विंध्यधाम: होटलों व धर्मशालाओं की बुकिंग फुल, नववर्ष की पूर्व संध्या पर श्रद्धालुओं का डेरा
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नव वर्ष की पूर्व संध्या पर विंध्याचल स्थित कई प्रमुख होटलों और धर्मशालाओं में मंगलवार की देर शाम तक फुल हो गए। मनचाहे स्थान पर लोगों को जगह नहीं मिली। जिसके लिए दूर-दराज से आए श्रद्धालु देर रात तक अच्छी जगह के लिए तलाशते रहे।
कड़ाके की ठंड के बीच आस्थाधाम में मंगलवार को दोपहर बाद ही श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। रेलवे व विभिन्न बस स्टैंडों पर उतरने वाले श्रद्धालु ठिकाने की तलाश में लग गए। देर शाम तक आस्थाधाम के प्रमुख होटल और धर्मशाला नववर्ष की पूर्व संध्या पर ही भर गए।
उनके लिए जगह ही नहीं बची जिससे वे मनचाहे स्थान पर जगह न मिलने मायूस रहे। कुछ श्रद्धालुओं ने तो पहले ही आनलाइन और फोन पर अपने मनचाहे स्थान पर होटल और धर्मशालाओं में कमरा बुक करा लिया था। ज्यादातर श्रद्धालु मंदिर के आसपास ही कमरा सुरक्षित कराने की होड़ मची रही।
तीर्थ पुरोहितों से संपर्क करते रहे भक्त
आस्थाधाम में नववर्ष की पूर्व संध्या पर विभिन्न होटल और धर्मशालाओं में मंगलवार को डेरा डाले श्रद्धालु मोबाइल पर अपने तीर्थपुरोहितों के संपर्क में बने रहे। नव वर्ष पर मंगला आरती में शामिल होने के साथ ही सबसे पहले मां विंध्यवासिनी के दर्शन-पूजन व चरण-स्पर्श के लिए प्रयासरत दिखे।
अलाव की व्यवस्था न होने से भक्त रहे परेशान
श्रद्धालु शीतलहर में ठंड से कांपते रहे, क्योंकि प्रमुख चौराहों और तिराहों पर पर्याप्त संख्या में अलाव की व्यवस्था नहीं किए गए थे। रेलवे स्टेशन व प्राइवेट वाहन स्टैंडों के आसपास वाहन से उतरने वाले भक्त कड़ाके की ठंड में ठिठुर रहे थे।
नगर पालिका प्रशासन की ओर से डेढ़ दर्जन स्थानों पर अलाव जलवाए जाने की बातें कहीं गई थी। बावजूद इसके नाममात्र के लिए कुछ स्थानों पर अलाव जलाकर कोरम पूरा कर दिया गया। वाहन स्टैंडो से लेकर धाम की ओर जाने वाली विभिन्न गलियों व गंगाघाटों के आसपास लोग ठंड से परेशान रहे। जिससे स्थानीय बुद्धजीवियों और श्रद्धालुओं में रोष व्याप्त रहा।
गर्भगृह के लिए चांदी का चद्दर अर्पित
मन्नत पूर्ण होने पर दिल्ली से आए एक यजमान ने श्री विंध्य पंडा समाज पूर्व अध्यक्ष पंडित राजन पाठक की प्रेरणा पर सोमवार को मां विंध्यवासिनी के गर्भगृह में 11 लाख की लागत से चांदी का चद्दर मढ़वाया।
चरण स्पर्श रहा प्रतिबंधित, आज भी रहेगा वर्जित
विंध्याचल में उमड़ने वाली भीड़ और उनकी सुविधा को देखते हुए नववर्ष की पूर्व संध्या पर ही श्री विंध्य पंडा समाज के पदाधिकारी गर्भगृह में मुस्तैद रहे। वहीं मंगलवार से एक जनवरी रात नौ बजे तक मां विंध्यवासिनी का चरण-स्पर्श प्रतिबंधित कर दिया गया। इतना ही नहीं निकास द्वार से किसी भी दशा में प्रवेश वर्जित रहेगा।
श्री विंध्य पंडा समाज के पदाधिकारियों ने कहा नववर्ष पर मंगला आरती के पश्चात चार बजे भोर से लेकर रात्रि नौ बजे तक उमड़े भीड़ को देखते हुए कोई भी पुरोहित अपने साथ श्रद्धालुओं को लेकर निकास द्वार से गर्भगृह में प्रवेश कदापि नहीं करेगा।