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Gopashtami 2022: कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि आज, गायों के दर्शन-पूजन से पूरी होती हैं मनोकामनाएं
Tue, 01 Nov 2022 11:55 AM IST
किरन रौतेला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: किरन रौतेला
Updated Tue, 01 Nov 2022 11:55 AM IST
सार
काशी के पंचांग के अनुसार, गोपाष्टमी एक नवंबर को दोपहर 1.11 बजे से आरंभ होकर रात्रि 11.04 बजे पर समाप्त होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गायों का दर्शन-पूजन करना चाहिए और नैवेद्य अर्पण करना चाहिए।
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गोशाला में गौपूजन करते भक्त
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर गोपाष्टमी मनाई जाएगी। गोमाता को समर्पित पर्व में गायों की पूजा के साथ ही अनुष्ठान किए जाते हैं। एक नवंबर को काशी के मठों में स्थापित गोशालाओं में गोपूजन होगा।
काशी के पंचांग के अनुसार, गोपाष्टमी एक नवंबर को दोपहर 1.11 बजे से आरंभ होकर रात्रि 11.04 बजे पर समाप्त होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गायों का दर्शन-पूजन करना चाहिए और नैवेद्य अर्पण करना चाहिए।
दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ परिसर में गोपाष्टमी महोत्सव मनाया जाएगा। पं. गौरी नाथ शुक्ल के अनुसार गोपाष्टमी के दिन सुबह गायों को स्नान कराने के बाद शृंगार करें। फूल से गाय का पूजन करें और पैर छूएं। पूजन के बाद परिक्रमा अवश्य करें और गौ माता के पैरों की मिट्टी को मस्तक पर लगाएं। साथ ही हाथ जोड़कर प्रणाम करें। गाय माता की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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काशी के पंचांग के अनुसार, गोपाष्टमी एक नवंबर को दोपहर 1.11 बजे से आरंभ होकर रात्रि 11.04 बजे पर समाप्त होगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गायों का दर्शन-पूजन करना चाहिए और नैवेद्य अर्पण करना चाहिए।
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दुर्गाकुंड स्थित धर्मसंघ परिसर में गोपाष्टमी महोत्सव मनाया जाएगा। पं. गौरी नाथ शुक्ल के अनुसार गोपाष्टमी के दिन सुबह गायों को स्नान कराने के बाद शृंगार करें। फूल से गाय का पूजन करें और पैर छूएं। पूजन के बाद परिक्रमा अवश्य करें और गौ माता के पैरों की मिट्टी को मस्तक पर लगाएं। साथ ही हाथ जोड़कर प्रणाम करें। गाय माता की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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