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Varanasi News: दक्षिण के सावन में 12 दिन बाकी, नवविवाहिताएं करती हैं शिव-गौरी की पूजा

Sun, 30 Aug 2026 01:20 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 30 Aug 2026 01:20 AM IST
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With 12 days remaining until the month of Sawan in the South, newlywed women worship Shiva and Gauri.
वाराणसी। देश के पूर्वी और पश्चिमी राज्यों में श्रावण मास खत्म हो गया है, मगर दक्षिण और पश्चिम के राज्यों में सावन के 12 दिन अभी और बचे हैं। वहां 10 सितंबर को अमावस्या पर सावन की पूर्णाहुति होगी। उनका तीसरा सोमवार 31 अगस्त और चौथा सोमवार सात सितंबर को पड़ेगा। काशी में रह रहे पंच द्रविड़ राज्यों के लोग शिव-गौरी का पूजन-अर्चन कर रहे हैं। नवविवाहिताएं विशेष उत्सव मना रही हैं।
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पंच द्रविड़ राज्यों में तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र और गुजरात का कच्छ क्षेत्र आता है। यहां पंच द्रविड़ पंचांग में हिंदू मास अमावस्या से शुरू होकर अमावस्या को ही समाप्त होता है। श्रीकाशी महाराष्ट्र सेवा समिति के ट्रस्टी संतोष सोलापुरकर ने बताया कि सावन (श्रावण) उत्तर भारत के मुकाबले दक्षिण में करीब 15 दिन बाद शुरू होता है। क्योंकि यहां अमांत कैलेंडर माना जाता है, जिसमें मास अमावस्या के बाद शुरू होता है।
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सावन पूजा-पाठ के साथ त्योहारों, खान-पान के विशेष नियमों और प्रकृति के उत्सव का महीना है। महाराष्ट्र में दीप अमावस्या, श्रावणी सोमवार व्रत (शिवमुठ), मंगला गौरी व्रत (मंगलवार) मनाए जाते हैं। मंगला गौरी व्रत नवविवाहित महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। शादी के शुरुआती पांच सालों तक महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं। रात में महिलाएं पारंपरिक खेल, जैसे फुगड़ी और झिम्मा खेलती हैं और जागरण करती हैं। बुधवार को विठ्ठल भगवान और शुक्रवार को देवी लक्ष्मी व तुलसी की विशेष पूजा होती है। शनिवार को शनि देव और हनुमान जी की पूजा की जाती है।
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नारली पूर्णिमा समुद्र तटीय इलाकों और मुंबई के कोली (मछुआरे) समुदाय के लिए महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन समुद्र देव को प्रसन्न करने के लिए नारियल अर्पित किया जाता है। इसके बाद ही मछली पकड़ने के नए सीजन की शुरुआत होती है। गोकुलाष्टमी और दही हांडी के साथ बैल पोला भी मनाया जाता है। सावन की समापन अमावस्या पर किसान अपने बैलों को सजाकर उनकी पूजा करते हैं और खेती में उनके योगदान के लिए आभार जताते हैं। खाने में पूरन पोली, मोदक और साबूदाना खिचड़ी जैसे व्यंजन ग्रहण किए जाते हैं।
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