Achievement: शंघाई सहयोग संगठन की ओर से सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी बनने के बाद काशी को क्या मिलेगा फायदा, जानिए
देश-दुनिया में सांस्कृतिक राजधानी के रूप में काशी की पहचान पहले से ही है, लेकिन अब एक और उपलब्धि जुड़ने जा रही है।
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धर्म, कला और संस्कृति की राजधानी काशी अपनी चमक दुनिया में बिखरेगी। यहां के अनछुए पहलुओं से संसार को परिचित कराया जाएगा। काशी को शंघाई सहयोग संगठन की सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी बनेगी। संगठन से जुड़े देशों के सैलानियों की आगवानी के लिए सितंबर 2022 से सितंबर 2023 तक कई तरह के आयोजन किए जाएंगे। प्रशासनिक महकमा तैयारियों में जुट गया है।
सात वार नौ त्योहार वाली काशी सितंबर 2022 से एक वर्ष के लिए शंघाई सहयोग संगठन की सांस्कृतिक और पर्यटन राजधानी रहेगी। ऐसे में इस संगठन से जुड़े देशों के सैलानी काशी की आयोजन, प्रमुख स्थल, खानपान सहित अन्य माहात्म्य को जानने के लिए यहां आएंगे।
वाराणसी के 100 पेज के डोजियर के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। इसमें काशी के प्रमुख पर्यटन स्थलों के अलावा पंचक्रोशी परिक्रमा, पावन पथ के मंदिरों की जानकारी और महत्वपूर्ण आयोजन का प्रचार प्रसार भी किया गया है। इसी तरह संस्कृति और हैंडीक्राफ्ट से जुड़े आयोजन भी यहां किए जाएंगे। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) 8 सदस्यों का आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा गठबंधन है, जिसकी स्थापना वर्ष 2001 में की गई थी। इसमें चीन, भारत, कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, रूस, तजाकिस्तान एवं उजबेकिस्तान शामिल हैं।
दुनियाभर में चमकेगी काशी
कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने कहा कि पर्यटन और सांस्कृतिक राजधानी घोषित होने पर यहां न सिर्फ पर्यटन बल्कि संस्कृति विकास के साथ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। हम अपनी तैयारी कर रहे हैं और इसकी पूरी रिपोर्ट फरवरी के पहले सप्ताह में शासन को भेजा गया था।
टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस आयोजन से निश्चित काशी में पर्यटन का एक नया विस्तार होगा। पर्यटन उद्योग में बूम आएगा। जीआई विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. रजनीकांत ने कहा कि कई देशों के पर्यटक आएंगे तो जीआई उत्पादों को भी बढ़ावा मिलेगा। काशी भ्रमण के साथ ही बनारसी उत्पादों के आर्डर मिलेंगे।
टूरिज्म गिल्ड के वरिष्ठ सदस्य प्रवीण मेहता ने कहा कि इस तरह के आयोजन से पूरी दुनिया में काशी के पर्यटन उद्योग को नई उड़ान मिलेगी।