देववाणी का दायरा अब सात समंदर पार तक: अमेरिका में गूंजेंगे वेद मंत्र, खुलेगा ऑनलाइन संस्कृत शिक्षण केंद्र
वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय ने अमेरिका में ऑनलाइन संस्कृत शिक्षण केंद्र खोलने की तैयारी पूरी कर ली है। गुरुवार को कार्यपरिषद की बैठक में ऑनलाइन संस्कृत शिक्षण को मंजूरी दे दी गई।
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देववाणी संस्कृत का दायरा अब सात समंदर पार तक होगा। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के ऑनलाइन संस्कृत शिक्षण केंद्र के जरिये अब विदेशी भी प्राच्य विद्या का ज्ञान ले सकेंगे। विश्वविद्यालय ने अमेरिका में ऑनलाइन संस्कृत शिक्षण केंद्र खोलने की तैयारी पूरी कर ली है।
गुरुवार को कार्यपरिषद की बैठक में ऑनलाइन संस्कृत शिक्षण को मंजूरी दे दी गई। कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में कार्यपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय हुए। बैठक में उत्तर प्रदेश के अंदर 8 संस्कृत महाविद्यालय और बाहर तीन संस्कृत महाविद्यालयों को नई मान्यता देने की स्वीकृति दी गई।
दो चरणों में होगी अध्यापकों की चयन प्रक्रिया
कुलपति ने बताया कि महाविद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति के संबंध में दो चरणों में चयन प्रक्रिया होगी। प्रथम चरण की परीक्षा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी कराएगी। मेरिट के आधार पर हर महाविद्यालय में पदों के हिसाब से साक्षात्कार होगा। साक्षात्कार में कुलपति या नामित आचार्य और दो या तीन विशेषज्ञ होंगे। कार्यपरिषद ने इसे स्वीकृति दे दी है।
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सरस्वती सुषमा पत्रिक का नियमित प्रकाशन कराने, अप्रवासी भारतीय रमन तिवारी की ओर से छात्रावास की मरम्मत और पंच मंदिरों के पुनरुद्धार पर सहमति बनी। तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों के सापेक्ष तकनीक पदों पर आउटसोर्सिंग से नियुक्ति करने पर भी कार्यपरिषद ने सहमति दे दी है।
इन्हें मिली प्रोन्नति
डॉ. विजय कुमार पांडेय और डॉ. दिनेश कुमार गर्ग को कैरियर एडवांसमेंट योजना के तहत एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर और डॉ. विशाखा शुक्ला को प्रोन्नति वेतनमान में प्रोन्नत किया गया। इस दौरान स्वामी रामभद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय चित्रकूट के कुलपति प्रो. योगेश चंद्र दुबे, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सीमा सिंह आदि मौजूद रहे।
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