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Varanasi: चंबल के जंगलों में छोड़े जाएंगे बनारस के उत्पाती बंदर, जल्द शुरू होगा पकड़ने का अभियान

Sat, 29 Oct 2022 11:12 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Sat, 29 Oct 2022 11:12 PM IST
सार

वाराणसी शहर के उत्पाती बंदरों को मथुरा की संस्था तैयार है लेकिन बंदरों को छोड़ने पर निर्णय नहीं हो पाया। चंदौली और सोनभद्र के जंगलों बंदर लंगूरों की संख्या पर्याप्त होने से अब यहां छोड़ने की अनुमति नहीं है। 

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wicked monkeys of varanasi will be released in Chambal forest  campaign to catch will start soon
बंदर - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

वाराणसी शहर के उत्पाती बंदरों को चंबल के जंगलों में छोड़ने की तैयारी है। चंदौली और सोनभद्र के जंगलों में पहले से मौजूद बंदर और लंगूरों की संख्या अधिक होने से चंबल एक विकल्प वन विभाग के सामने है। प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट वाइल्ड लाइफ मिलने के बाद बंदरों को पकड़ने अभियान शुरू होगा। 

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वन विभाग को रोजाना 10 से 12 शिकायतें बंदरों के आतंक की मिल रही है। पिछले साल वन विभाग ने प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फारेस्ट वाइल्ड लाइफ से 3860 बंदरों को नगर निगम की सहयोग से पकड़ कर छोड़ने की मांग की थी। इनमें 200 बंदरों को काशी वन प्रभाग के चंदौली के जंगल में छोड़ा गया। जबकि 3838 को मंजूरी नहीं मिल पाई। 
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उप प्रभागीय वनाधिकारी राकेश कुमार ने बताया कि नगर निगम की ओर से 3860 बंदरों को पकड़ने के लिए आवेदन मिला था। प्रिंसिपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फारेस्ट से 200 बंदरों को पकड़कर चंदौली के जंगलों में छोड़ने की मंजूरी मिली थी, जो कार्य पूर्ण हो गया है, 3838 को मंजूरी मिलना बाकी है।

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बंदरों को पकड़ने के लिए मथुरा की संस्था तैयार है लेकिन बंदरों को छोड़ने पर निर्णय नहीं हो पाया। चंदौली और सोनभद्र के जंगलों बंदर लंगूरों की संख्या पर्याप्त होने से अब यहां छोड़ने की अनुमति नहीं है। चंबल के जंगलों में छोड़ने विचार चल रहा है। स्थानीय वनाधिकारियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद बंदरों के पकड़ने का अभियान चलेगा। 

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