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परीक्षण के बाद ही सौंपी जाएंगी पानी की टंकियां
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 29 May 2017 02:03 AM IST
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पानी की टंकी
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टेक्निकल एक्सपर्ट कमेटी (टीएसी) ने क्लीन चिट भले दे दी हो लेकिन अरसे से शोपीस बनीं नवनिर्मित पानी टंकियों से सप्लाई चालू होने का इंतजार फिलहाल खत्म होने वाला नहीं है। वजह, परीक्षण के दौरान टंकियों से पानी का रिसाव और भूमिगत पाइप लाइनों का फट जाना। इन टंकियों के साथ ही भ्रष्टाचार की परतों के नीचे दबी पेयजल पाइप लाइन जब तक दुरुस्त नहीं होगी तब तक सप्लाई चालू नहीं हो पाएगी। जलकल का स्पष्ट कहना है कि वह जल निगम से इन टंकियों और पाइप लाइन को अपने जिम्मे तभी लेगी जब परीक्षण में वे पूरी तरह सफल पाई जाएंगी।
नई पाइप लाइन और पानी टंकियों पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी शहर की जनता प्यासी है। जेएनएनयूआरएम के तहत 2008 में शुरू हुई इस परियोजना को 2012 में ही पूरा होना था लेकिन नौ साल बाद इंतजार खत्म होता नहीं दिख रहा है। नए बने 43 ओवरहेड टैंक में से सिर्फ 19 को ही अब तक जलनिगम जलकल को हस्तगत कर सका है। बाकी ओवरहेड टैंक परीक्षण में फेल होने के चलते शोपीस बने हुए हैं। जलकल उन्हें लेने को तैयार नहीं है। साथ ही, परीक्षण के दौरान भूमिगत पाइप लाइनें भी जगह-जगह फट जा रही हैं। इसे भी अब तक हस्तगत नहीं किया जा सका है।
जलकल का कहना है कि सही तरीके से चालू हालत में होने पर ही पानी टंकियों और पाइप लाइन को अपने जिम्मे लिया जाएगा। बता दें कि जेएनएनयूआरएम के तहत पांच सौ करोड़ की लागत से करीब सात सौ किमी पेयजल पाइप लाइन शहर भर में बिछाई गई है। जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर पानी टंकियों के निर्माण में गुणवत्ता और मानक की अनदेखी की शिकायतों की जांच टीएसी से कराई गई थी लेकिन टीएसी की ओर से क्लीन चिट मिलने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि सब कुछ ठीक है तो फिर इन्हें हैंडओवर का सप्लाई चालू क्यों नहीं कराई जा रही है।
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नई पाइप लाइन और पानी टंकियों पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी शहर की जनता प्यासी है। जेएनएनयूआरएम के तहत 2008 में शुरू हुई इस परियोजना को 2012 में ही पूरा होना था लेकिन नौ साल बाद इंतजार खत्म होता नहीं दिख रहा है। नए बने 43 ओवरहेड टैंक में से सिर्फ 19 को ही अब तक जलनिगम जलकल को हस्तगत कर सका है। बाकी ओवरहेड टैंक परीक्षण में फेल होने के चलते शोपीस बने हुए हैं। जलकल उन्हें लेने को तैयार नहीं है। साथ ही, परीक्षण के दौरान भूमिगत पाइप लाइनें भी जगह-जगह फट जा रही हैं। इसे भी अब तक हस्तगत नहीं किया जा सका है।
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जलकल का कहना है कि सही तरीके से चालू हालत में होने पर ही पानी टंकियों और पाइप लाइन को अपने जिम्मे लिया जाएगा। बता दें कि जेएनएनयूआरएम के तहत पांच सौ करोड़ की लागत से करीब सात सौ किमी पेयजल पाइप लाइन शहर भर में बिछाई गई है। जनप्रतिनिधियों की शिकायत पर पानी टंकियों के निर्माण में गुणवत्ता और मानक की अनदेखी की शिकायतों की जांच टीएसी से कराई गई थी लेकिन टीएसी की ओर से क्लीन चिट मिलने के बाद अब सवाल उठ रहे हैं कि सब कुछ ठीक है तो फिर इन्हें हैंडओवर का सप्लाई चालू क्यों नहीं कराई जा रही है।
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