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वीबी-जी राम जी: अधिनियम के विरोध में युवाओं की ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’, अंबेडकर प्रतिमा पर शुरू किया उपवास
Tue, 17 Feb 2026 06:25 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Tue, 17 Feb 2026 06:25 PM IST
सार
विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम के विरोध में युवाओं ने ‘मनरेगा बचाओ यात्रा' शुरू की। वाराणसी के अंबेडकर प्रतिमा पर उपवास शुरू किया
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यात्रा में शामिल लोग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मनरेगा कानून को बदलकर VB-G RAM G के विरोध में निकाली जा रही युवा गांधीवादियों की ‘मनरेगा बचाओ यात्रा’ आज 17 भारत माता मंदिर से शुरू होकर बिस्मिल्लाह खां की मज़ार पहुंचीं। वहां से मलदहिया स्थित सरदार पटेल चौक, लहुराबीर पर आज़ाद पार्क से वरुणा पुल होते हुए कचहरी के अम्बेडकर पार्क तक पहुंची। फिर एकदिवसीय उपवास शुरू किया गया।
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17 जनवरी को चौरी-चौरा से शुरू हुई मनरेगा बचाओ साइकिल यात्रा जो गोरखपुर, देवरिया, बलिया, मऊ, ग़ाज़ीपुर होते हुए बनारस पहुँच चुकी है। एक महीने तक यूपी के गांव, गली, बाजारों से गुजरी इस यात्रा ने मोदी सरकार द्वारा मनरेगा क़ानून पर हमले पर आम लोगों से संवाद किया। गांव के खेतिहर मजदूरों ख़ासकर महिलाओं ने बताया कि मनरेगा क़ानून आने के बाद उनको रोजगार की गारंटी मिली, जातिगत शोषण और महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा में कमी आयी। आज जब सरकार इस कानून को खत्म कर रही है तब एक बड़ी आबादी दशकों पहले की स्थिति में जाने को मजबूर होगी।
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यात्रा में सामाजिक कार्यकर्ता एकता शेखर ने कहा कि VB-G RAM G जैसे मजदूर विरोधी कानून लाकर सरकार कॉर्पोरेट और शहर के मुट्ठीभर अमीरों की मदद कर रही है। मनरेगा को खत्म करने से मजदूरों का पलायन बढ़ेगा और वह कम पैसों में शहरों में काम करने पर मजबूर होंगे। सामाजिक कार्यकर्ता नंदलाल जी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार द्वारा लाया गया नया कानून गांव, गरीब और गांधी पर हमला है।सरकार मनरेगा क़ानून को खत्म कर रही है। ग्रामीण मजदूरों को उनके गाँव में ही एक निश्चित आय की गारंटी ने सशक्त किया था, क़ानून में बदलाव करने से गरीब, पिछड़े वर्ग, दलित, भूमिहीन मजदूर और महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित होंगी।
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भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रभारी मनीष शर्मा भी इस यात्रा में शामिल हुए। यात्रा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह शर्मनाक है कि प्रधानमंत्री मोदी बड़े कॉर्पोरेट घरानों और अमेरिका के दबाव में उनके लिए काम कर रहे हैं। कृषि कानून हो, 4 श्रम कोड हो, मनरेगा पर हमला हो या हाल ही में अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील, यह जनता के खिलाफ देश को कमजोर करने वाली नीतियाँ हैं। जनता का वोट चुराकर बनी सरकार कभी जनता के हित में कानून नहीं बना सकती है।
बनारस के बुनकर नेता अहमद जी ने कहा मोदी सरकार पूँजीपतियों के लाखों करोड़ों रुपये के कर्ज माफ़ कर रही है और कौड़ियों के भाव अडानी को देश की सरकारी संपत्तियां नीलाम कर रही है, उसी कड़ी में यह मज़दूर विरोधी सरकार मनरेगा को ख़त्म करके कॉर्पोरेट को सस्ता श्रम उपलब्ध कराने का रास्ता खोल रही है।
यात्रा की प्रमुख मांगें:
- काम के संवैधानिक अधिकार को बहाल किया जाए
- मजदूर विरोधी कानून VB-G RAM G को तुरंत वापस लिया जाए
- मनरेगा की न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन की जाए।