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वैभवशाली परंपरा के साथ रामलीला का श्रीगणेश्ा
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Fri, 16 Sep 2016 02:16 AM IST
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राम की नगरी ‘रामनगर’ में लीला के भावों में पगे प्रेम रस ने सब कुछ बदल दिया। राम भक्ति का अनूठा समागम अब यहां महीने भर चलेगा। लीला के अनूठे रूप-रंग ही नहीं, अनंत आनंद में डूबीं संतों-भक्तों की टोलियां भी चित्ताकर्षक बन गई हैं। नावों से गंगा पार होकर बागों-सरोवरों पर साज-शृंगार करने वाले लीला प्रेमी कहीं माथे पर तिलक तो कहीं आंखों में सुरमा लगाते नजर आए। एक तरफ संतों ने राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और सीता के नयनाभिराम स्वरूपों को कंधे पर बैठाकर पूर्वाभ्यास किया तो दूसरी ओर रामबाग में रावण जन्म की लीला का पारंपरिक परिवेश लोग निहारते रह गए। लीला प्रेमियों के माथे पर प्रेम के प्रतीक तिलक सजे तो कहीं छाता, छड़ी और टार्च लिए लीला प्रेमी पोथी बांचते नजर आए। काशिराज डॉ. अनंत नारायण सिंह ने बरसों पुरानी वैभवशाली परंपरा को कायम रखा। उन्होंने हाथी पर सवार होकर लीला देखी।
जन्म लेने के बाद ही रावण के अट्टहास से धरती कांप उठी। दशानन ने यज्ञ से ब्रह्मा को प्रसन्न कर अमरत्व का वरदान ले लिया। ब्रह्मा ने उसे वरदान दिया कि तुझे मनुष्य और वानर के सिवा कोई नहीं मार सकता। वरदान मिलने के बाद दंभ से चूर रावण ने देव लोक में अपने अत्याचार से खलबली मचा दी। कुबेर पर चढ़ाई कर उनका पुष्पक विमान छीन लिया। उधर, घबरा कर देवराज इंद्र बैकुंठ के लिए पलायन कर गए। थरथराई पृथ्वी गो माता के वेश में देवी-देवताओं के साथ क्षीर सागर में भगवान विष्णु के दरबार पहुंची, ताकि रावण के अत्याचार से मुक्ति मिल सके। ऐसे ही दृश्यों के मंचन के साथ गुरुवार शाम राम बाग में रामनगर की जगविख्यात रामलीला शुरू हो गई।
गुरुवार शाम 4:55 बजे किले के मुख्य द्वार से राजा डॉ. अनंत नारायण सिंह शाही बग्घी पर सवार होकर निकले। शाही सवारी देखने के लिए लोग घंटों पहले से ही सड़क के दोनों किनारों पर कतारबद्ध होकर खड़े थे। बग्घी पर सवार अनंत नारायण हाथ जोड़कर लीला प्रेमियों का अभिवादन कर रहे थे, वहीं लोग हर-हर महादेव का उद्घोष कर इसका उत्तर दे रहे थे। तीनों राजकुमारियां विष्णु प्रिया, हरि प्रिया और कृष्ण प्रिया के साथ राजकुमारी के पोते श्रीमंत माधव, नाती पद्मनारायण सिंह, पुत्र कुंवर ईशांत नारायण सिंह भी कार में सवार होकर लीला देखने पहुंचे।
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काशिराज डॉ. अनंत नारायण सिंह की मौजूदगी में जब राम बाग के मुख्य द्वार पर लीला का मंचन रावण जन्म के साथ आरंभ हुआ तब लीला देखने के लिए लीला प्रेमियों की भीड़ चौतरफा उमड़ पड़ी थी। लीला के पहले दिन ब्रह्मा द्वारा कुंभकरण ने छह महीना सोने और एक दिन जागने का वरदान और जाते समय ब्रह्मा द्वारा लंकिनी से यह कहने कि एक समय ऐसा आएगा, जब तुम वानर का निरादर करोगी और उसके एक घूंसे के प्रहार से विकल हो जाओगी। तुम समझ लेना कि राक्षस राज का अंत नजदीक आ गया है, जैसे दृश्यों का भी मंचन किया गया। राम बाग पोखरे में क्षीर सागर की भव्य झांकी सजाई गई।
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जन्म लेने के बाद ही रावण के अट्टहास से धरती कांप उठी। दशानन ने यज्ञ से ब्रह्मा को प्रसन्न कर अमरत्व का वरदान ले लिया। ब्रह्मा ने उसे वरदान दिया कि तुझे मनुष्य और वानर के सिवा कोई नहीं मार सकता। वरदान मिलने के बाद दंभ से चूर रावण ने देव लोक में अपने अत्याचार से खलबली मचा दी। कुबेर पर चढ़ाई कर उनका पुष्पक विमान छीन लिया। उधर, घबरा कर देवराज इंद्र बैकुंठ के लिए पलायन कर गए। थरथराई पृथ्वी गो माता के वेश में देवी-देवताओं के साथ क्षीर सागर में भगवान विष्णु के दरबार पहुंची, ताकि रावण के अत्याचार से मुक्ति मिल सके। ऐसे ही दृश्यों के मंचन के साथ गुरुवार शाम राम बाग में रामनगर की जगविख्यात रामलीला शुरू हो गई।
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गुरुवार शाम 4:55 बजे किले के मुख्य द्वार से राजा डॉ. अनंत नारायण सिंह शाही बग्घी पर सवार होकर निकले। शाही सवारी देखने के लिए लोग घंटों पहले से ही सड़क के दोनों किनारों पर कतारबद्ध होकर खड़े थे। बग्घी पर सवार अनंत नारायण हाथ जोड़कर लीला प्रेमियों का अभिवादन कर रहे थे, वहीं लोग हर-हर महादेव का उद्घोष कर इसका उत्तर दे रहे थे। तीनों राजकुमारियां विष्णु प्रिया, हरि प्रिया और कृष्ण प्रिया के साथ राजकुमारी के पोते श्रीमंत माधव, नाती पद्मनारायण सिंह, पुत्र कुंवर ईशांत नारायण सिंह भी कार में सवार होकर लीला देखने पहुंचे।
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काशिराज डॉ. अनंत नारायण सिंह की मौजूदगी में जब राम बाग के मुख्य द्वार पर लीला का मंचन रावण जन्म के साथ आरंभ हुआ तब लीला देखने के लिए लीला प्रेमियों की भीड़ चौतरफा उमड़ पड़ी थी। लीला के पहले दिन ब्रह्मा द्वारा कुंभकरण ने छह महीना सोने और एक दिन जागने का वरदान और जाते समय ब्रह्मा द्वारा लंकिनी से यह कहने कि एक समय ऐसा आएगा, जब तुम वानर का निरादर करोगी और उसके एक घूंसे के प्रहार से विकल हो जाओगी। तुम समझ लेना कि राक्षस राज का अंत नजदीक आ गया है, जैसे दृश्यों का भी मंचन किया गया। राम बाग पोखरे में क्षीर सागर की भव्य झांकी सजाई गई।