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वरुणा पर सर्किल रेट कम करने का शुरू हुआ 'खेल'
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Wed, 18 May 2016 01:31 AM IST
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वरुणा तट पर चल रहा सुंदरीकरण का काम।
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वरुणा नदी किनारे के बाशिंदों के लिए एक चौंकाने वाली खबर है। प्रशासन नदी के तटों पर 100-100 मीटर के भूभाग का सर्र्किल रेट कम करने की कवायद कर रहा है। सर्किल रेट कम करने के पीछे प्रशासन का एक खेल है। अगर प्रशासन को कभी जमीन अधिग्रहीत करनी पड़ी तो उसे कम मुआवजा देना पड़ेगा।
सीएम के ड्रीएम प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई के साथ-साथ किनारे की जमीनों के दाम भी कम होंगे। नदी के समीप की आवासीय और अकृषि भूमि को कृषि भूमि में बदला जाएगा। उधर, वरुणा के दोनों किनारों पर निर्धारित सौ-सौ मीटर के दायरे मेें सर्किल रेट कम होने से सरकार को फायदा यह होगा कि भविष्य में उसे कॉरिडोर या किसी दूसरी योजना के लिए जमीन की आवश्यकता पड़ी तो कम कीमत चुकानी पड़ेगी। इस समय वरुणा किनारे जमीन का सर्किल रेट 10000 से 12000 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। इसे घटाकर तकरीबन 6000 से 8000 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक किया जा सकता है। इससे जिस जमीन की कीमत 50 लाख रुपये होगी, उसकी कीमत घटकर 30 से 35 लाख रुपये हो जाएगी।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए सिंचाई विभाग की ओर से कॉरिडोर की अधिसूचना जारी कराने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अधिसूचना जारी होने के बाद कॉरिडोर के निर्धारित दायरे में जमीन की खरीद-फरोख्त पर लगाम लगेगी। साथ ही, अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त होगा। अधिसूचना जारी होते ही कई तरह के प्रतिबंध लागू हो जाएंगे। निर्धारित क्षेत्र में कोई निर्माण नहीं करा सकेगा। बता दें कि ग्रीन बेल्ट विकसित करने के लिए वीडीए की ओर से नदी के दोनों किनारों पर 50-50 मीटर तक किसी भी तरह के निर्माण पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
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वहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 25 मई को वाराणसी आने की सूचना से वरुणा कॉरिडोर के काम में तेजी आ गई है। मुख्यमंत्री के आगमन का प्रारंभिक प्रोटोकाल जिला प्रशासन के पास आ गया है। मुख्यमंत्री वाराणसी से भदोही भी जाएंगे। इस दौरान वह कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण कर सकते हैं। प्रशासनिक अमला सीएम के आगमन की तैयारी में जुट गया है।
माना जा रहा है कि इस दौरान मुख्यमंत्री अपने ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर की प्रगति का जायजा ले सकते हैं। इसके मद्देनजर कॉरिडोर के कार्यों में तेजी आ गई है। बीते 13 मई को मुख्य सचिव आलोक रंजन ने भी वरुणा कॉरिडोर के कार्यों का निरीक्षण कर अधिकारियों को काम में तेजी लाने की हिदायत दी थी। डीएम राजमणि यादव ने भी वरुणा कॉरिडोर सहित अन्य योजनाओं के कार्यो में तेजी लाने के लिए फरमान जारी किया है। पीडब्ल्यूडी, सेतु निगम, सिंचाई विभाग, नगर निगम सहित अन्य विभाग मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले कार्यक्रम की फाइलें दुरुस्त करने में जुटे हैं।
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सीएम के ड्रीएम प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने की कार्रवाई के साथ-साथ किनारे की जमीनों के दाम भी कम होंगे। नदी के समीप की आवासीय और अकृषि भूमि को कृषि भूमि में बदला जाएगा। उधर, वरुणा के दोनों किनारों पर निर्धारित सौ-सौ मीटर के दायरे मेें सर्किल रेट कम होने से सरकार को फायदा यह होगा कि भविष्य में उसे कॉरिडोर या किसी दूसरी योजना के लिए जमीन की आवश्यकता पड़ी तो कम कीमत चुकानी पड़ेगी। इस समय वरुणा किनारे जमीन का सर्किल रेट 10000 से 12000 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। इसे घटाकर तकरीबन 6000 से 8000 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक किया जा सकता है। इससे जिस जमीन की कीमत 50 लाख रुपये होगी, उसकी कीमत घटकर 30 से 35 लाख रुपये हो जाएगी।
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ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के लिए सिंचाई विभाग की ओर से कॉरिडोर की अधिसूचना जारी कराने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अधिसूचना जारी होने के बाद कॉरिडोर के निर्धारित दायरे में जमीन की खरीद-फरोख्त पर लगाम लगेगी। साथ ही, अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त होगा। अधिसूचना जारी होते ही कई तरह के प्रतिबंध लागू हो जाएंगे। निर्धारित क्षेत्र में कोई निर्माण नहीं करा सकेगा। बता दें कि ग्रीन बेल्ट विकसित करने के लिए वीडीए की ओर से नदी के दोनों किनारों पर 50-50 मीटर तक किसी भी तरह के निर्माण पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
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वहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के 25 मई को वाराणसी आने की सूचना से वरुणा कॉरिडोर के काम में तेजी आ गई है। मुख्यमंत्री के आगमन का प्रारंभिक प्रोटोकाल जिला प्रशासन के पास आ गया है। मुख्यमंत्री वाराणसी से भदोही भी जाएंगे। इस दौरान वह कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण कर सकते हैं। प्रशासनिक अमला सीएम के आगमन की तैयारी में जुट गया है।
माना जा रहा है कि इस दौरान मुख्यमंत्री अपने ड्रीम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर की प्रगति का जायजा ले सकते हैं। इसके मद्देनजर कॉरिडोर के कार्यों में तेजी आ गई है। बीते 13 मई को मुख्य सचिव आलोक रंजन ने भी वरुणा कॉरिडोर के कार्यों का निरीक्षण कर अधिकारियों को काम में तेजी लाने की हिदायत दी थी। डीएम राजमणि यादव ने भी वरुणा कॉरिडोर सहित अन्य योजनाओं के कार्यो में तेजी लाने के लिए फरमान जारी किया है। पीडब्ल्यूडी, सेतु निगम, सिंचाई विभाग, नगर निगम सहित अन्य विभाग मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाले कार्यक्रम की फाइलें दुरुस्त करने में जुटे हैं।