{"_id":"5a38b4ee4f1c1b0d698c2eb0","slug":"varuna-corridor-action-against-soil-of-21-crore-file","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"वरुणा कॉरिडोरः कार्रवाई की तह में 21 करोड़ की मिट्टी, कई बड़े चेहरे होंगे बेनकाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
वरुणा कॉरिडोरः कार्रवाई की तह में 21 करोड़ की मिट्टी, कई बड़े चेहरे होंगे बेनकाब
amarujala.com- Written by: गुंजन श्रीवास्तव
Updated Tue, 19 Dec 2017 12:27 PM IST
विज्ञापन
वरुणा कॉरिडोर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
वरुणा कॉरिडोर में भ्रष्टाचार बरदाश्त नहीं करने के योगी सरकार के स्पष्ट संकेत और एक के बाद एक तीन इंजीनियरों के निलंबन के बीच एक अलग ही कहानी सामने आ रही है। कॉरिडोर से जुड़े मुख्य अभियंता (सोन) के अलावा अधीक्षण अभियंता और अधिशासी अभियंता अब तक निलंबित किए जा चुके हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो इस कार्रवाई की तह में 21 करोड़ की मिट्टी के भुगतान की फाइल है।
यह फाइल यूपीपीसीएल ने तैयार की थी और इसे मंजूरी के लिए मुख्य अभियंता (सोन) के पास भेजा था। निलंबित किए गए मुख्य अभियंता (सोन) ने बिना सत्यापन के इसके भुगतान की मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। कॉरिडोर से जुड़े सूत्रों के मुताबिक वरुणा किनारे कॉरिडोर बनाने के लिए यह मिट्टी बाहर से लाकर किनारों पर डाली जा रही है।
10.3 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के दोनों किनारों पर मिट्टी डालने के लिए यूपीपीसीएल ने फाइल बनवाई। करीब 21 करोड़ रुपये की यह फाइल भुगतान के लिए मुख्य अभियंता (सोन) सुरेश चंद्र शर्मा के पास भेजी गई। मुख्य अभियंता ने प्रति किलोमीटर मिट्टी डालने का खर्च का एक करोड़ रुपये से अधिक होने के चलते भुगतान से पहले इसका सत्यापन कराने का निर्णय लिया।
विज्ञापन
सत्यापन की जिम्मेदारी अधिशासी अभियंता विजय कुमार कुशवाहा को दी। इसी बीच, प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेश चंद्रा कॉरिडोर निर्माण का जायजा लेने यहां आए तो यूपीपीसीएल ने भुगतान न होने और फाइल मुख्य अभियंता के पास लटके होने की शिकायत उनसे की। इस पर मुख्य अभियंता को एक हफ्ते में प्रकरण का निबटारा करने का निर्देश देकर प्रमुख सचिव लौट गए।
तब तक कुशवाहा के सत्यापन रिपोर्ट नहीं देने पर मुख्य अभियंता ने उन्हें रिमाइंडर भेजा। इसके बाद भी जब रिपोर्ट नहीं मिली तो फिर रिमाइंडर दिया। बार-बार रिमाइंडर के बाद भी सत्यापन रिपोर्ट न मिलने पर मुख्य अभियंता ने शासन से कुशवाहा के निलंबन की संस्तुति कर दी। साथ ही, सत्यापन के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया।
विज्ञापन
यह फाइल यूपीपीसीएल ने तैयार की थी और इसे मंजूरी के लिए मुख्य अभियंता (सोन) के पास भेजा था। निलंबित किए गए मुख्य अभियंता (सोन) ने बिना सत्यापन के इसके भुगतान की मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। कॉरिडोर से जुड़े सूत्रों के मुताबिक वरुणा किनारे कॉरिडोर बनाने के लिए यह मिट्टी बाहर से लाकर किनारों पर डाली जा रही है।
विज्ञापन
10.3 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के दोनों किनारों पर मिट्टी डालने के लिए यूपीपीसीएल ने फाइल बनवाई। करीब 21 करोड़ रुपये की यह फाइल भुगतान के लिए मुख्य अभियंता (सोन) सुरेश चंद्र शर्मा के पास भेजी गई। मुख्य अभियंता ने प्रति किलोमीटर मिट्टी डालने का खर्च का एक करोड़ रुपये से अधिक होने के चलते भुगतान से पहले इसका सत्यापन कराने का निर्णय लिया।
विज्ञापन
सत्यापन की जिम्मेदारी अधिशासी अभियंता विजय कुमार कुशवाहा को दी। इसी बीच, प्रमुख सचिव सिंचाई सुरेश चंद्रा कॉरिडोर निर्माण का जायजा लेने यहां आए तो यूपीपीसीएल ने भुगतान न होने और फाइल मुख्य अभियंता के पास लटके होने की शिकायत उनसे की। इस पर मुख्य अभियंता को एक हफ्ते में प्रकरण का निबटारा करने का निर्देश देकर प्रमुख सचिव लौट गए।
तब तक कुशवाहा के सत्यापन रिपोर्ट नहीं देने पर मुख्य अभियंता ने उन्हें रिमाइंडर भेजा। इसके बाद भी जब रिपोर्ट नहीं मिली तो फिर रिमाइंडर दिया। बार-बार रिमाइंडर के बाद भी सत्यापन रिपोर्ट न मिलने पर मुख्य अभियंता ने शासन से कुशवाहा के निलंबन की संस्तुति कर दी। साथ ही, सत्यापन के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया।
शिवसेना ने की होटलों पर कार्रवाई की मांग
वरुणा को 35 मीटर की चौड़ाई में सीमित किया गया
- फोटो : अमर उजाला
इस पर यूपीपीसीएल ने फिर भुगतान लटकने की शिकायत शासन स्तर पर की। मामला सिंचाई मंत्री और प्रमुख सचिव तक पहुंचा। मुख्य अभियंता की ओर से गठित कमेटी की रिपोर्ट अभी आई भी नहीं थी कि उनके निलंबन का फरमान जारी कर दिया गया। उसके बाद अधीक्षण अभियंता आलोक जैन और अधिशासी अभियंता विजय कुमार कुशवाहा को भी निलंबित कर दिया गया।
मुख्य अभियंता के बाद कॉरिडोर की अहम जिम्मेदारियां आलोक जैन के ही पास थीं। सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से पूरे मामले की गहराई से जांच कराई जाए तो कई बड़े चेहरे बेनकाब होंगे और गोलमाल भी सामने आएगा। मिट्टी से जुड़ी की फाइल को लेकर सिंचाई विभाग और यूपीपीसीएल के अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
वरुणा किनारे होटलों और व्यावसायिक भवनों के अवैध कब्जे और उनका सीवेज सीधे वरुणा नदी में गिरने के मामले पर शिवसेना ने प्रशासन और वीडीए से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। शिव सेना के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को इसके लिए कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण को ज्ञापन भी सौंपा। नेतृत्व कर रहे उप प्रमुख अजय चौबे ने कहा कि वरुणा को बचाने के लिए जरूरी है कि अवैध निर्माण हटाए जाएं और हर हाल में सीवेज का गिरना रोका जाए। सभी बड़े अवैध निर्माणों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। ज्ञापन देने वालों में संतोष सेठ, धनंजय त्रिपाठी, रमेश बधावन, बाबू विश्वकर्मा आदि शामिल रहे।
योजना एक नजर में
201 करोड़ की योजना
125 करोड़ रुपये स्वीकृत
76 करोड़ रुपये शासन के पास
10.3 किमी डीएम बंगले से सराय मोहाना तक कॉरिडोर का निर्माण
मुख्य अभियंता के बाद कॉरिडोर की अहम जिम्मेदारियां आलोक जैन के ही पास थीं। सूत्रों का दावा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से पूरे मामले की गहराई से जांच कराई जाए तो कई बड़े चेहरे बेनकाब होंगे और गोलमाल भी सामने आएगा। मिट्टी से जुड़ी की फाइल को लेकर सिंचाई विभाग और यूपीपीसीएल के अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
वरुणा किनारे होटलों और व्यावसायिक भवनों के अवैध कब्जे और उनका सीवेज सीधे वरुणा नदी में गिरने के मामले पर शिवसेना ने प्रशासन और वीडीए से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। शिव सेना के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को इसके लिए कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण को ज्ञापन भी सौंपा। नेतृत्व कर रहे उप प्रमुख अजय चौबे ने कहा कि वरुणा को बचाने के लिए जरूरी है कि अवैध निर्माण हटाए जाएं और हर हाल में सीवेज का गिरना रोका जाए। सभी बड़े अवैध निर्माणों पर तत्काल कार्रवाई की जाए। ज्ञापन देने वालों में संतोष सेठ, धनंजय त्रिपाठी, रमेश बधावन, बाबू विश्वकर्मा आदि शामिल रहे।
योजना एक नजर में
201 करोड़ की योजना
125 करोड़ रुपये स्वीकृत
76 करोड़ रुपये शासन के पास
10.3 किमी डीएम बंगले से सराय मोहाना तक कॉरिडोर का निर्माण