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कश्मीर की कालीन का कमाल: 20 लाख गांठें, 28 महीने की मेहनत और प्योर सिल्क का इस्तेमाल; कीमत 26 लाख रुपये
Tue, 06 Oct 2026 05:15 AM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, भदोही।
अमर उजाला नेटवर्क, भदोही।
Published by: Pragati Chand
Updated Tue, 06 Oct 2026 05:15 AM IST
सार
कालीन मेले में कश्मीर की 12 बाई 18 फीट सिल्क की कालीन लोगों में आकर्षण का केंद्र बनी है। इसमें 20 लाख गांठें लगी हैं। वहीं इसकी कीमत 26 लाख रुपये है। इसमें 60 किलो सिल्क का इस्तेमाल किया गया है।
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26 लाख की सिल्क कालीन की जानकारी देते निर्यातक।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भदोही में चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कालीन मेले में कश्मीर सिल्क की कालीन आकर्षित कर रही है। 12 बाई 18 फीट की सिल्क की कालीन की बुनाई में 20 लाख गांठें लगाई गई हैं। इसकी कीमत 26 लाख रुपये है। सिल्क और ऊलेन से बनी मॉडर्न डिजाइन की कालीन भी पसंद की जा रही है।
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जम्मू कश्मीर के निर्यातक मेहराज जान ने बताया कि सिल्क के कालीन की डिजाइन ईरान से ली गई है। इसे माहिर या तजुर्बे वाला बुनकर ही बना सकता है। प्योर सिल्क का इस्तेमाल किया गया है। इस कालीन को छह बुनकरों ने 28 महीने में तैयार किया है। इसके एक स्क्वायर मीटर में 576 गांठें लगाई गई हैं।
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एक बुनकर को 40 साल से अधिक का अनुभव है। दूसरे बुनकर 10 से 15 साल का अनुभव रखते हैं। इस कालीन को तैयार करने में 60 किलो सिल्क का इस्तेमाल किया गया है। कटाई और छंटाई के बाद 45 किलोग्राम की कालीन तैयार हुई है।
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हैप्पी ट्री ऑफ लाइफ: 15 पशु, 15 पक्षी और आठ से अधिक वनस्पतियों की डिजाइन
कश्मीर के निर्यातकों द्वारा तैयार की गई हैप्पी ट्री ऑफ लाइफ कालीन मेले में अपनी अलग पहचान बना रही है। छह बाई नौ की इस कालीन की कीमत भले ही केवल छह लाख है, लेकिन इसमें उकेरी गई डिजाइन बुनकरों की कुशल कारीगरी को दर्शा रहे हैं। जम्मू कश्मीर के निर्यातक यासिन ने बताया कि हैप्पी ट्री ऑफ लाइफ कालीन अपनी नाम की तरह की खास है। इसे दो कुशल बुनकरों ने करीब डेढ़ साल में तैयार किया है। पारंपरिक डिजाइन वाली इस कालीन में पूरे जंगल का सीन दिखाया गया है। दो जिसमें न सिर्फ नदी, पहाड़ और पेड़ शामिल हैं, बल्कि 15 तरह के पशु, 15 तरह की पक्षियां और करीब आठ तरह की वनस्पतियां उकेरी गई है। इस कालीन को अगर आप दूर से भी देखेंगे तो इसमें उकेरे गए पशु-पक्षी और वनस्पतियां आसानी से दिख जाती हैं। बताया कि इस तरह की कालीन अमेरिका और रूस जैसे देशों में अधिक पसंद किए जाते हैं।
कश्मीर के निर्यातकों द्वारा तैयार की गई हैप्पी ट्री ऑफ लाइफ कालीन मेले में अपनी अलग पहचान बना रही है। छह बाई नौ की इस कालीन की कीमत भले ही केवल छह लाख है, लेकिन इसमें उकेरी गई डिजाइन बुनकरों की कुशल कारीगरी को दर्शा रहे हैं। जम्मू कश्मीर के निर्यातक यासिन ने बताया कि हैप्पी ट्री ऑफ लाइफ कालीन अपनी नाम की तरह की खास है। इसे दो कुशल बुनकरों ने करीब डेढ़ साल में तैयार किया है। पारंपरिक डिजाइन वाली इस कालीन में पूरे जंगल का सीन दिखाया गया है। दो जिसमें न सिर्फ नदी, पहाड़ और पेड़ शामिल हैं, बल्कि 15 तरह के पशु, 15 तरह की पक्षियां और करीब आठ तरह की वनस्पतियां उकेरी गई है। इस कालीन को अगर आप दूर से भी देखेंगे तो इसमें उकेरे गए पशु-पक्षी और वनस्पतियां आसानी से दिख जाती हैं। बताया कि इस तरह की कालीन अमेरिका और रूस जैसे देशों में अधिक पसंद किए जाते हैं।
ऊलेन की बनी माही प्लेन कालीन की कीमत 4.60 लाख रुपये
कालीन मेले में ऊलेन कालीनों में सबसे महंगी कालीन 4.60 लाख रुपये की रही। ऊलेन की बनी इस कालीन को माही प्लेन कालीन कहा जाता है। पारंपरिक डिजाइन वाली इस कालीन में एक स्क्वायर मीटर में 256 गांठें लगाई गई हैं। घोसिया के निर्यातक अनुराग बरनवाल ने बताया कि कालीन का बाजार पहले से बदला है, लेकिन पारंपरिक कालीनें, जिससे भदोही की पहचान हुआ करती थी। ऊलेन की इस छह बाई आठ की कालीन की क्वालिटी 14 बाई 70 की है। इसे तीन बुनकरों ने 90 दिनों तक बुनाई करके बनाया है।
कालीन मेले में ऊलेन कालीनों में सबसे महंगी कालीन 4.60 लाख रुपये की रही। ऊलेन की बनी इस कालीन को माही प्लेन कालीन कहा जाता है। पारंपरिक डिजाइन वाली इस कालीन में एक स्क्वायर मीटर में 256 गांठें लगाई गई हैं। घोसिया के निर्यातक अनुराग बरनवाल ने बताया कि कालीन का बाजार पहले से बदला है, लेकिन पारंपरिक कालीनें, जिससे भदोही की पहचान हुआ करती थी। ऊलेन की इस छह बाई आठ की कालीन की क्वालिटी 14 बाई 70 की है। इसे तीन बुनकरों ने 90 दिनों तक बुनाई करके बनाया है।
प्लास्टिक के बोतलों के वेस्ट से बने यार्न से बनी प्रिंटेड दरियां
वैश्विक बाजार में सस्ते कालीनों और दरियों के मांग के बीच अधिकतर निर्यातकों ने सस्ते दरियां बनाना शुरू कर दी है। इन्हीं में से एक है डिजिटल प्रिंटेड दरियां। डिजिटल प्रिंटिंग वाली दरियों की खास बात यह है कि ये प्लास्टिक के बोतलों के वेस्ट से बने यार्न (पेट यार्न) से बनीं हैं। पहले सफेद यार्न से दरियों को तैयार कर लिया जाता है। इस तरह के प्रिंटेड दरियां इस एक्सपो में दो से तीन स्टॉलों पर प्रदर्शित की गई हैं।
वैश्विक बाजार में सस्ते कालीनों और दरियों के मांग के बीच अधिकतर निर्यातकों ने सस्ते दरियां बनाना शुरू कर दी है। इन्हीं में से एक है डिजिटल प्रिंटेड दरियां। डिजिटल प्रिंटिंग वाली दरियों की खास बात यह है कि ये प्लास्टिक के बोतलों के वेस्ट से बने यार्न (पेट यार्न) से बनीं हैं। पहले सफेद यार्न से दरियों को तैयार कर लिया जाता है। इस तरह के प्रिंटेड दरियां इस एक्सपो में दो से तीन स्टॉलों पर प्रदर्शित की गई हैं।
रग्स बाई एआरएस के स्टॉल पर बहुतायत में प्रदर्शित प्रिंटेड कालीनों की ओर देसी और विदेशी खरीदार आकर्षित रहे। स्टॉल के मैनेजर शम्स अब्बास ने बताया कि हमारा विदेशी के साथ-साथ डोमेस्टिक बाजार पर भी ध्यान है। देश के मेट्रो सिटीज़ मुंबई, बंगलूरू, चेन्नई, नई दिल्ली, हैदराबाद, गुरुग्राम समेत पर्यटक बहुलता वाले शहरों में ज्यादा मांग है।