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वाराणसी-हल्दिया जलमार्ग:  रामनगर बंदरगाह का पीपीपी मॉडल पर होगा संचालन, बाधा बन रहे यूपी-बिहार के पुल

Tue, 23 Feb 2021 01:22 AM IST
हरि User न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: हरि User Updated Tue, 23 Feb 2021 01:22 AM IST
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Varanasi to Haldia waterway: Ramnagar port to be operational on PPP model
जलमार्ग

जलमार्ग-1 वाराणसी-हल्दिया के बीच परिवहन के लिए रामनगर बंदरगाह को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर दिया जा रहा है। इसके लिए टेंडर आदि की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मार्च के अंतिम सप्ताह तक बंदरगाह को पीपीपी मॉडल पर सौंप दिया जाएगा। इसके बाद संबंधित कंपनी जल परिवहन को बढ़ावा देने संबंधी योजनाओं पर कार्य करेगी। यह बातें इंडियन वाटरवेज अथॉरिटी आफ इंडिया (आईडब्ल्यूएआई) की अध्यक्षा डॉ. अमिता प्रसाद ने सोमवार को नदेसर स्थित होटल में अमर उजाला से बातचीत में कहीं।

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अंतरदेशीय जल परिवहन की संभावनाओं और अवसर को लेकर आयोजित बैठक के दौरान डॉ. अमिता ने बताया कि हल्दिया-वाराणसी जलमार्ग-1 के बीच अड़चनों और परिवहन को बढ़ावा देने को निजी क्षेत्र की कंपनी काम करेगी। बंदरगाह पर प्रबंधक तैनात होंगे तो जल परिवहन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही बंदरगाह का विस्तार भी होगा।
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बंदरगाह के दोनों तरफ भूमि को उपयोग में लेने की भी कवायद चल रही है। एक तरफ 65 एकड़ में फ्रेट विलेज बसाया जाएगा, इसके लिए राज्य सरकार की पहल से भूमि उपलब्ध करा दी गई है। आईडब्ल्यूएआई इस मद में अब तक 41 करोड़ रुपये राज्य सरकार को आवंटित कर दिया गया। दूसरी ओर बंदरगाह को जोड़ने वाली सड़क को बेहतर बनाने की भी दिशा में काम हो रहा है, ताकि एक साथ भारी वाहनों की आवाजाही में कोई बाधा न उत्पन्न हो।
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बाधा बन रहे यूपी-बिहार के 12 पुल

गंगा के रास्ते बनारस से पटना के बीच जलपोत के संचालन में आ रही बाधाओं का भी सर्वे कराया जा रहा है, आईडब्ल्यूएआई की अध्यक्षा डॉ. अमिता ने बताया कि सर्वे के दौरान अभी तक यही समझ में आया है कि गाजीपुर में ड्रेजिंग की जरूरत है। चूंकि इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया भी चल रही है, लेकिन अभी तक कोई कंपनी आगे नहीं आई है। गाजीपुर में लगभग 24 किमी तक ड्रेजिंग कराने की जरूरत है।

ऐसा नहीं होने से जलपोत के संचालन में रुकावट पैदा होती है। इसके बाद भागलपुर में डाल्फिन के चलते दिक्कतें आ रही हैं, हालांकि इसके लिए वन्य जीव प्रभाग अधिकारियों के बीच बैठक कर चुनौतियों से पार पाने की कवायद जारी है। सबसे बड़ी बाधा वाराणसी से पटना के बीच 12 पुल की आ रही है। वाराणसी से बिहार बार्डर तक 4 पुल और बिहार राज्य में 8 पुल चिह्नित किए गए हैं। पिछले दिनों बांग्लादेश की तकनीकी टीम ने भी डिब्रूगढ़ से लेकर कोलकाता, पटना और वाराणसी के बीच बंदरगाह का जायजा लिया था तो इन सब बातों पर भी चर्चाएं हुई थीं।

जलमार्ग के जरिए विदेशों में जाएगी भदोही की कालीन

जल परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नदेसर स्थित होटल में आयोजित बैठक में कोलकाता, पटना, वाराणसी, भदोही के उद्यमियों व निर्यातकों संग भी बैठक की गई। कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने फ्रेट विलेज व अर्थ गंगा प्रोजेक्ट के संबंध में जानकारी दी। भदोही के कालीन निर्यातकों ने बंदरगाह से जलपोत के जरिए कोलकाता के रास्ते बांग्लादेश तक कालीन निर्यात पर जोर दिया।

वहीं, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष आरके चौधरी, राजेश भाटिया, नीरज पारिख, यूपीया के अध्यक्ष जुनैद अंसारी ने भी बंदरगाह के जरिए माल परिहवन को बढ़ावा देने को आईडब्ल्यूएआई अधिकारियों संग मंथन किया। बैठक में आईडब्ल्यूआई के ट्रैफिक एंड लॉजिस्टिक शशि भूषण शुक्ला, अलकनंदा क्रूज के निदेशक विकास मालवीय, आईडब्ल्यूएआई के तकनीकी निदेशक एके मिश्रा आदि ने विचार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापित आईडब्ल्यूएआई के ओआईसी राकेश कुमार ने किया। 

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