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वाराणसी: पीएम की वोकल फॉर लोकल की अपील से बुनकरों व कारोबारियों में जगी आस, बनारसी वस्त्र उद्योग को मिलेगा ‘ऑक्सीजन’

Thu, 28 Oct 2021 04:24 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 28 Oct 2021 04:24 PM IST
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weavers and businessmen raised hope after pm modi appeal for Vocal for local in varanasi
बजरडीहा में बनारसी साड़ी की खरीदारी करते लोग। - फोटो : अमर उजाला

कोरोना महामारी के कारण मंदी की मार झेल रहे बनारसी वस्त्र उद्योग को नई संजीवनी मिलने की आस जगी है। प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल मंत्र से न केवल बुनकर बल्कि बनारसी वस्त्र उद्योग से जुड़े लाखों कारोबारी भी राहत महसूस कर रहे हैं। त्योहारी सीजन में बनारसी वस्त्रों की मांग में इजाफा होगा। जिससे उनकी रोजी रोटी का संकट भी काफी हद तक समाप्त हो जाएगा।

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देश के जाने माने फैशन डिजाइनर और कई फिल्मी अभिनेत्रियों ने अपने शादी जैसे खास आयोजनों में बनारसी साड़ी पहनी है। चीन से आयातित रेशम महंगा होने की वजह से इस कारोबार पर खराब असर पड़ा है। कच्चे माल की उपलब्धता कम होने से उत्पादन में कमी आने के साथ तैयार उत्पादों के दाम में बढ़ोतरी हुई है। वाराणसी में दो लाख से अधिक लोग बनारसी वस्त्र उद्योग से प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से जुड़े हैं। इसमें बुनकरों की संख्या सर्वाधिक है।
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शादी और त्योहार पर अच्छे कारोबार की उम्मीद
गोलघर क्षेत्र में पिछले 20 साल से बनारसी साड़ी का कारोबार से जुड़े गजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि त्योहार के साथ सहालग को देखते हुए बाजार में खरीदार आना शुरू हो गए हैं। चीन से रेशम बंद होने के बाद बैंगलोर से कच्चा माल मंगाया जा रहा है।

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थीम पार्टी में बनारसी साड़ियां बिखेर रहीं जलवा

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साड़ी खरीदती महिला। - फोटो : अमर उजाला

महिला क्लबों में होने वाली थीम पार्टी में भी बनारसी साड़ियों का जलवा है। फैशन डिजाइनर वंदना मदान बताती हैं कि क्लबों की ओर से सावन, तीज, करवाचौथ या दीपोत्सव जैसे आयोजनों में बनारसी साड़ियों और उनसे बने आउटफिट महिलाएं बड़े चाव से पहन रही हैं। इस समय बनारसी साड़ियों को मोडीफाई कर उसमें नग, मोती लगाकर नया अंदाज दिया जा रहा है।

बुके हुआ पुराना अब बनारसी दुपट्टा का जमाना
बड़े-बड़े आयोजनों में मुख्य अतिथि को बुके का चलन था। उसकी जगह बनारसी दुपट्टे ने ले ली है। क्लब के स्थापना दिवस, पदग्रहण समारोह में दिए जाने वाले बनारसी दुपट्टे वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा देने में काफी मददगार साबित हो रहे हैं।

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