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Varanasi: शिवलिंग की आकृति का केक काटे जाने का वीडियो वायरल, सनातन भारत संस्था ने की कार्रवाई की मांग

Fri, 18 Nov 2022 10:07 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 18 Nov 2022 10:07 PM IST
सार

काशी के कोतवाल बाबा कालभैरव का जन्मदिन भैरव अष्टमी (गुरुवार) पर गुरुवार को वाराणसी के कई मंदिरों में मनाया गया। अब ऐसे ही एक आयोजन का वीडियो वायरल होने से हंगामा हो गया है। 

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Video of cutting of Shivling shaped cake goes viral in varanasi Sanatan Bharat Sanstha demands action
वायरल वीडियो की स्क्रीनशॉट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोशल मीडिया पर शिवलिंग की आकृति का केक काटे जाने का वीडियो वायरल होने के बाद सनातन धर्मियों में आक्रोश है। यह वीडियो बटुक भैरव मंदिर का बताया जा रहा है। वहीं काल भैरव मंदिर का भी एक वीडियो वायरल हुआ जो आपत्तिजनक बताया जा रहा है।  

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श्री काशी विद्वत कर्मकांड परिषद, ब्राह्मण महासभा, वेद पारायण केंद्र और सनातन भारत ने वीडियो में दिख रहे कृत्य को धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ बताते हुए आक्रोश जताया है। सनातन भारत संस्था के महामंत्री राजन गुप्त ने कहा कि इससे हिंदू आस्थावानों को ठेस पहुंची है।
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संस्था के पदाधिकारियों ने भेलूपुर पुलिस से संपर्क कर अनुरोध किया है कि ऐसे लोगों के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करें। कहा कि सनातनी धर्म शास्त्रों में शिव निर्माल्य का उपयोग करना तक वर्जित है। ऐसे में शिवलिंग की आकृति का केक बनाना और उसे प्रसाद के रूप में बांट देना उचित नहीं है।

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कालभैरव मंदिर के महंत परिवार के राजेश मिश्र ने बताया शिवजी ने ब्रह्मा के अहंकार को नष्ट करने के लिए भैरव का रौद्र रूप धारण किया था। उन्होंने गर्भ से जन्म नहीं लिया था तो उनका जन्मोत्सव मनाने की कोई परंपरा नहीं है। उनके प्राकट्योत्सव पर जप, तप और आराधना करने का विधान है। चाहे काल भैरव मंदिर में हुआ हो या बटुक भैरव मंदिर में जो हुआ वह बेहद निंदनीय है।

बटुक भैरव मंदिर के महंत परिवार के राकेश पुरी ने बताया कि बटुक भैरव का वायरल वीडियो आठ साल पुराना है, जिसे किसी ने अब डाला है। श्री काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा कि सनातन धर्म को इवेंट ना बनाएं। भगवान शिव के रौद्र रूप हैं बाबा कालभैरव, उनकी पूजन और प्राकट्योत्सव का अपना विधान है। प्रचार प्रसार के लिए इसे विकृत करना उचित नहीं है। 

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