लोकसभा चुनाव 2019 : मऊ के दो गांवों ने किया बहिष्कार, ग्रामीणों ने कहा- 'रोड नहीं तो वोट नहीं'
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उत्तर प्रदेश में मऊ के दो गांवों में लोकसभा चुनाव 2019 के पहले वोट का बहिष्कार कर दिया है। ग्रामीणों ने एक स्वर में कहा है कि 'रोड नहीं तो वोट नहीं'। साथ ही वोट फॉर नोटा के समर्थन में लोगों ने जुलूस भी निकाला है।
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर परदहां ब्लाक के सनेगपुर गांव में आने जाने के लिए फोरलेन पर चढ़ने के लिए ढाला की मांग को लेकर रविवार को गांव 200 से अधिक महिलाओं और पुरुषों ने रविवार को राजनीतिक दलों के नेताओं और प्रशासनिक की उदासीनता नेताओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। अपनी मांगों को लेकर ग्रामीणों ने नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विरोध प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव में सामूहिक रूप से नोटा का बटन दबाने का एलान किया। प्रधान प्रतिनिधि राजेंद्र मौर्य कहा कि एनएचएआई(NHAI) द्वारा गांव में आने जाने के लिए फोरलेन पर ढलान कर के रास्ता बनाया गया था। लेकिन एक महीने पहले एनएचएआई द्वारा गांव को जोड़ने वाले रास्ते को तोड़ दिया गया। जिससे गांव में आने जाने का रास्ता खत्म हो गया।
अब गांव के लोगों को दस किलोमीटर घूम कर सहरोज और कोपागंज होते हुए जाना पड़ता है। लोगों का कहना है कि जब तक गांव में आने जाने के लिए रास्ते का फिर से निर्माण नहीं कराया जाता तब तक हम चुनाव का बहिष्कार करेंगें और इस बार के लोकसभा चुनाव में नोटा का बटन दबाएंगे। बता दें कि गांव में 500 परिवारों में लगभग 2 हजार मतदान हैं। जिन्होंने इस बार लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
‘वोट फॉर नोटा’ के संदेश के साथ सड़क पर उतरे ग्रामीण
सांसद हरिनारायन राजभर के द्वारा गोद लिए गए आदर्श गांव डुमरावं के पश्चिमपुरा के लोगों ने 22 मार्च को जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की उदासीनता खिलाफ मोर्चा खोल दिया। गांव के लोगों का कहना था कि यह गांव की राजनीतिक दलों की उपेक्षाओं का शिकार हुआ है।
इसी गांव के रहने वाले महान कवि पं. श्याम नारायण पांडेय ने वीर रस की महान कृति 'हल्दीघाट' की रचना करके समूचे भारत में इस गांव का नाम रोशन किया था। ग्रामीण प्रेमनाथ सिंह ने कहा कि जब तक गांव में सड़क और नाली का निर्माण नहीं होगा तब तक चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा और इस बार ‘नोटा’ का बटन दबाया जाएगा।
गांव में विकास कार्य न होने पर लोगों में नाराजगी है, ग्रामीणों को आने जाने के लिए सड़क तक नसीब नहीं हो पाई है। पश्चिमपुरा के 40 परिवारों ने चुनाव का बहिष्कार करने और नोटा बटन दबाने का निर्णय लिया हैं।