्के को पकड़ने के लिए सारिका ने अपनी जान की भी परवाह नहीं की। शायद यही कारण था कि वह उसे पकड़ने के लिए चलती ट्रेन से कूद गई।
उचक्का तो माहिर था, जो कूदने के बाद भी संभलते हुए भाग निकला, लेकिन सारिका गंभीर रूप से घायल हो गई। बावजूद इसके उसके दिमाग में उचक्के का ख्याल था और वह स्टेशन पर काम कर रहे कर्मियों के पास लड़खड़ाते हुए पहुंच गई और उन्हें उचक्के के संबंध में बताया।
घायल होने के बाद भी उसके दिमाग से बैग का ख्याल नहीं निकल रहा था। जबकि पति संतोष इस बात का अफसोस कर रहा था कि सारिका ने एक बैग के चक्कर में अपनी जान को खतरे में डाल दिया।