Varanasi Serial Blast Case: मंदिर जैसा दिखने पर वाराणसी कैंट स्टेशन को आतंकियों ने बनाया था निशाना
आतंकी वलीउल्लाह और उसके साथियों ने बनारस में बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने की योजना बनाई थी। वलीउल्लाह ने खुलासा किया था कि कैंट स्टेशन को निशाना इसलिए बनाया था क्योंकि इसकी बाहरी काया मंदिर जैसी थी।
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सात वार नौ त्योहार वाली काशी में पहली बार आतंक का खंजर 2006 में दहशतगर्द वल्लीउल्लाह ने घोंपा था। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद वलीउल्लाह ने खुलासा किया था कि कैंट स्टेशन को निशाना इसलिए बनाया था क्योंकि इसकी बाहरी काया मंदिर जैसी थी। उसके निशाने पर धार्मिक स्थल के साथ ही भीड़भाड़ वाले इलाके थे।
यही कारण है कि उसने मंगलवार का दिन चुनकर संकटमोचन मंदिर से लेकर दशाश्वमेध घाट और कैंट रेलवे स्टेशन को अपना निशाना बनाया था। अगर वह अपने नापाक मंसूबों में कामयाब हो गया होता तो बनारस में बड़ी तबाही होती। वल्लीउल्लाह की फांसी की सजा के बाद भी अन्य आतंकियों की फरारी से बनारस के लोग आहत हैं।
दरअसल, आतंकी वलीउल्लाह और उसके साथियों ने बनारस में बड़ी आतंकी घटना को अंजाम देने की योजना बनाई थी। यही कारण है कि बम विस्फोट के लिए उन जगहों को चुना था जहां काशी की जान बसती है। आस्था के बडे़ केंद्र संकट मोचन मंदिर, कैंट स्टेशन पर अपने नापाक मंसूबों में सफल होने वाले आतंकी गिरोह ने दशाश्वमेध घाट और गोदौलिया चौराहे पर कूकर बम रखकर बड़ी साजिश रची थी।
एक साल पहले की घटना पर प्रशासन ने डाला था पर्दा
गंगा आरती में शामिल सैकड़ों लोगों के साथ ही शाम को दशाश्वमेध घाट पर बड़े पैमाने पर लोगों की भीड़ थी। हालांकि दशाश्वमेध घाट और गोदौलिया पर रखे गए बम समय रहते पकड़े गए और उन्हें डिफ्यूज कर दिया गया। बनारस में सबसे पहले विस्फोट दशाश्वमेध के ब्रह्मेश्वर महादेव मंदिर में वर्ष 2005 में हुआ था।
मगर, उस समय प्रशासन ने इस घटना पर पर्दा डालते हुए इसे सिलिंडर विस्फोट साबित कर दिया था। उस घटना को नजरअंदाज किए जाने के कारण आतंकी संगठन बनारस में बेखौफ होकर एक साल बाद ही पूरे शहर को दहलाने की योजना बना दी।
बिन अधिकारी हो गया था बनारस
विस्फोट की आतंकी घटना से बिलख रहे बनारस में उस दिन ज्यादातर जिम्मेदार अधिकारी शहर से नदारद थे। तत्कालीन डीआईजी आरएन यादव, एसएसपी नवनीत सिकेरा, एसपी सिटी दिनेश चंद दूबे और जिलाधिकारी इटावा में शादी समारोह में गए थे। उस समय आईजी केएल मीणा और चार्ज पर एसएसपी परेश पांडेय जब तक कुछ समझ पाते तब तक आतंकी घटना को अंजाम देकर निकल चुके थे।
फरार आतंकियों को लेकर पुलिस रही बेपरवाह
बनारस का दिल दहलाने वाली घटना में पुलिस ने कई आतंकियों की शिनाख्त की, मगर केवल वजीउल्लाह को ही पकड़ पाई। हूजी कमांडर मोहम्मद शमीम, मोहम्मद जकारिया, मुस्तफिज और बशीर तक बनारस पुलिस नहीं पहुंच पाई। हालांकि मोहम्मद जकारिया को मुठभेड़ में जम्मू बॉर्डर पर मार गिराया गया था। मगर, बाकी आतंकियों का कोई सुराग पुलिस के पास नहीं है।
पेड़ ने बचाई थी लोगों की जान
संकटमोचन मंदिर में विस्फोट के दौरान रीठा के पेड़ ने भक्तों की जान बचा ली थी। महंत विश्वंभर नाथ मिश्र की माने तो बम का पहला झटका इस पेड़ की मोटी टहनियों ने झेला था और यही कारण है कि दर्जनों भक्त विस्फोट से बाल-बाल बच गए थे। पेड़ की टहनियों पर विस्फोटक के चलते ज्यादातर हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ था। उसके बाद से ही यह पेड़ भी आस्था का केंद्र है।