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लंका के दरवाजे पर युद्ध ने दी दस्तक, राम की सेना ने किया समुद्र पार
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बांधि सेतु अति सुदृढ़ बनावा, देखि कृपानिधि के मन भावा। चली सेन कछु बरनि न जाई, गर्जहिं मर्कट भट समुदाई। अर्थात नल-नील ने सेतु बांधकर उसे बहुत मजबूत बनाया। समुद्र पर सेतु निर्माण पूर्ण होने पर कृपानिधान श्री रामजी के मन को बहुत अच्छा लगा। योद्धा वानर गरजते हुए लंका पहुंचते हैं। बुधवार को श्री गोस्वामी तुलसीदास रामलीला समिति की ओर से सेतुबंध, सुबेल गिरी की झांकी, रामेश्वर महादेव की स्थापना और अंगद रावण संवाद की लीला का मंचन हुआ।
बुधवार को लीला के दौरान लंका पर चढ़ाई के लिए श्रीराम की सेना अब तैयार हो चुकी है। जिसके लिए समुद्र पार करना जरूरी है। श्रीराम समुद्र से कहते हैं लेकिन समुद्र देवता के मना करने पर वे प्रत्यंचा चढ़ाते हैं, जिसके बाद समुद्र देव मान जाते हैं और भगवान राम को उनकी सेना में शामिल नल और नील के बारे में जानकारी देते हैं। जिसके बाद नल-नील सहित पूरी वानरी सेना समुद्र पर पुल बनाने में जुट जाती है। पुल बनने के बाद श्रीराम लंका पर चढ़ाई करने के लिए वानरों को साथ लेकर चल पड़े। यह समाचार जब लंका में रावण का दूत उसे बताता है तो वह अपने मंत्रियों से विचार विमर्श करता है, तभी वहां विभीषण पहुंचते हैं और रावण को समझाते हैं कि राम से बैर लेना ठीक नहीं। जिसके बाद रावण उन्हें लंका से बाहर निकाल देता है। विभीषण राम की शरण में चले जाते हैं। सेतु बनने के बाद श्रीराम भगवान शिव की स्थापना करते हैं और कहते हैं कि शिव से ज्यादा उन्हें कोई प्यारा नहीं हैं। जो मेरे द्वारा स्थापित रामेश्वरम महादेव का दर्शन करेगा वह परम धाम को प्राप्त होगा। वहीं चित्रकूट रामलीला में रामेश्वर पूजन और सुबेल गिरी की झांकी सजाई गई।
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बुधवार को लीला के दौरान लंका पर चढ़ाई के लिए श्रीराम की सेना अब तैयार हो चुकी है। जिसके लिए समुद्र पार करना जरूरी है। श्रीराम समुद्र से कहते हैं लेकिन समुद्र देवता के मना करने पर वे प्रत्यंचा चढ़ाते हैं, जिसके बाद समुद्र देव मान जाते हैं और भगवान राम को उनकी सेना में शामिल नल और नील के बारे में जानकारी देते हैं। जिसके बाद नल-नील सहित पूरी वानरी सेना समुद्र पर पुल बनाने में जुट जाती है। पुल बनने के बाद श्रीराम लंका पर चढ़ाई करने के लिए वानरों को साथ लेकर चल पड़े। यह समाचार जब लंका में रावण का दूत उसे बताता है तो वह अपने मंत्रियों से विचार विमर्श करता है, तभी वहां विभीषण पहुंचते हैं और रावण को समझाते हैं कि राम से बैर लेना ठीक नहीं। जिसके बाद रावण उन्हें लंका से बाहर निकाल देता है। विभीषण राम की शरण में चले जाते हैं। सेतु बनने के बाद श्रीराम भगवान शिव की स्थापना करते हैं और कहते हैं कि शिव से ज्यादा उन्हें कोई प्यारा नहीं हैं। जो मेरे द्वारा स्थापित रामेश्वरम महादेव का दर्शन करेगा वह परम धाम को प्राप्त होगा। वहीं चित्रकूट रामलीला में रामेश्वर पूजन और सुबेल गिरी की झांकी सजाई गई।
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