वाराणसीः तेजी से घट रहा गंगा का जलस्तर पर दुश्वारियां बरकरार, सिल्ट की समस्या से जूझ रहे निवासी
सामनेघाट और वरुणापार समेत सभी निचले इलाकों में जलस्तर तो कम हो गया है, लेकिन कीचड़ और जलजमाव से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। मारुति नगर में अभी भी कमर तक पानी लगा हुआ है। लोग इसी पानी के बीच से आवाजाही कर रहे हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से घट रहा है, लेकिन दुश्वारियां बढ़ती जा रही हैं। जहां भी गंगा का पानी रुका हुआ है, वहां पर आनेजाने वाले लोगों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा सामनेघाट इलाके के मारुति नगर के लोग परेशान हैं। वहां अभी भी कमर तक पानी लगा हुआ है। लोग इसी पानी के बीच से आवाजाही कर रहे हैं। कई मकानों से बाढ़ का पानी नहीं निकल सका है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गंगा का जलस्तर चार सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से कम हो रहा है। शाम छह बजे गंगा का जलस्तर 67.03 मीटर दर्ज किया गया। वहीं, सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 67.35 मीटर था। बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोग सिल्ट की समस्या से जूझ रहे हैं।
मारुति नगर कॉलोनी में लोग बाढ़ के पानी से जूझ रहे हैं। हालांकि क्षेत्र में नगर निगम सक्रिय है और साफ सफाई के साथ ही दवाओं का छिड़काव कर रहा है। सामनेघाट, वरुणापार समेत सभी निचले इलाकों में जलस्तर तो कम हो गया है, लेकिन कीचड़ और जलजमाव से संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
बाढ़ पीड़ित बोले, रास्ते में भरा है कीचड़, नहीं मिल रही कोई मदद
नवयुग विद्या मंदिर में शिविर में चार परिवारों ने शरण ले रखी है। लोगों का कहना है कि बाढ़ के पानी से घर की दीवारें जर्जर हो गई हैं। घर में कीचड़ भरा हुआ है वहां जाना खतरे से खाली नहीं है। कई मकान अब भी पानी में हैं। छतों पर परिवार का एक सदस्य सामान की निगरानी करता है बाकी टेंट में रहते हैं।
बाढ़ का पानी घटा, बीमारियों का खतरा बढ़ा
गंगा और वरुणा का जलस्तर तेजी से घट रहा है। बाढ़ का पानी कम होने से लोग राहत महसूस कर रहे हैं। हालांकि, बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। नदी किनारे रहने वाले लोगों के घरों में सिल्ट और गाद जमा होने से लोग उसी रास्ते बाहर जाने को मजबूर हैं। चिकित्सकों के मुताबिक ऐसे समय में चर्म रोग, डेंगू, मलेरिया के साथ ही पेट संबंधी बीमारियां होने की संभावना अधिक रहती है।
लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। गंगा में आई बाढ़ की वजह से कोनिया, राजघाट, अस्सी, लंका, सामनेघाट के साथ ही वरुणापार के कई इलाकों में लोगों के घर की पहली मंजिल पूरी तरह पानी में डूब गई थी। करीब सप्ताह भर तक घर छोड़कर लोग बाढ़ राहत शिविर में रहे। अब जब पानी कम हो गया तो लोग घरों को लौट रहे हैं। घर के पास पानी के साथ सिल्ट और गाद भी जमा है।
पेयजल का संकट लगातार बना हुआ है। गंदे पानी के बीच से गुजरने की वजह से लोगों के पैरों में खुजली, दाने की समस्या हो रही है। साथ ही मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की ओर से जल्द से जल्द कालोनियों के पास सफाई, दवा के छिड़काव का दावा किया जा रहा है। अगर जल्द समस्या दूर नहीं हुई तो परेशानी बढ़ सकती है।