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बुनकर अब ऑनलाइन मंगा सकेंगे कच्चा माल
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 21 Dec 2015 01:45 AM IST
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बुनकरी की खोई पहचान लौटाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से किए जा रहे प्रयासों में रविवार को एक और अध्याय जुड़ गया।
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काशी से उद्यम संसाधन योजना (ईआरपी सिस्टम) का आगाज करते हुए केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री संतोष गंगवार ने चौकाघाट स्थित बुनकर सेवा केंद्र में एकीकृत वस्त्र कार्यालय भवन (आईटीओसी) की आधारशिला भी रखी।
देश में वाराणसी पहला ऐसा जिला है, जहां ईआरपी सिस्टम की शुरुआत की गई है। इसके जरिये बुनकर अपनी जरूरत के अनुसार ऑनलाइन कच्चा माल मंगा सकेंगे।
बुनकरों को उचित दर पर गुणवत्तापूर्ण माल उपलब्ध कराने, छोटी-छोटी जरूरत के लिए विभागों के चक्कर लगाने से छुटकारा दिलाने, बिचौलियों का दखल खत्म करने के लिए शुरू की गई उद्यम संसाधन योजना देश के दूसरे बुनकर बहुल शहरों में भी लागू की जाएगी।
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इस ट्रेडिंग की उच्च स्तरीय निगरानी सीधे मंत्रालय स्तर पर होगी।
केंद्रीय वस्त्र राज्य मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद से बुनकरों की संख्या में लगातार कमी आई है। बुनकरी को मनरेगा से जोड़ने के लिए प्रयास किया जा रहा है।
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बताया कि काशी में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट) का सब सेंटर खोलने की प्रक्रिया भी दस दिन में शुरू हो जाएगी। इसके लिए जगह निर्धारित करने के साथ ही बाकी प्रक्रियाओं को जल्द अंतिम रूप दिया जाएगा।
चौकाघाट बुनकर सेवा केंद्र में आईटीओसी का काम जल्द से जल्द पूरा कराने की ताकीद की। बताया कि यहां एक छत के नीचे सभी कार्यालय खोलने के लिए 65 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ईआरपी सिस्टम लागू करने के पीछे का मकसद बुनकरों को उचित दर पर कच्चा माल उपलब्ध कराने के साथ ही बिचौलियों का दखल खत्म करना है।
इससे बुनकरों को काफी सहूलियत हो जाएगी। सस्ते दर पर जब उन्हें गुणवत्तायुक्त माल उपलब्ध होगा तो उत्पाद भी कम दाम में हम ग्राहकों को उपलब्ध करा पाएंगे।
बुनकरी को टूरिज्म से जोड़ने पर भी गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं। सभी ब्लॉकों में कॉमन फैसिलिटी सेंटर खोलने की तैयारी को जल्द अंतिमरूप दिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 1971 में बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ लेकिन18 करोड़ बैंक खाते मोदी सरकार में खुले वह भी जीरो बैलेंस पर। बताया कि प्रधानमंत्री के मुद्रा बैंक के लिए अब तक 227 आवेदन मिल चुके हैं।
केंद्र सरकार का प्रयास है कि कोई भी कार्यक्रम दिल्ली में ही क्यों आयोजित हों? छोटे-छोटे शहरों में जाया जाए और वहां आयोजन किए जाएं।
इससे आम जन की समस्याएं सामने आएंगी और छिपे टैलेंट का पता चलेगा। इससे पहले महापौर राम गोपाल मोहले और विधायक रवींद्र जायसवाल ने भी विचार व्यक्त किए।