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काशी में हाईटेक बाबा: हैलो-हैलो... नारायण यजमान को लेकर पिशाचमोचन आइए, वॉकी-टॉकी पर गूंज रहे ये संदेश

Tue, 16 Sep 2025 07:39 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: प्रगति चंद Updated Tue, 16 Sep 2025 07:39 PM IST
सार

काशी के गयातीर्थ की मान्यता वाले पिशाचमोचन तीर्थ पर अध्यात्म के साथ तकनीक का भी संगम हो रहा है। यजमानों को वॉकी-टाॉकी से जोड़ रहे हैं। 

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walkie-talkie messages given to devotees at Pishachmochan Tirtha in varanasi
पिशाचमोचन पर वॉकीटॉकी के साथ पुरोहित। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हैलो-हैलो... नारायण यजमान को लेकर पिशाचमोचन आइए। हैलो-हैलो आशीष कुंड पर गंदगी है इसे जल्दी साफ करवाइए...। पिशाचमोचन तीर्थ पर वॉकी-टॉकी पर कुछ ऐसे ही संदेश श्रद्धालुओं के बीच गूंज रहे हैं। पहली बार आने वाले श्रद्धालुओं को इससे हैरत भी हो रही है। तीर्थ पुरोहित जहां पुरखों को श्राद्ध और तर्पण से मोक्ष दिला रहे हैं, वहीं यजमानों को वॉकी-टॉकी के जरिये सही पते पर भी पहुंचा रहे हैं। काशी के गयातीर्थ की मान्यता वाले पिशाचमोचन तीर्थ पर अध्यात्म के साथ तकनीक का भी संगम हो रहा है। 

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पिशाचमोचन कुंड से लेकर लहुराबीर तक वायरलेस सेट लिए तीर्थ पुरोहित नजर आ रहे हैं। पिशाचमोचन तीर्थ के महंत और तीर्थ पुरोहित की यह अब मुहर भी बन चुकी है। बाहर से आने वाले श्रद्धालु अब अपने तीर्थ पुरोहित की पहचान वॉकी-टॉकी से कर रहे हैं।
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पुरोहित नीरज पांडेय ने बताया कि पितृपक्ष के दौरान भीड़ आती है तो मोबाइल निकालने और कॉल लगाने में दिक्कत होती थी। कोई यात्री अगर फंस गया तो बार-बार काॅल करने में परेशानी होती थी और यात्री भी परेशान होते थे। 
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अब वॉकी-टॉकी पर एक बार संदेश जारी होने के बाद कर्मचारियों को एक बार में संदेश मिल जाता है। पिशाचमोचन के क्षेत्र में कहीं भी यात्री को दिक्कत न हो इसके लिए वायरलेस सेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस समय छह से आठ वायरलेस सेट हैं। इसकी रेंज पिशाचमोचन से लहुराबीर क्षेत्र तक है। हमारे जितने भी कर्मचारी हैं उनको वॉकी-टॉकी के जरिये जरूरी सूचना प्रसारित कर देते हैं। 

श्राद्ध और तर्पण के लिए आने वाले यात्रियों को सही समय और सही जगह पहुंचाने के लिए हम लोग वॉकी टॉकी का इस्तेमाल करते हैं। करीब तीन साल से हम वायरलेस का इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर हम लोगों को किसी तीर्थ पुरोहित या सेवादार को बुलाना है तो पहले उसका नंबर ढूंढना पड़ता था। फिर नंबर डायल करने के बाद नेटवर्क की समस्या रहती थी।

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