पत्नी ने बचाई पति की जान : BHU में हुआ किडनी ट्रांसप्लांट, छह घंटे तक चली सर्जरी; छह माह पहले शुरू हुआ था इलाज
आईएमएस बीएचयू के सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में डाॅक्टरों ने मरीज का सफल ऑपरेशनी किया। घंटों पर मरीज को नया जीवन मिला। उसकी पत्नी का भी भरपूर सहयोग रहा।
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देइपुर निवासी 55 वर्षीय व्यक्ति की दोनों किडनी खराब थी। आईएमएस बीएचयू में डॉक्टरों ने जांच की, तब इसकी जानकारी हुई। ट्रांसप्लांट को ही डॉक्टरों ने विकल्प बताया।
मरीज की पत्नी ने अपनी एक किडनी को पति को देकर जान बचाने का संकल्प लिया। गुरुवार को बीएचयू यूरोलॉजी ओटी में साढ़े पांच घंटे तक चली प्रक्रिया में पत्नी की किडनी पति को लगाकर डॉक्टरों ने नया जीवन दिया।
आईएमएस बीएचयू के सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक में चलने वाली ट्रांसप्लांट क्लीनिक में किडनी की समस्या वाले मरीजों को देखा जाता है। गुरुवार को जिस मरीज को पत्नी की किडनी लगाई गई, वह करीब छह माह पहले बीएचयू आया था।
आईएमएस बीएचयू के निदेशक प्रो. एसएन संखवार के निर्देशन में यूरोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. समीर त्रिवेदी, नेफ्रोलाॅजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. शिवेंद्र सिंह की संयुक्त टीम की देखरेख में ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया पूरी करवाई गई।
पत्नी की बायी किडनी से आगे चलेगा जीवन
प्रो. समीर त्रिवेदी ने बताया कि मरीज की दोनों किडनी खराब हो गई थी। पत्नी ने जैसे ही अपनी स्वीकृति दी तो जांच की पूरी प्रक्रिया करवाई गई। इस दौरान किडनी ट्रांसप्लांट के नियमानुसार ब्लडग्रुप मैंचिंग सहित अन्य प्रक्रिया पूरी करवाई गई। पत्नी ने अपनी बायी किडनी दी है।
प्रो. शिवेंद्र सिंह ने बताया कि साढ़े पांच घंटे तक ट्रांसप्लांट की चली प्रक्रिया के बाद मरीज और उसकी पत्नी दोनों स्वस्थ हैं। ट्रांसप्लांट करने वाली टीम में यूरोलॉजी से डॉ. उज्जवल, एनीस्थीसिया से डॉ. शॉक्य सहित अन्य रेजिडेंट ने भी सहयोग किया।
नौ माह में तीन मरीजों का हो चुका है किडनी ट्रांसप्लांट
आईएमएस बीएचयू में पिछले साल मई में लंबे समय बाद किडनी प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू होने के नौ महीने में तीन मरीजों का ट्रांसप्लांट किया जा चुका है। पिछले साल मई महीने में रोहनिया निवासी 39 वर्षीय एक युवक का किडनी प्रत्यारोपण किया गया। इसके बाद 14 नवंबर को मिर्जापुर निवासी 35 वर्षीय युवक के शरीर में किडनी का सफल प्रत्यारोपण हुआ। अब 30 जनवरी को देईपुर निवासी 55 वर्षीय मरीज का किडनी ट्रांसप्लांट किया गया।
बोले अधिकारी
पहले मरीजों को किडनी ट्रांसप्लांट के लिए बाहर जाना पड़ता था। अब ट्रांसप्लांट क्लीनिक चलने से समय से बीमारी की जानकारी मिलने के साथ ही उसका बेहतर उपचार भी बीएचयू में हो रहा है। यहां बेहतर सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी। -प्रो. एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस बीएचयू