वाराणसी: पछुआ हवाओं ने बदला मौसम, गरज-चमक के बारिश से बढ़ी गलन, ओले भी गिरे
आजमगढ़, वाराणसी और विंध्य मंडल के ज्यादातर जिलों में गुरुवार को दिनभर बादल छाए रहे और तेज हवाएं चलीं। वाराणसी और बलिया में शाम को गरज-चमक के साथ कुछ देर बारिश होने के साथ कुछ इलाकों में ओले भी गिरे।
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वाराणसी सहित पूर्वांचल के जिलों में गुरुवार को अचानक मौसम बदल गया। सुबह हल्की धूप निकली, लेकिन दोपहर होते तेज पछुआ हवाएं चलने लगीं और बादल भी छा गए। जिससे अचानक से ठंड बढ़ गई। शाम को तेज बारिश के कारण गलन बढ़ गई। चंदौली, भदोही और मिर्जापुर में भी बारिश हुई। जबकि आजमगढ़, सोनभद्र और जौनपुर में बूंदाबांदी हुई। वाराणसी और बलिया में शाम को गरज-चमक के साथ कुछ देर बारिश होने के साथ कुछ इलाकों में ओले भी गिरे। अचानक मौसम में हुए बदलाव की वजह से सर्दी एक बार फिर लौट आई है।
मौसम विज्ञानी एसएन पांडेय के अनुसार, जम्मू कश्मीर में पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम बदला है। 6 फरवरी तक नम पछुवा हवा चलने और रुक-रुककर बूंदाबांदी होने के आसार हैं। चंदौली के राज्य कृषि मौसम केंद्र के प्रभारी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि बारिश दलहन-तिलहन के लिए फायदेमंद और आलू के लिए नुकसानदायक साबित होगी।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ऐसा मौसम अगले कुछ दिनों तक बना रहेगा। बारिश के कारण तापमान में कोई खास बदलाव नहीं आया है। शाम को अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
पिछले कई दिन निकली कड़ाके की धूप
वाराणसी में पिछले कई दिनों से दिन में तेज धूप निकल रही थी। बुधवार को भी तेज धूप निकली लेकिन शाम को नम पछुआ हवाओं से सिहरन बढ़ गई।
पश्चिमी विक्षोभ की वजह से एक बार फिर से चार फरवरी से वाराणसी समेत पूर्वांचल का मौसम बदलने की संभावना है। इस दौरान बादल छाए रहने के साथ ही नम हवाओं के साथ ही बूंदाबांदी की भी संभावना है।
किसानों की मुश्किलें बढ़ीं
गरज चमक संग बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। जानकारों के अनुसार, सब्जियों के साथ-साथ गेहूं और सरसों की फसलों को नुकसान होगा। साथ ही जायद की फसलों की बुआई भी प्रभावित होगी। कृषि विज्ञान केंद्र कल्लीपुर के प्रभारी डॉ. नरेंद्र रघुवंशी के मुताबिक, बारिश और ओलावृष्टि से फूल वाली फसल जैसे सरसों, चना, मटर को पांच से 10 प्रतिशत तक नुकसान होगा। बारिश के बाद अगर तेज हवा चली तो गेहूं के फसल गिरने की संभावना है। जिला उद्यान अधिकारी संदीप कुमार गुप्त ने बताया कि बौर लगने वाले आम के पेड़ों पर इस बारिश का कोई असर नहीं होगा।