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Vermilion Tree: सिंदूर के पौधे की बढ़ी मांग, 30 दिन में बिके 70 हजार; जानें- किस बीमारी के इलाज में है कारगर

Sun, 29 Jun 2025 11:43 AM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 29 Jun 2025 11:43 AM IST
सार

वाराणसी के वन विभाग और नर्सरियों में सिंदूर के पाैधों की डिमांड कुछ सप्ताह से बढ़ गई है। यह कई बीमारियों का भी इलाज करता है लेकिन तरीका मालूम होना चाहिए। पीएम मोदी के ऑपरेशन सिंदूर से इसकी मांग बढ़ गई है।

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Vermilion Tree Demand increased 70 thousand sold in 30 days in varanasi disease is effective in treating
नर्सरी में तैयार सिंदूर के पाैधे। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के बाद सिंदूर के पौधों की मांग बढ़ गई है। पिछले 30 दिनों में लगभग 70,000 पौधे बिक चुके हैं। महिलाएं और पूर्व सैनिक इन पौधों को खरीदने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं।

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विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने सिंदूर के पौधे को पर्यावरण संरक्षण और नारी शक्ति का प्रतीक बताया था। इसके अलावा पहलगाम हमले के बाद भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर के जरिये पाकिस्तान को दिए गए जवाब ने भी इस पौधे के प्रति लोगों में भावनात्मक जुड़ाव पैदा किया है।
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सिंदूर का पौधा वन विभाग में सात रुपये में उपलब्ध है, जबकि निजी नर्सरियों में इसकी कीमत 20 रुपये तक है। बढ़ती मांग को देखते हुए नर्सरियां अब पौधे तैयार कर रही हैं। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ एक विशेष सांस्कृतिक और राष्ट्रीय भावना को भी बढ़ावा दे रही है।

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ऑपरेशन सिंदूर के बाद पता चली खासियत : वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि सिंदूर सदियों से भारतीय परंपरा में महिलाओं के लिए गर्व का प्रतीक रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद लोगों को इसकी खासियत पता चली है। यह पौधा बंजर जमीन पर भी उग जाता है और ज्यादा पानी और खाद की जरूरत नहीं होती है। इसके बीज, पत्ते, फल और छाल को कई बीमारियों में इस्तेमाल किया जाता है। 

स्किन इन्फेक्शन के लिए कारगर दवाई : बीएचयू के आयुर्वेद संकाय के प्रोफेसर बी राम ने बताया सिंदूर के पौधे, पत्ती और बीज से कई बीमारियों का इलाज किया जाता है। स्किन इन्फेक्शन में ये काफी कारगर है। कोढ़, झाइयां, फुंसियां, खुजली, दाद से पीड़ित मरीजों को इससे फायदा मिलता है। इसका तेल पुराने घाव को साफ करने के काम आता है। 

सिंदूर के बीज, पत्ते या छाल का इस्तेमाल कब्ज, गैस, पेट के कीड़े, अल्सर, दस्त और पेट से संबंधित अन्य बीमारियों के लिए भी किया जाता है। इसके साथ ही जुकाम, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों और गले की बीमारियों में भी इसके पत्तों और फूलों का रस या अर्क फायदेमंद होता है। वहीं टायफाॅयड और दिमागी बुखार के लिए इसकी छाल का इस्तेमाल किया जाता है। इसके पत्ते और फूलों के अर्क में दर्द निवारक गुण भी होते हैं। 

एंटीबायोटिक की तरह काम करता है सिंदूर
वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि सिंदूर का पेड़ 10 से 15 फीट ऊंचा होता है। इसकी गोलाई तीन से चार फीट से ज्यादा नहीं होती है। सिंदूर के पौधे का उपयोग एंटीबायोटिक के रूप में भी किया जाता है। आयुर्वेद की रक्त शोधन दवाइयों में इस पेड़ के तने की छाल का उपयोग किया जाता है। चोट लगने पर भी इसके तने की छाल को घिसकर लेप लगाया जाता है। यह पौधा भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ाता है।


वन विभाग भी इस बार सिंदूर के पौधे लगाएगा। सिंदूर के पौधे लगाने के साथ ही पौधरोपण की शुरुआत होगी। सिंदूर के पौधों की मांग बढ़ी है। - स्वाति श्रीवास्वतव, प्रभागीय वनाधिकारी वाराणसी।

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